फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bijnor News ›   Cleanliness of the soul

आत्मा का निर्मल होना उत्तम शौच धर्म

Sun, 04 Sep 2022 12:39 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 04 Sep 2022 12:39 AM IST
विज्ञापन
Cleanliness of the soul
नजीबाबाद में दशलक्षण पर्व पर पूजा-अर्चना करते जैन श्रद्घालु। - फोटो : NAZIBABAD
आत्मा का निर्मल होना उत्तम शौच धर्म
विज्ञापन

नजीबाबाद। दशलक्षण पर्व के चतुर्थ दिवस पर श्रद्धालुओं ने उत्तम शौच धर्म की विधि विधान से पूजा अर्चना की। जैन विद्धानों ने कहा कि उत्तम शौच धर्म अर्थात क्रोध, माया और लोभ से मुक्त होना ही उत्तम शौच कहलाता है। आत्मा की निर्मलता होना उत्तम शौच धर्म है।
श्री दिगंबर जैन पंचायती और मौ. संतोमालन स्थित सरजायती मंदिर में श्रद्धालुओं में उत्तम शौच धर्म की पूजा अर्चना और आराधना की। जैन अनुयायी जितेंद्र जैन ने बताया कि जैन श्रावकों के लिए दशलक्षण धर्म सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोभ मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। लोभ के कारण ही भाई, भाई का शत्रु और पुत्र, पिता का शत्रु बना है। समाज में व्याप्त हिंसा, अनाचार, भ्रष्टाचार, चोरी, अपहरण हत्या, अपराध सब लोभ के कारण ही होता है। यदि मनुष्य लालसा, लालच, तृष्णा, अभिलाषा का त्याग कर दे, तो उसकी आत्मा पवित्र हो जाती है।
विज्ञापन

पूजा अर्चना में पारसनाथ जैन, जनेश्वर प्रसाद जैन, जितेंद्र जैन, दीपक जैन, संदीप जैन, राहुल जैन, नमन जैन, दीपक, सुभाष, सुनीता, नीरज, कुमकुम आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed