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Bijnor News: चौधरी कुलमणि सिंह... जिनसे खौफ खाती थी ब्रिटिश सरकार

Sun, 11 Aug 2024 11:58 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Aug 2024 11:58 PM IST
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Chaudhary Kulmani Singh... whom the British government was afraid of
नजीबाबाद विधानसभा क्षेत्र के भूतपूर्व विधायक चौधरी मुकंदी सिंह के साथ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
मुख्य डाकघर और रेलवे स्टेशन को कर दिया था आग के हवाले
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12 अगस्त को मनाया जाता है चौधरी कुलमणि दिवस


सतीश शर्मा
धामपुर। धामपुर निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चौधरी कुलमणि सिंह का देश की आजादी की लड़ाई में बड़ा योगदान रहा है। उनके बलिदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। 12 अगस्त 1942 कुलमणि सिंह ने महात्मा गांधी के ओजस्वी विचारों का सुन क्रांति की अलख जगानी शुरू कर दी थी। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया तो उन्होंने भीड़ के साथ मुख्य डाकघर और रेलवे स्टेशन में तोड़फोड़ कर उसे आग के हवाले कर दिया था। वह कई सालों तक जेल में रहे।
वर्ष 1910 में कुलमणि सिंह का जन्म मोहल्ला खातियान में चौधरी उमराव सिंह के घर हुआ था। 1929 में महात्मा गांधी धामपुर आए थे। महात्मा गांधी के ओजस्वी विचारों को सुन कुलमणि सिंह काफी प्रभावित हुए थे। आजादी के आंदोलन में उन्होंने सक्रियता शुरू कर दी थी। गांधी जी ने 1942 में करो या मरो आंदोलन शुरू किया तो धामपुर में आंदोलन की कमान कुलमणि सिंह ने संभाली थी।
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क्रांति की ज्वाला जगाते उन्होंने 12 अगस्त 1942 के दिन अंग्रेजी शासन को चुनौती दे डाली। मुख्य डाकघर, रेलवे स्टेशन को आग के हवाले कर दिया। और भी कई जगहों पर जमकर तांडव मचाया। इस क्रांति ने जिले के लोगों को एकजुट कर दिया। घटना से बौखलाई ब्रिटिश हुकूमत ने कुलमणि को पकड़ने के लिए उनके घर पर दबिश थी। उनकी बहन और बुआ ने ललकार कर पुलिस को खदेड़ दिया था।
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रेल व्यवस्था हो गई थी ठप

जब भीड़ ने रेलवे स्टेशन को आग के हवाले कर दूरसंचार व्यवस्था को ठप कर दिया था। रेल विभाग में हड़कंप मच गया था। व्यवस्था के ठप होने से रेलगाडि़यां जहां की तहां खड़ी हो गईं थीं। डाक व्यवस्था भी गड़बड़ा गई थी।




1953 में धामपुर पालिका के बने थे चेयरमैन
चौधरी कुलमणि सिंह एक साल से अधिक बिजनौर कारावास में बंद रहे। 1953 में पालिका चुनाव लड़ा और चेयरमैन बने।


सश्रम कारावास और अर्थदंड की हुई थी सजा

दामाद व बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष गजेंद्र सिंह एडवोकेट ने बताया कि साल 1941 में कुलमणि को प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट बिजनौर ने सरकार विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहने के कारण डिफेंस आफ इंडिया रूल्स के प्रावधान 121 के अंतर्गत उन्हें एक वर्ष सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई। जिला जेल में बंदियों को सरकार के खिलाफ समझाने पर इन्हें बरेली जेल और फिर केंद्रीय कारागार फतेहगढ़ जिला फर्रूखाबाद भेजा गया था। तीन मार्च 1976 को उनका निधन हो गया था।
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