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खुले में शौच को गई महिला को प्रसव, नवजात की मौत

अमर उजाला/बिजनौर Updated Mon, 03 Sep 2018 12:04 AM IST
बिजनौर में विकास भवन में शौचालय में लगा ताला।
बिजनौर में विकास भवन में शौचालय में लगा ताला। - फोटो : अमर उजाला
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हल्दौर में जिले को शौचमुक्त करने का केवल दिखावा ही है। गांव कुम्हारपुरा में घर पर शौचालय नहीं होने पर जंगल गई एक गर्भवती महिला की खुले में डिलीवरी होने पर उसके नवजात शिशु की मौत हो गई। इस घटना से परिजनों में कोहराम मचा रहा।
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 गांव के कई लोग शौचालय नहीं होने पर खुले में शौच करने को मजबूर हैं। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत जिलेभर की ग्राम पंचायतों को खुले में शौच मुक्त करने के लिए निशुल्क शौचालय बनवाए गए हैं। प्रशासन जिले को शौचमुक्त करने का दावा कर रहा है, पर यह दावा हवाई ही नजर आ रहा है।
 कुम्हारपुरा में 172 शौचालय बनवाए गए। अब भी कई लोगों के घरों में शौचालय नहीं बने। इन परिवारों को मजबूर होकर खुले में शौच करने जंगल  जाना पड़ रहा है। गांव के हृदेश कुमार की पत्नी ज्योति देवी गर्भवती थी। उसके घर पर शौचालय नहीं है। ज्योति गर्भवस्था के दौरान अकेली जंगल में शौच के लिए गई थी। वहां पैर फिसलने से जमीन पर गिर गई। ज्योति को तेजी से प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। महिला जंगल में दर्द से कराहती रही पर आसपास कोई न होने के कारण किसी को उसकी आवाज सुनाई नहीं दी। जंगल में ही ज्योति का प्रसव हो गया और उसने एक पुत्र को जन्म दिया। समय से उसे उपचार न मिल पाने के कारण नवजात ने थोड़ी देर में मौके पर ही दम तोड़ दिया। महिला की चीख पुकार सुनकर लोग जंगल की ओर दौड़े। आनन-फानन में महिला को उपचार के लिए एक निजी चिकित्सक के यहां ले जाया गया, जहां महिला की हालत में सुधार है। वहीं ज्योति के पति हृदेश कुमार का आरोप है कि उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान राजबाला देवी से अपने घर में शौचालय बनवाने की गुहार लगाई, लेकिन प्रधान ने उनकी मांग को अनसुना कर दिया। उन्होंने ग्राम प्रधान को अपने नवजात पुत्र की मौत का जिम्मेदार ठहराया है। उसका कहना है कि उसके घर में शौचालय बना होता तो उसकी पत्नी को शौच के लिए खुले में जंगल नहीं जाना पड़ता और उसके पुत्र की मौत नहीं होती। बृजेश,  महेश , दिनेश,  करन सिह , पंकज,  राजकुमार , टेकचंद,  घनश्याम,  मदन सिंह , सुरजीत ,ललित , रामकरन सिंह,  रिशिपाल , नरेश , अनुज आदि ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान ने मनमाने ढंग से केवल अपने चहेतों के शौचालय बनवाए हैं। कई ग्रामीणों के घरों में शौचालय न होने पर उन्हें मजबूर होकर खुले में शौच को जाना पड़ता है।  
ग्रामीणों ने एकजुट होकर मामले की शिकायत  डीएम  से करने का निर्णय लिया है । ग्राम प्रधान राजबाला ने उन पर लगाए गए आरोपों को निराधार बताया है। ग्राम पंचायत सचिव ने मामले से पल्ला झाड़ते हुए मामला तत्कालीन पंचायत सचिव के कार्यकाल का होना बताया है।

कुम्हारपुरा की घटना खोल रही प्रशासन की पोल
बिजनौर। खुले से शौचमुक्त हो चुके जिले में खुले में शौच करने गई मां के कोख से असमय जन्मे अविकसित बच्चे की मौत शासन प्रशासन के दावों की कलई खोलती है। बच्चे की मौत परिजनों के सामने ही हो गई और वे कुछ नहीं कर पाए। जिस जिले की डीएम को खुले से शौचमुक्त अभियान के लिए सम्मानित किया गया हो, वहां इस तरह का हादसा सभी को सोचने पर मजबूर कर देता है। यह हाल तब है जब जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जिले गोरखपुर से भी ज्यादा शौचालय बने हैं।
स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत जिले भर के गांवों में 50 हजार से भी अधिक शौचालय बनी हैं। शौचालय बनाने में जिला प्रदेश के शीर्ष के पांच जिलों में शामिल है। यहां तक कि जिले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जिले गोरखपुर से भी ज्यादा शौचालय बने हैं। बिजनौर की डीएम रही बी चंद्रकला को सम्मानित किया गया था, लेकिन समय समय पर होने वाले हादसे शासन के इंतजामों की पोल खोलते हैं। गांव कुम्हापुरा निवासी हृदेश कुमार गरीब है और मेहनत मजदूरी करके अपना घर चलाता था। उसकी पत्नी ज्योति साढ़े छह माह की गर्भवती थी।
घर में शौचालय न होने के कारण व शौच के लिए रविवार को जंगल गई थी। वहां पैर फिसलने से वह गिरकर घायल हो गई। उसके जंगल में वीराने में ही प्रसव हो गया और उसने बेटे को जन्म दिया।
वहां से गुजर रही महिलाओं ने ज्योति को इस हालत में देखकर घर लेकर गईं। अस्पताल में बच्चे को ले जाया गया तो चिकित्सकों ने उसे बहुत कमजोर व अविकसित बताते हुए उपचार करने से मना कर दिया। परिजन बच्चे को घर ले आए। घर पर परिजनों के सामने ही मासूम की सांसे थम गई। असहाय परिजन बच्चे को अपने सामने ही आखिरी सांसे लेते देखने को मजबूर रहे। वह छह घंटे ही जी पाया। बेटे की मौत से परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है। शासन प्रशासन कागजों पर तो गांवों को खुले से शौचमुक्त घोषित कर रहे हैं, लेकिन मौके पर जाकर सच्चाई देखने वाला कोई नहीं है। अफसर केवल अपने कार्यालयों में ही बैठकर दावे करते हैं और अधिकारियों को रिपोर्ट भेज देते हैं।

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