{"_id":"577ff1dc4f1c1b62437f9ac1","slug":"childrens-lives-saved-by-leave","type":"story","status":"publish","title_hn":"छुट्टी ने बचा ली बच्चाें की जान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छुट्टी ने बचा ली बच्चाें की जान
ब्यूरो/अमर उजाला
Updated Sat, 09 Jul 2016 12:03 AM IST
विज्ञापन
चंदक क्षेत्र के ग्राम बुडगरा में प्राथमिक विद्यालय के भवन पर गिरा पेड़।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चंदक में प्राथमिक विद्यालय बुडगरा के पास खड़ा 100 साल से अधिक पुराना पेड़ शुक्रवार को भरभराकर स्कूल भवन के ऊपर गिर गया। इससे स्कूल के भवन में दरार आ गई और छज्जा भी टूट गया। गनीमत रही कि घटना के वक्त स्कूल में छुट्टी थी। इसके चलते बड़ा हादसा होने से टल गया और बच्चाें की जान आफत में पड़ने से बच गई।
स्कूल परिसर में खड़ा पीपल के इस प्राचीन पेड़ में दीमक लग गई थी। इससे पेड़ कमजोर हो गया था। पेड़ का आधा हिस्सा बुधवार को बारिश के साथ आई हवा में टूटकर गिर गया। इसके बाद शुक्रवार को पेड़ का बाकी आधा हिस्सा करीब नौ बजे कक्षाओं की ओर भरभराकर गिर गया। पेड़ गिरने से स्कूल भवन के लेंटर में दरार आ गई। कक्षाओं के आगे बना छज्जा भी पेड़ की बड़ी शाखाओं के दबाव से टूट गया। ईद के कारण शुक्रवार को भी स्कूल की छुट्टी थी। अगर स्कूल की छुट्टी न होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। गांव के 92 वर्षीय धर्मेंद्र सिंह के अनुसार उन्होंने बचपन से ही इस पेड़ को देखा है। उनके अनुसार पेड़ की उम्र सवा सौ साल से भी अधिक होगी। पेड़ के नीचे गांव वाले बहुत सी धार्मिक एवं पारंपरिक कार्य यहां करते थे।
विज्ञापन
स्कूल परिसर में खड़ा पीपल के इस प्राचीन पेड़ में दीमक लग गई थी। इससे पेड़ कमजोर हो गया था। पेड़ का आधा हिस्सा बुधवार को बारिश के साथ आई हवा में टूटकर गिर गया। इसके बाद शुक्रवार को पेड़ का बाकी आधा हिस्सा करीब नौ बजे कक्षाओं की ओर भरभराकर गिर गया। पेड़ गिरने से स्कूल भवन के लेंटर में दरार आ गई। कक्षाओं के आगे बना छज्जा भी पेड़ की बड़ी शाखाओं के दबाव से टूट गया। ईद के कारण शुक्रवार को भी स्कूल की छुट्टी थी। अगर स्कूल की छुट्टी न होती तो बड़ा हादसा हो सकता था। गांव के 92 वर्षीय धर्मेंद्र सिंह के अनुसार उन्होंने बचपन से ही इस पेड़ को देखा है। उनके अनुसार पेड़ की उम्र सवा सौ साल से भी अधिक होगी। पेड़ के नीचे गांव वाले बहुत सी धार्मिक एवं पारंपरिक कार्य यहां करते थे।
विज्ञापन