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मुस्लिम पर्सनल लॉ के समर्थन में अभियान चला
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 24 Oct 2016 12:19 AM IST
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नजीबाबाद में इमाम काउंसिल वेलफेयर एसोसिएशन ने मुस्लिम पर्सनल लॉ की हिफाजत करने के लिए आवाज बुलंद रखने का दावा किया। एसोसिएशन ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर दो टूक कहा कि यदि शरीयत के खिलाफ कोई भी कानून मुस्लिमों पर थोपा गया. तो उसका विरोध किया जाएगा।
इमाम काउंसिल वेलफेयर एसोसिएशन ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और शरीयत में किसी भी प्रकार की दखलंदाजी को इस्लाम विरोधी करार देते हुए हस्ताक्षर अभियान चलाया। मौलाना जावेद कासमी ने कहा कि मुसलमान मुस्लिम पर्सनल लॉ की हिफाजत के लिए किसी भी कुर्बानी से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने सरकार से मुस्लिम पर्सनल लॉ में किसी तरह की दखलंदाजी से बचने की सलाह दी। मौलाना शम्सुद्दीन नोमानी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के अलावा कोई भी ऐसा कानून अगर सरकार लाती है, जिससे शरीयत पर असर होता है, उसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उलेमा ने कहा कि केंद्र सरकार मुस्लिमों पर जबरन ऐसे कानून थोपना चाहती है, जो इस्लाम विरोधी हैं। मौलाना असलम की अध्यक्षता एवं महताब नोमानी के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में मुस्लिम पर्सनल लॉ और शरीयत की हिफाजत के लिए इमाम काउंसिल के नेतृत्व में मुस्लिम पर्सनल लॉ की हिमायत में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। हस्ताक्षर अभियान में मौलाना साजिद, कारी मसरूर, कारी जुबैर, मुफ्ती मो.उस्मान, तसलीम अंसारी, मो.नफीस, नसीम अहमद, मौलाना फराहीम आदि मौजूद रहे।
तीन तलाक के मामले में दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं
बिजनौर में जमीयत उलेमा के जिला जनरल सेक्रेट्री मुफ्ती शमशुद्दीन ने कहा कि मुसलमान सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है, पर अपने शरीयत के कानून में दखलंदाजी बर्दाश्त नही कर सकता है। केंद्र सरकार चाहती है कि मुसलमान शरीयत को मानना छोड़ दे। जमीयत उलेमा के बैनरतले रविवार को हादीशाह मस्जिद में आयोजित बैठक में मुफ्ती शमशुद्दीन ने कहा कि सरकार मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का मुद्दा उठाकर आवाम का असल काम की तरफ से ध्यान हटाना चाहती है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सरकार के किसी भी दखलंदाजी को बर्दाश्त नही करेगा। तीन तलाक का मसला मुस्लिमों का अपना मसला है। इसमेें सरकार के किसी भी दखल को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कारी शौकत ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हस्ताक्षर अभियान की मुहिम शुरू की है, उसे हम घर-घर जाकर कामयाब करेंगे। पूरी मुस्लिम कौम इस कार्य में एकजुट होकर कार्य कर रही है। मौलाना नौशाद ने कहा कि इस्लाम अमन का पैगाम देता है। बैठक में कारी रजबअली, कारी इकराम, मुफ्ती अब्दुल वहाब व मास्टर अरशद जमाली मौजूद रहे।
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इमाम काउंसिल वेलफेयर एसोसिएशन ने मुस्लिम पर्सनल लॉ और शरीयत में किसी भी प्रकार की दखलंदाजी को इस्लाम विरोधी करार देते हुए हस्ताक्षर अभियान चलाया। मौलाना जावेद कासमी ने कहा कि मुसलमान मुस्लिम पर्सनल लॉ की हिफाजत के लिए किसी भी कुर्बानी से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने सरकार से मुस्लिम पर्सनल लॉ में किसी तरह की दखलंदाजी से बचने की सलाह दी। मौलाना शम्सुद्दीन नोमानी ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के अलावा कोई भी ऐसा कानून अगर सरकार लाती है, जिससे शरीयत पर असर होता है, उसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उलेमा ने कहा कि केंद्र सरकार मुस्लिमों पर जबरन ऐसे कानून थोपना चाहती है, जो इस्लाम विरोधी हैं। मौलाना असलम की अध्यक्षता एवं महताब नोमानी के संचालन में आयोजित कार्यक्रम में मुस्लिम पर्सनल लॉ और शरीयत की हिफाजत के लिए इमाम काउंसिल के नेतृत्व में मुस्लिम पर्सनल लॉ की हिमायत में हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। हस्ताक्षर अभियान में मौलाना साजिद, कारी मसरूर, कारी जुबैर, मुफ्ती मो.उस्मान, तसलीम अंसारी, मो.नफीस, नसीम अहमद, मौलाना फराहीम आदि मौजूद रहे।
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तीन तलाक के मामले में दखलंदाजी बर्दाश्त नहीं
बिजनौर में जमीयत उलेमा के जिला जनरल सेक्रेट्री मुफ्ती शमशुद्दीन ने कहा कि मुसलमान सब कुछ बर्दाश्त कर सकता है, पर अपने शरीयत के कानून में दखलंदाजी बर्दाश्त नही कर सकता है। केंद्र सरकार चाहती है कि मुसलमान शरीयत को मानना छोड़ दे। जमीयत उलेमा के बैनरतले रविवार को हादीशाह मस्जिद में आयोजित बैठक में मुफ्ती शमशुद्दीन ने कहा कि सरकार मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का मुद्दा उठाकर आवाम का असल काम की तरफ से ध्यान हटाना चाहती है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड सरकार के किसी भी दखलंदाजी को बर्दाश्त नही करेगा। तीन तलाक का मसला मुस्लिमों का अपना मसला है। इसमेें सरकार के किसी भी दखल को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कारी शौकत ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने हस्ताक्षर अभियान की मुहिम शुरू की है, उसे हम घर-घर जाकर कामयाब करेंगे। पूरी मुस्लिम कौम इस कार्य में एकजुट होकर कार्य कर रही है। मौलाना नौशाद ने कहा कि इस्लाम अमन का पैगाम देता है। बैठक में कारी रजबअली, कारी इकराम, मुफ्ती अब्दुल वहाब व मास्टर अरशद जमाली मौजूद रहे।
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