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साहनपुर किले में शस्त्र पूजन कर मनाई विजयदशमी
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नजीबाबाद के साहनपुर किले में दशहरा पूजन कराते पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह।
- फोटो : NAZIBABAD
साहनपुर किले में शस्त्र पूजन कर मनाई विजयदशमी
नजीबाबाद। साहनपुर किले में पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह के नेतृत्व में शस्त्र पूजन के साथ विजयदशमी का त्योहार मनाया गया। पूर्व सांसद की माता अंजलि देवी, पत्नी भावना सिंह और पुत्र रणंजय सिंह के नेतृत्व में साहनपुर किले में भव्य समारोह आयोजित हुआ।
पूर्व सांसद ने बच्चों को मिष्ठान वितरित किया और दशहरा की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में फिल्म प्रोड्यूसर एवं भाजपा नेता वसीम कुरैशी, डॉ. कौशल, वेद प्रकाश शर्मा, राकेश त्यागी, अजीत, कुंवर बलदेव सिंह, कुलवीर सिंह, अवधेश कुमार, देवेंद्र सिंह, राज कुमार प्रजापति, राकेश त्यागी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। किले के बाद पूर्व सांसद ने काली मंदिर, मोटा महादेव मंदिर, रानी सती मंदिर जाकर पूजन किया। साहनपुर रियासत से जमींदारी प्रथा के रूप में करीब 1800 गांव जुड़े थे। लगान कर के रूप में साहनपुर रियासत की गद्दी पर बैठे मुखिया को नजराना भेंट किया जाता था।
1952 में जमींदारी उन्मूलन कानून लागू होने के बाद जमींदारी व्यवस्था बदली और बड़ा बदलाव आया, लेकिन दशहरा मनाने की परंपरा नहीं बदली। पारंपरिक विजयदशमी बनाने की जिम्मेदारी वर्तमान में पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह ने अपने कंधों पर ली। राजा चरत सिंह से विरासत में मिले शस्त्र पूजन और दशहरा पर्व मनाने का दायित्व पूर्व राज्यमंत्री भारतेंद्र सिंह के पिता राजा देवेंद्र सिंह के कंधों पर आई थी।
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नजीबाबाद। साहनपुर किले में पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह के नेतृत्व में शस्त्र पूजन के साथ विजयदशमी का त्योहार मनाया गया। पूर्व सांसद की माता अंजलि देवी, पत्नी भावना सिंह और पुत्र रणंजय सिंह के नेतृत्व में साहनपुर किले में भव्य समारोह आयोजित हुआ।
पूर्व सांसद ने बच्चों को मिष्ठान वितरित किया और दशहरा की शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में फिल्म प्रोड्यूसर एवं भाजपा नेता वसीम कुरैशी, डॉ. कौशल, वेद प्रकाश शर्मा, राकेश त्यागी, अजीत, कुंवर बलदेव सिंह, कुलवीर सिंह, अवधेश कुमार, देवेंद्र सिंह, राज कुमार प्रजापति, राकेश त्यागी सहित अनेक लोग उपस्थित रहे। किले के बाद पूर्व सांसद ने काली मंदिर, मोटा महादेव मंदिर, रानी सती मंदिर जाकर पूजन किया। साहनपुर रियासत से जमींदारी प्रथा के रूप में करीब 1800 गांव जुड़े थे। लगान कर के रूप में साहनपुर रियासत की गद्दी पर बैठे मुखिया को नजराना भेंट किया जाता था।
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1952 में जमींदारी उन्मूलन कानून लागू होने के बाद जमींदारी व्यवस्था बदली और बड़ा बदलाव आया, लेकिन दशहरा मनाने की परंपरा नहीं बदली। पारंपरिक विजयदशमी बनाने की जिम्मेदारी वर्तमान में पूर्व सांसद भारतेंद्र सिंह ने अपने कंधों पर ली। राजा चरत सिंह से विरासत में मिले शस्त्र पूजन और दशहरा पर्व मनाने का दायित्व पूर्व राज्यमंत्री भारतेंद्र सिंह के पिता राजा देवेंद्र सिंह के कंधों पर आई थी।
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