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मिनी सचिवालय बनवाए, पर पंचायत सचिव नहीं आए
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मिनी सचिवालय बनवाए, पर पंचायत सचिव नहीं आए
बिजनौर/नजीबाबाद/नगीना। मिनी सचिवालय बनवाकर गांव के लोगों को गांव में ही अधिकांश सुविधाएं देने की सरकार की मंशा है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता ने इस मंशा को पलीता ही लगा दिया है। अधिकांश मिनी सचिवालयों में न तो कोई व्यवस्था है और न ही संबंधित अधिकारी ही पहुंचते हैं। कई मिनी सचिवालयों में तो एक दिन भी कोई अधिकारी नहीं बैठ पाया, जबकि कई स्थानों पर अनदेखी के चलते भवनों का निर्माण ही अधूरा पड़ा है।
शासन की मंशा है कि गांवों में मिनी सचिवालय बन जाएं और उनमें वे सभी सुविधाएं ग्रामीणों को मिलें, जिनके लिए ग्रामीणों को तहसील अथवा अन्य सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पंचायती राज दिवस पर मिनी सचिवालयों की व्यवस्था पर जोर दिया था। लेकिन बिजनौर जनपद में अधिकारियों की उदासीनता से मिनी सचिवालय का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। जहां मिनी सचिवालय हैं, वहां सन्नाटा ही पसरा रहता है। पंचायत सचिव यदा कदा ही गांव आते हैं। जिन्हें ढूंढने के लिए प्रधान के घर या फिर ब्लॉक कार्यालय तक गांव वालों को दौड़ लगानी पड़ती है। मिनी सचिवालय का भवन नाममात्र के लिए है।
रामपुर दास में पूरा नहीं हुआ निर्माण
ग्राम पंचायत रामपुर दास के मिनी सचिवालय में अभी तक कोई व्यवस्था कामकाज करने के लिए नहीं है। यहां अभी मिनी सचिवालय का कार्य अधूरा पड़ा है। ग्राम प्रधान पति नरेश कुमार ने बताया कि गांव में मिनी सचिवालय बनाए जाने का कार्य अब पूरा होने की कगार पर है। उन्होंने बताया कि सचिव सप्ताह में कई बार आ जाते हैं। उधर, गांव वाले बोले कि पंचायत सचिव गांव में हर रोज नहीं आते हैं। गांव वालों को कोई काम होता है, तो कागजात प्रधान के घर रख आते हैं, जिन्हें हस्ताक्षर कराकर दे दिया जाता है। जल्दी होने पर ब्लॉक कार्यालय पर कोतवाली देहात जाना पड़ता है।
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पंचायत सचिवों का नहीं ठौर ठिकाना
नजीबाबाद। मंडावली और ग्राम पंचायत औरंगपुर बसंता सहित कई क्षेत्र के पंचायत घरों पर सचिवों के उपस्थित न होने से छोटी-छोटी समस्या के लिए नजीबाबाद तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बीडीओ विजय कुमार यादव, ब्लॉक प्रमुख तपराज सिंह ने हाल ही में पंचायत सचिवों को गांव के पंचायत घरों में बैठने के दिन निश्चित करने को कहा था। मंडावली के प्रधान मो.माजिद का कहना है कि उनके गांव में ग्राम पंचायत सचिव के बैठने का दिन निश्चित नहीं है। माह में एक-दो बार ही पंचायत सचिव ग्रामीणों को दिखाई देते हैं।
गांव में कम ही आते हैं पंचायत सचिव
ग्राम पंचायत औरंगपुर बसंता के ग्राम प्रधानपति लोकेंद्र कुमार का कहना है कि पंचायत सचिव महीने में चार-पांच बार ही गांव पहुंचते हैं। भागूवाला, मुस्सेपुर सहित अनेक ग्राम पंचायतों में भी पंचायत सचिवों की उदासीनता से ग्रामीण आहत हैं। नांगलसोती के गांव हरचंदपुर के पंचायत घर पर पंचायत सचिव के न आने से सूना पड़ा रहता है। ग्रामीणों देव कुमार, महेंद्र कुमार का कहना है कि ग्रामीणों को अपनी समस्याओं को लेकर ब्लॉक के चक्कर काटने पड़ते हैं।
- 1021 पंचायतों में सचिवालय मॉडल पर काम शुरू
डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि जिले में 1123 ग्राम पंचायत हैं। इनमें से 1021 पंचायतों में सचिवालय माडल के अंतर्गत काम शुरू हुआ। ग्रामीणों को मूलभूत जरूरतें गांव में ही मिलने लगीं। जिले में 724 पंचायत घर पहले से ही थे। सभी का जीर्णोद्धार किया गया है। करीब 300 पंचायत घर का नया निर्माण हुआ। बाकी में पंचायत घर बनने को सरकारी जमीन नहीं मिली।
मिलनी हैं ये सुविधाएं
डीपीआरओ सतीश कुमार के अनुसार ग्रामीणों को मिनी सचिवालय में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, पंचायत में होने वाले निर्माण कार्यों की जानकारी, खसरा खतौनी, जाति प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों का गठन, महिला कल्याण व बाल कल्याण की योजनाओं की जानकारी, विभिन्न पेंशन योजना की जानकारी, मनरेगा, पुष्टाहार व्यवस्था आदि सुविधाएं मलती हैं।
