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बैरीकेडिंग तोड़ पहुंचे कलक्ट्रेट, किया प्रदर्शन
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बैरीकेडिंग तोड़ पहुंचे कलक्ट्रेट, किया प्रदर्शन
बिजनौर। एमएसपी पर फसल खरीद की गारंटी की मांग और कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों के बैनर तले किसानों ने सड़कों पर भारी पुलिस बल होने के बावजूद प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भाकियू के बैनर तले किसानों ने बैरीकेटिंग तोड़कर कलक्ट्रेट में पंचायत की तो राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के नेताओं को पुलिस द्वारा घर में नजरबंद करने के बाद भी कार्यकर्ताओं ने बैरीकेटिंग तोड़कर प्रदर्शन किया। बाकी संगठनों ने भी ज्ञापन दिया। सभी ने किसान हित में दोनों मांगों को पूरा करने को कहा है। भाकियू की पंचायत में तीन दिन तक किसानों से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली दिल्ली भेजने का निर्णय लिया गया।
पुलिस ने राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा व जिलाध्यक्ष विनोद कुमार को रविवार रात घर में ही नजरबंद कर दिया था। प्रशासन ने किसानों को कलक्ट्रेट आने से रोकने के लिए सिविल लाइन पुलिस चौकी व विकास भवन के सामने बैरीकेडिंग करके भारी पुलिस बल तैनात किया था। कलक्ट्रेट के आसपास के क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया था। पुलिस ने आम नागरिकों को भी कलक्ट्रेट की ओर फटकने तक नहीं दिया। सेंटमेरी चौराहे पर भी भारी पुलिस बल तैनात रहा।
भाकियू कार्यकर्ता गांव रशीदपुर गढ़ी में एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट के लिए कूच किया। सिविल लाइन पुलिस चौकी पर पुलिस ने किसानों को रोकने की कोशिश की लेकिन किसान नहीं रूके और बैरीकेटिंग तोड़ दिया। बैरीकेटिंग तोड़कर किसान नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे और दो घंटे तक पंचायत की। वक्ताओं ने कहा कि किसान की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। किसान अब अपना हक लेकर रहेंगे। सरकार पूंजीपतियों के लिए अब तक काम करती रही है लेकिन अब सरकार को किसानों के काम करना होगा। किसानों ने ही केंद्र और प्रदेश की सरकार बनवाई थी और किसान चाहे तो अगले चुनाव में सरकार गिरा भी सकते हैं। यूपी गेट में चल रहे किसानों के समर्थन में 15 से 17 दिसंबर तक ट्रैक्टर ट्रालियों से दिल्ली कूच करने का एलान किया गया। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नजीबाबाद एसडीएम बृजेश कुमार को दिया गया। ज्ञापन में न्यूनतम समर्थन मूल्य को बाध्यकारी करने, तीनों कृषि बिल वापस करने, गन्ना मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल करने, बकाया गन्ना भुगतान ब्याज सहित करने की मांग की गई। इस दौरान ठाकुर रामअवतार सिंह, सुनील प्रधान, अतुल कुमार, संदीप त्यागी, धर्मवीर धनकड़, विजयपाल सिंह, जय सिंह, राजेंद्र सिंह आदि नेता मौजूद रहे।
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दोनों नेताओं को रिहा करने पर आंदोलन किया खत्म
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार व वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा को पुलिस द्वारा नजरबंद करने के बावजूद किसान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सेंटमेरी स्कूल पर एकत्र हुए। किसान ज्ञापन देने के लिए कलक्ट्रेट जाने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। किसानों ने बैरीकेडिंग तोड़ दी। नारेबाजी करते हुए किसान स्टेशन चौराहे पर पहुंच गए और वहां धरना देकर सड़क जाम करके बैठ गए। थोड़ी ही देर में डीएम रमाकांत पांडेय किसानों के बीच पहुंच गए। किसानों ने डीएम को ज्ञापन दिया और सड़क से उठ गए। साथ ही किसानों ने डीएम से दोनों नेताओं को छोड़ने को कहा। पुलिस दोनों नेताओं को चार बजे छोड़ने की बात कह रही थी। किसानों ने दोनों नेताओं को तुरंत रिहा न करने पर जाम लगाने की चेतावनी दे दी। किसान फिर से सेंटमेरी चौराहे पर एकत्र हो गए। एसपी धर्मवीर सिंह ने फोन करके दोनों नेताओं को ढाई बजे रिहा कराया। दोनों नेताओं के सेंट मेरी चौक पहुंचने पर ही किसानों ने आंदोलन खत्म किया। इस दौरान जिला महासचिव वेदप्रकाश, तहसील अध्यक्ष अंकुर चौधरी, गौरव, कपिल राणा, हरगुलाल, विवेक चौधरी, उपेंद्र राठी, मगन सिंह, राजीव कुमार, खिलेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
