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फसल बंपर, टूटी किसानों की कमर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Mon, 06 Mar 2017 11:41 PM IST
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बिजनौर में आलू की फसल पर छाई महंगाई की मार ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसानों को इस बार फसल में नुकसान उठाना पड़ रहा है। जिले में गिने चुने कोल्ड स्टोरेज ही होने से किसान अपनी फसल वहां भी नहीं रख पा रहा है। मजबूर में सब्जी मंडी में कम दाम में फसल बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।
जिले में किसान सब्जी की खेती को भी तवज्जो देते हैं। सब्जी में आलू की खेती प्रमुखता से की जाती है। जिले में करीब सवा सात हजार हेक्टेयर जमीन में आलू बोया जाता है। अच्छी फसल होने पर एक बीघे में करीब 17 से 20 कुंतल तक पैदावार होती है। इस साल आलू की बंपर पैदावार हुई है। आलूृ की फसल में कोई रोग न लगने से उत्पादन में कमी नहीं आई। इससे फसल की पैदावार भी जबरदस्त हुई है। हालांकि इसका खामियाजा किसानों को ही उठाना पड़ रहा है। बाकी साल जहां किसानों को आलू के दाम 800 से एक हजार रुपये प्रति कुंतल तक मिलते थे, इस साल आढ़त पर आलू 400 रुपये प्रति कुंतल तक ही बिक रहा है। किसानों को आलू का भंडारण करने में भी दिक्कत उठानी पड़ रही है। जिला मुख्यालय पर एकमात्र रौनक कोल्ड स्टोरेज में आलू के भंडारण की क्षमता 45 हजार कुंतल है। यह कोल्ड स्टोरेज लगभग भर चुका है। अभी भी किसान यहां आलू रखने के लिए पहुंच रहे हैं।
तब खेत से ही बिक जाती है फसल
हरिद्वार में अर्द्धकुंभ व कुंभ के आयोजन के साल में जिले से आलू की भारी डिमांड होती है। तब खेतों से ही किसान की फसल बिक जाती है। हरिद्वार में होटल चलाने वाले व्यापारी खुद आकर किसानों से आलू खरीदते हैं। जिला उद्यान अधिकारी नरपाल मलिक के अनुसार, किसी भी फसल का मूल्य मांग और आपूर्ति के सिद्धांत पर निर्भर होता है। इस बार आलू की फसल की मांग कम और उत्पादन काफी ज्यादा है। इस वजह से किसानों को इस फसल के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं।
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जिले में किसान सब्जी की खेती को भी तवज्जो देते हैं। सब्जी में आलू की खेती प्रमुखता से की जाती है। जिले में करीब सवा सात हजार हेक्टेयर जमीन में आलू बोया जाता है। अच्छी फसल होने पर एक बीघे में करीब 17 से 20 कुंतल तक पैदावार होती है। इस साल आलू की बंपर पैदावार हुई है। आलूृ की फसल में कोई रोग न लगने से उत्पादन में कमी नहीं आई। इससे फसल की पैदावार भी जबरदस्त हुई है। हालांकि इसका खामियाजा किसानों को ही उठाना पड़ रहा है। बाकी साल जहां किसानों को आलू के दाम 800 से एक हजार रुपये प्रति कुंतल तक मिलते थे, इस साल आढ़त पर आलू 400 रुपये प्रति कुंतल तक ही बिक रहा है। किसानों को आलू का भंडारण करने में भी दिक्कत उठानी पड़ रही है। जिला मुख्यालय पर एकमात्र रौनक कोल्ड स्टोरेज में आलू के भंडारण की क्षमता 45 हजार कुंतल है। यह कोल्ड स्टोरेज लगभग भर चुका है। अभी भी किसान यहां आलू रखने के लिए पहुंच रहे हैं।
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तब खेत से ही बिक जाती है फसल
हरिद्वार में अर्द्धकुंभ व कुंभ के आयोजन के साल में जिले से आलू की भारी डिमांड होती है। तब खेतों से ही किसान की फसल बिक जाती है। हरिद्वार में होटल चलाने वाले व्यापारी खुद आकर किसानों से आलू खरीदते हैं। जिला उद्यान अधिकारी नरपाल मलिक के अनुसार, किसी भी फसल का मूल्य मांग और आपूर्ति के सिद्धांत पर निर्भर होता है। इस बार आलू की फसल की मांग कम और उत्पादन काफी ज्यादा है। इस वजह से किसानों को इस फसल के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं।
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