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भाजपा सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप
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धामपुर। गन्ना समिति में किसानों की बैठक में प्रदेश और केंद्र की भाजपा सरकारों को किसान विरोधी होने का आरोप लगाते हुए विधानसभा के चुनावों में उखाड़ फेंकने का निर्णय लिया है।
बुधवार को बैठक में हरिराज सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार किसानों की आमदनी दोगुना करने का दावा कर धोखा दे रही है। केंद्र सरकार की ओर से तीनों कृषि कानून किसान और किसानी दोनों को बर्बाद करने वाले हैं। आरोप लगाया कि कई महीने से गन्ने का भाव घोषित करने की मांग की जा रही है लेकिन पेराई सत्र शुरू होने के डेढ़ माह बीतने के बाद भी गन्ने का भाव घोषित नहीं हुआ है। तीनों कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर किसानों का पिछले 40 दिनों से आंदोलन चल रहा है, लेकिन सरकार ने अभी तक किसान हित में कोई निर्णय नहीं लिया है। इससे साफ हो गया है कि दोनों सरकारें किसान विरोधी हैं। किसानों ने गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने और तीनों कृषि कानून निरस्त करने की मांग की है। बैठक में विकास चौधरी, नितिन, गजेंद्र सिंह, कविराज सिंह आदि रहे।
उधर गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा धामपुर के प्रधान सरदार सतवंत सिंह सलूजा ने किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया और केंद्र सरकार से तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग की।
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बुधवार को बैठक में हरिराज सिंह ने कहा कि केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार किसानों की आमदनी दोगुना करने का दावा कर धोखा दे रही है। केंद्र सरकार की ओर से तीनों कृषि कानून किसान और किसानी दोनों को बर्बाद करने वाले हैं। आरोप लगाया कि कई महीने से गन्ने का भाव घोषित करने की मांग की जा रही है लेकिन पेराई सत्र शुरू होने के डेढ़ माह बीतने के बाद भी गन्ने का भाव घोषित नहीं हुआ है। तीनों कानूनों को निरस्त करने की मांग को लेकर किसानों का पिछले 40 दिनों से आंदोलन चल रहा है, लेकिन सरकार ने अभी तक किसान हित में कोई निर्णय नहीं लिया है। इससे साफ हो गया है कि दोनों सरकारें किसान विरोधी हैं। किसानों ने गन्ने का भाव 500 रुपये प्रति क्विंटल करने और तीनों कृषि कानून निरस्त करने की मांग की है। बैठक में विकास चौधरी, नितिन, गजेंद्र सिंह, कविराज सिंह आदि रहे।
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उधर गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा धामपुर के प्रधान सरदार सतवंत सिंह सलूजा ने किसानों के आंदोलन को समर्थन दिया और केंद्र सरकार से तीनों कृषि कानूनों को निरस्त करने की मांग की।
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