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Bijnor News: बिजनौर - नए शिक्षा सत्र में महंगी हो गईं किताबें, काॅपियां और पेंसिल
Thu, 30 Mar 2023 12:33 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Thu, 30 Mar 2023 12:33 AM IST
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खिलेंद्र राणा। ( किताबों की खबर पर परिचर्चा का फोटो)
- अभिभावकों की जेब पर पड़ रहा महंगाई का बोझ
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सभी स्कूलों में नया शिक्षा सत्र एक अप्रैल से आरंभ होगा। अधिकांश स्कूलों ने अपने कोर्स एक-एक दुकान पर ही रखवा रखे हैं। स्कूल खुलने से पहले अभिभावक छात्रों के लिए किताबें, काॅपियों व पेंसिल आदि पढ़ाई की सामग्री खरीदने में जुटे हुए हैं। किताबों व काॅपियों के दाम बढ़ गए हैं।
कमीशन के फेर में जनपद के अधिकांश स्कूलों ने अपने अपने स्कूल की किताबों के लिए एक एक ही दुकानदार को चिह्नित कर रखा है। वहां पर ही कोर्स की सभी किताबें मिलती है। अन्य किताबों की दुकान पर नहीं मिलती हैं। कई स्कूलों ने इस सत्र में किताबों के लेखक बदल दिए हैं। इस कारण पुरानी किताबें भी स्कूल में नहीं चलेंगी। अभिभावकों के अनुसार इस बार 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी गई है। महंगी किताबों व स्कूल की फीस ने अभिभावकों के बजट को गड़बड़ा रखा है।
महंगाई पर क्या बोले अभिभावक
नया शिक्षा सत्र शुरु होने से पहले किताबें, कॉपियों के दाम बढ़ गए हैं। कमीशन के चक्कर में एक ही दुकान पर लाइनों में लगकर कोर्स खरीदने को विवश है - महेश कुमार प्रधान, शक्ति नगर बिजनौर
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पढ़ाई की सामग्री महंगी हो गई है। इस महंगाई ने घर के बजट को गड़बड़ा दिया है। स्कूलों में प्रवेश के समय डोनेशन एवं मासिक फीस भी ज्यादा है। जबकि कोरोना से व्यक्तियों की आय घटी है - खिलेंद्र राणा, किरतपुर रोड बिजनौर
कमीशन खोरी का कारोबार चल रहा है। स्कूलों ने अपने चाहते दुकानदारों को ठेका दे रहा है। कमीशन खोरी के कारण किताब, कापी व पेंसिल आदि तीन गुना महंगी पड़ रही है - नृपेंद्र देशवाल एडवोकेट, अध्यक्ष अभिभावक संघ
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संवाद न्यूज एजेंसी
बिजनौर। सभी स्कूलों में नया शिक्षा सत्र एक अप्रैल से आरंभ होगा। अधिकांश स्कूलों ने अपने कोर्स एक-एक दुकान पर ही रखवा रखे हैं। स्कूल खुलने से पहले अभिभावक छात्रों के लिए किताबें, काॅपियों व पेंसिल आदि पढ़ाई की सामग्री खरीदने में जुटे हुए हैं। किताबों व काॅपियों के दाम बढ़ गए हैं।
कमीशन के फेर में जनपद के अधिकांश स्कूलों ने अपने अपने स्कूल की किताबों के लिए एक एक ही दुकानदार को चिह्नित कर रखा है। वहां पर ही कोर्स की सभी किताबें मिलती है। अन्य किताबों की दुकान पर नहीं मिलती हैं। कई स्कूलों ने इस सत्र में किताबों के लेखक बदल दिए हैं। इस कारण पुरानी किताबें भी स्कूल में नहीं चलेंगी। अभिभावकों के अनुसार इस बार 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर दी गई है। महंगी किताबों व स्कूल की फीस ने अभिभावकों के बजट को गड़बड़ा रखा है।
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महंगाई पर क्या बोले अभिभावक
नया शिक्षा सत्र शुरु होने से पहले किताबें, कॉपियों के दाम बढ़ गए हैं। कमीशन के चक्कर में एक ही दुकान पर लाइनों में लगकर कोर्स खरीदने को विवश है - महेश कुमार प्रधान, शक्ति नगर बिजनौर
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पढ़ाई की सामग्री महंगी हो गई है। इस महंगाई ने घर के बजट को गड़बड़ा दिया है। स्कूलों में प्रवेश के समय डोनेशन एवं मासिक फीस भी ज्यादा है। जबकि कोरोना से व्यक्तियों की आय घटी है - खिलेंद्र राणा, किरतपुर रोड बिजनौर
कमीशन खोरी का कारोबार चल रहा है। स्कूलों ने अपने चाहते दुकानदारों को ठेका दे रहा है। कमीशन खोरी के कारण किताब, कापी व पेंसिल आदि तीन गुना महंगी पड़ रही है - नृपेंद्र देशवाल एडवोकेट, अध्यक्ष अभिभावक संघ

खिलेंद्र राणा। ( किताबों की खबर पर परिचर्चा का फोटो)

खिलेंद्र राणा। ( किताबों की खबर पर परिचर्चा का फोटो)