‘कृषि कानून किसानों के खिलाफ बनाए गए हैं’
आजाद किसान यूनियन के नेता प्रदर्शन करते हुए प्रदर्शनी मैदान से कलक्ट्रेट पहुंचे और धरना दिया। किसानों को पुलिस ने नहीं रोका। वक्ताओं ने कहा कि कृषि कानून किसानों के लिए नहीं बल्कि किसानों के खिलाफ बनाए गए हैं। कानूनों से फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रभाव पड़ेगा और पूंजीपति अपने मनमर्जी के दामों से किसानों की फसल खरीदेंगे। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने कहा कि पूरे देश का किसान खुद को बचाने और काले कानूनों को वापस कराने के लिए सड़क पर आया है। तीनों कानूनों को वापस लेकर एमएसपी को कानून का दर्जा देने की मांग की गई। इस दौरान जिलाध्यक्ष धीरज कुमार, गुरजीत सिंह, शीशराम सिंह, संजीव राठी, सुभाष काकरान, सतेंद्र राठी, विजयपाल सिंह, हाजी शकील, धर्मेंद्र, नरपाल सिंह आदि किसान मौजूद रहे।
प्रदर्शन करते पहुंचे कलक्ट्रेट
भाकियू अंबावता के बैनर तले किसान प्रदर्शन करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम रमाकांत पांडेय को दिया। जिलाध्यक्ष विजय सिंह ने कहा कि सरकार के लाए तीनों कानून किसानों के खिलाफ हैं। इन तीनों कानूनों को खत्म कर एमएसपी का कानून बनाना चाहिए। इस दौरान शिव कुमार, सत्यपाल राजपूत, हरवीर सैनी, ओमवीर पहलवान, फुरकान, सूफी आलम, विनित त्यागी, एहसान, मुफ्ती नफीस आदि मौजूद रहे।
‘किसानों पर थोपो गए हैं कृषि कानून’
भाकियू भानू जिलाध्यक्ष कुलबीर सिंह ने किसानों ने साथ जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में धरना दिया। जिलाध्यक्ष कुलबीर सिंह ने कहा कि बिना किसानों से बात किए सरकार ने तीनों कानून उन पर थोप दिए हैं। तीनों कृषि कानून वापस होने चाहिए और किसानों से वार्ता के बाद नया कानून बनना चाहिए। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अपर सांख्यिकी अधिकारी विकल भारती को दिया गया। ज्ञापन में गन्ना मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, किसानों के लिए डीजल के आधे दाम करने, गन्ना भुगतान 14 दिन के अंदर करने तथा 60 साल से अधिक आयु के किसानों को पेंशन देने की भी मांग की गई। इस दौरान तमाम किसान मौजूद रहे।
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बिजनौर। एमएसपी पर फसल खरीद की गारंटी की मांग और कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों के बैनर तले किसानों ने सड़कों पर भारी पुलिस बल होने के बावजूद प्रदर्शन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भाकियू के बैनर तले किसानों ने बैरीकेटिंग तोड़कर कलक्ट्रेट में पंचायत की तो राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के नेताओं को पुलिस द्वारा घर में नजरबंद करने के बाद भी कार्यकर्ताओं ने बैरीकेटिंग तोड़कर प्रदर्शन किया। बाकी संगठनों ने भी ज्ञापन दिया। सभी ने किसान हित में दोनों मांगों को पूरा करने को कहा है। भाकियू की पंचायत में तीन दिन तक किसानों से भरी ट्रैक्टर ट्रॉली दिल्ली भेजने का निर्णय लिया गया।
पुलिस ने राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा व जिलाध्यक्ष विनोद कुमार को रविवार रात घर में ही नजरबंद कर दिया था। प्रशासन ने किसानों को कलक्ट्रेट आने से रोकने के लिए सिविल लाइन पुलिस चौकी व विकास भवन के सामने बैरीकेडिंग करके भारी पुलिस बल तैनात किया था। कलक्ट्रेट के आसपास के क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया था। पुलिस ने आम नागरिकों को भी कलक्ट्रेट की ओर फटकने तक नहीं दिया। सेंटमेरी चौराहे पर भी भारी पुलिस बल तैनात रहा।
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भाकियू कार्यकर्ता गांव रशीदपुर गढ़ी में एकत्र हुए और नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट के लिए कूच किया। सिविल लाइन पुलिस चौकी पर पुलिस ने किसानों को रोकने की कोशिश की लेकिन किसान नहीं रूके और बैरीकेटिंग तोड़ दिया। बैरीकेटिंग तोड़कर किसान नारेबाजी करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे और दो घंटे तक पंचायत की। वक्ताओं ने कहा कि किसान की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। किसान अब अपना हक लेकर रहेंगे। सरकार पूंजीपतियों के लिए अब तक काम करती रही है लेकिन अब सरकार को किसानों के काम करना होगा। किसानों ने ही केंद्र और प्रदेश की सरकार बनवाई थी और किसान चाहे तो अगले चुनाव में सरकार गिरा भी सकते हैं। यूपी गेट में चल रहे किसानों के समर्थन में 15 से 17 दिसंबर तक ट्रैक्टर ट्रालियों से दिल्ली कूच करने का एलान किया गया। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन नजीबाबाद एसडीएम बृजेश कुमार को दिया गया। ज्ञापन में न्यूनतम समर्थन मूल्य को बाध्यकारी करने, तीनों कृषि बिल वापस करने, गन्ना मूल्य 450 रुपये प्रति क्विंटल करने, बकाया गन्ना भुगतान ब्याज सहित करने की मांग की गई। इस दौरान ठाकुर रामअवतार सिंह, सुनील प्रधान, अतुल कुमार, संदीप त्यागी, धर्मवीर धनकड़, विजयपाल सिंह, जय सिंह, राजेंद्र सिंह आदि नेता मौजूद रहे।