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बिजनौर/नजीबाबाद/नगीना। मिनी सचिवालय बनवाकर गांव के लोगों को गांव में ही अधिकांश सुविधाएं देने की सरकार की मंशा है, लेकिन अधिकारियों की उदासीनता ने इस मंशा को पलीता ही लगा दिया है। अधिकांश मिनी सचिवालयों में न तो कोई व्यवस्था है और न ही संबंधित अधिकारी ही पहुंचते हैं। कई मिनी सचिवालयों में तो एक दिन भी कोई अधिकारी नहीं बैठ पाया, जबकि कई स्थानों पर अनदेखी के चलते भवनों का निर्माण ही अधूरा पड़ा है।
शासन की मंशा है कि गांवों में मिनी सचिवालय बन जाएं और उनमें वे सभी सुविधाएं ग्रामीणों को मिलें, जिनके लिए ग्रामीणों को तहसील अथवा अन्य सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पंचायती राज दिवस पर मिनी सचिवालयों की व्यवस्था पर जोर दिया था। लेकिन बिजनौर जनपद में अधिकारियों की उदासीनता से मिनी सचिवालय का लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। जहां मिनी सचिवालय हैं, वहां सन्नाटा ही पसरा रहता है। पंचायत सचिव यदा कदा ही गांव आते हैं। जिन्हें ढूंढने के लिए प्रधान के घर या फिर ब्लॉक कार्यालय तक गांव वालों को दौड़ लगानी पड़ती है। मिनी सचिवालय का भवन नाममात्र के लिए है।
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रामपुर दास में पूरा नहीं हुआ निर्माण
ग्राम पंचायत रामपुर दास के मिनी सचिवालय में अभी तक कोई व्यवस्था कामकाज करने के लिए नहीं है। यहां अभी मिनी सचिवालय का कार्य अधूरा पड़ा है। ग्राम प्रधान पति नरेश कुमार ने बताया कि गांव में मिनी सचिवालय बनाए जाने का कार्य अब पूरा होने की कगार पर है। उन्होंने बताया कि सचिव सप्ताह में कई बार आ जाते हैं। उधर, गांव वाले बोले कि पंचायत सचिव गांव में हर रोज नहीं आते हैं। गांव वालों को कोई काम होता है, तो कागजात प्रधान के घर रख आते हैं, जिन्हें हस्ताक्षर कराकर दे दिया जाता है। जल्दी होने पर ब्लॉक कार्यालय पर कोतवाली देहात जाना पड़ता है।
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पंचायत सचिवों का नहीं ठौर ठिकाना
नजीबाबाद। मंडावली और ग्राम पंचायत औरंगपुर बसंता सहित कई क्षेत्र के पंचायत घरों पर सचिवों के उपस्थित न होने से छोटी-छोटी समस्या के लिए नजीबाबाद तहसील के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। बीडीओ विजय कुमार यादव, ब्लॉक प्रमुख तपराज सिंह ने हाल ही में पंचायत सचिवों को गांव के पंचायत घरों में बैठने के दिन निश्चित करने को कहा था। मंडावली के प्रधान मो.माजिद का कहना है कि उनके गांव में ग्राम पंचायत सचिव के बैठने का दिन निश्चित नहीं है। माह में एक-दो बार ही पंचायत सचिव ग्रामीणों को दिखाई देते हैं।
गांव में कम ही आते हैं पंचायत सचिव
ग्राम पंचायत औरंगपुर बसंता के ग्राम प्रधानपति लोकेंद्र कुमार का कहना है कि पंचायत सचिव महीने में चार-पांच बार ही गांव पहुंचते हैं। भागूवाला, मुस्सेपुर सहित अनेक ग्राम पंचायतों में भी पंचायत सचिवों की उदासीनता से ग्रामीण आहत हैं। नांगलसोती के गांव हरचंदपुर के पंचायत घर पर पंचायत सचिव के न आने से सूना पड़ा रहता है। ग्रामीणों देव कुमार, महेंद्र कुमार का कहना है कि ग्रामीणों को अपनी समस्याओं को लेकर ब्लॉक के चक्कर काटने पड़ते हैं।
- 1021 पंचायतों में सचिवालय मॉडल पर काम शुरू
डीपीआरओ सतीश कुमार ने बताया कि जिले में 1123 ग्राम पंचायत हैं। इनमें से 1021 पंचायतों में सचिवालय माडल के अंतर्गत काम शुरू हुआ। ग्रामीणों को मूलभूत जरूरतें गांव में ही मिलने लगीं। जिले में 724 पंचायत घर पहले से ही थे। सभी का जीर्णोद्धार किया गया है। करीब 300 पंचायत घर का नया निर्माण हुआ। बाकी में पंचायत घर बनने को सरकारी जमीन नहीं मिली।
मिलनी हैं ये सुविधाएं
डीपीआरओ सतीश कुमार के अनुसार ग्रामीणों को मिनी सचिवालय में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, पंचायत में होने वाले निर्माण कार्यों की जानकारी, खसरा खतौनी, जाति प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूहों का गठन, महिला कल्याण व बाल कल्याण की योजनाओं की जानकारी, विभिन्न पेंशन योजना की जानकारी, मनरेगा, पुष्टाहार व्यवस्था आदि सुविधाएं मलती हैं।