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दोनों नेताओं को रिहा करने पर आंदोलन किया खत्म
राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन जिलाध्यक्ष विनोद कुमार व वेस्ट यूपी महासचिव कैलाश लांबा को पुलिस द्वारा नजरबंद करने के बावजूद किसान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सेंटमेरी स्कूल पर एकत्र हुए। किसान ज्ञापन देने के लिए कलक्ट्रेट जाने लगे तो पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। किसानों ने बैरीकेडिंग तोड़ दी। नारेबाजी करते हुए किसान स्टेशन चौराहे पर पहुंच गए और वहां धरना देकर सड़क जाम करके बैठ गए। थोड़ी ही देर में डीएम रमाकांत पांडेय किसानों के बीच पहुंच गए। किसानों ने डीएम को ज्ञापन दिया और सड़क से उठ गए। साथ ही किसानों ने डीएम से दोनों नेताओं को छोड़ने को कहा। पुलिस दोनों नेताओं को चार बजे छोड़ने की बात कह रही थी। किसानों ने दोनों नेताओं को तुरंत रिहा न करने पर जाम लगाने की चेतावनी दे दी। किसान फिर से सेंटमेरी चौराहे पर एकत्र हो गए। एसपी धर्मवीर सिंह ने फोन करके दोनों नेताओं को ढाई बजे रिहा कराया। दोनों नेताओं के सेंट मेरी चौक पहुंचने पर ही किसानों ने आंदोलन खत्म किया। इस दौरान जिला महासचिव वेदप्रकाश, तहसील अध्यक्ष अंकुर चौधरी, गौरव, कपिल राणा, हरगुलाल, विवेक चौधरी, उपेंद्र राठी, मगन सिंह, राजीव कुमार, खिलेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
‘कृषि कानून किसानों के खिलाफ बनाए गए हैं’
आजाद किसान यूनियन के नेता प्रदर्शन करते हुए प्रदर्शनी मैदान से कलक्ट्रेट पहुंचे और धरना दिया। किसानों को पुलिस ने नहीं रोका। वक्ताओं ने कहा कि कृषि कानून किसानों के लिए नहीं बल्कि किसानों के खिलाफ बनाए गए हैं। कानूनों से फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर प्रभाव पड़ेगा और पूंजीपति अपने मनमर्जी के दामों से किसानों की फसल खरीदेंगे। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने कहा कि पूरे देश का किसान खुद को बचाने और काले कानूनों को वापस कराने के लिए सड़क पर आया है। तीनों कानूनों को वापस लेकर एमएसपी को कानून का दर्जा देने की मांग की गई। इस दौरान जिलाध्यक्ष धीरज कुमार, गुरजीत सिंह, शीशराम सिंह, संजीव राठी, सुभाष काकरान, सतेंद्र राठी, विजयपाल सिंह, हाजी शकील, धर्मेंद्र, नरपाल सिंह आदि किसान मौजूद रहे।
प्रदर्शन करते पहुंचे कलक्ट्रेट
भाकियू अंबावता के बैनर तले किसान प्रदर्शन करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे और राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम रमाकांत पांडेय को दिया। जिलाध्यक्ष विजय सिंह ने कहा कि सरकार के लाए तीनों कानून किसानों के खिलाफ हैं। इन तीनों कानूनों को खत्म कर एमएसपी का कानून बनाना चाहिए। इस दौरान शिव कुमार, सत्यपाल राजपूत, हरवीर सैनी, ओमवीर पहलवान, फुरकान, सूफी आलम, विनित त्यागी, एहसान, मुफ्ती नफीस आदि मौजूद रहे।
‘किसानों पर थोपो गए हैं कृषि कानून’
भाकियू भानू जिलाध्यक्ष कुलबीर सिंह ने किसानों ने साथ जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय में धरना दिया। जिलाध्यक्ष कुलबीर सिंह ने कहा कि बिना किसानों से बात किए सरकार ने तीनों कानून उन पर थोप दिए हैं। तीनों कृषि कानून वापस होने चाहिए और किसानों से वार्ता के बाद नया कानून बनना चाहिए। प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अपर सांख्यिकी अधिकारी विकल भारती को दिया गया। ज्ञापन में गन्ना मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल करने, किसानों के लिए डीजल के आधे दाम करने, गन्ना भुगतान 14 दिन के अंदर करने तथा 60 साल से अधिक आयु के किसानों को पेंशन देने की भी मांग की गई। इस दौरान तमाम किसान मौजूद रहे।