यूपी: बिजनौर की काष्ठकला को मिले 100 करोड़ के ऑर्डर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं तारीफ
कारोबारियों ने साल की शुरूआत से ही नए डिजाइन के सैंपल बनाकर भिजवाने शुरू कर दिए थे। विदेशों में भी इस बार कोरोना से राहत मिली है। इस वजह से वहां से अच्छे खासे ऑर्डर मिल चुके हैं। अगस्त की शुरुआत तक ही 100 करोड़ से ऑर्डर मिल चुके हैं और अभी बंपर ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।
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उत्तर प्रदेश के बिजनौर में कोरोना महामारी के बाद काष्ठकला उद्योग के उबरने के आसार बनने लगे हैं। विदेशों से काष्ठकला उद्योग को करीब 100 करोड़ के उत्पाद का ऑर्डर मिल चुका है। अभी भी लगातार ऑर्डर मिल रहे हैं। ऑर्डर लेने के लिए नगीना के काष्ठकला उद्यमी नए डिजाइन के सैंपल बनाकर निर्यातकों को भेज रहे हैं। निर्यातक इन सैंपल को आगे भेजकर ऑर्डर ले रहे हैं।
जिले का काष्ठकला कारोबार देश में ही नहीं विदेशों में भी विख्यात है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अपने भाषण में नगीना के काष्ठकला कारोबार की तारीफ कर चुके हैं। नगीना के काष्ठकला के नमूने यूरोप तक जाते हैं। वैसे तो लगभग पूरे साल ही माल विदेशों में जाता था, लेकिन सबसे ज्यादा मांग क्रिसमस और नए साल पर होती है।
विदेशों में क्रिसमस व नए साल पर घर के लिए सजावटी सामान खरीदने व दूसरों को उपहार में देने का चलन है। इसके ऑर्डर तीन चार महीने पहले से ही मिलने शुरू हो जाते हैं। पिछले साल कोरोना ने विदेशों से मिलने वाले कारोबार पर बहुत बुरा असर डाला था।
कोरोना का असर कम होने पर कुछ ऑर्डर विदेशों से मिले भी थे, लेकिन बाद में वे भी निरस्त हो गए थे। हाल ये हो गया था कि काम न होने पर भी काष्ठकला कारोबारियों को अपने कारीगरों को मजदूरी देनी पड़ती थी। ऐसा न करते तो कारीगर किसी और काम में लग जाते और फिर कारीगरों का ही संकट हो जाता।
कारोबारियों ने साल की शुरुआत से ही नए डिजाइन के सैंपल बनाकर भिजवाने शुरू कर दिए थे। विदेशों में भी इस बार कोरोना से राहत मिली है। इस वजह से वहां से अच्छे खासे ऑर्डर मिल चुके हैं। अगस्त की शुरुआत तक ही 100 करोड़ से ऑर्डर मिल चुके हैं और अभी बंपर ऑर्डर मिलने की उम्मीद है।
निर्यातकों को मिलता है छूट का लाभ
काष्ठकला कारोबार को प्रदेश सरकार द्वारा ‘एक जिला, एक उत्पाद’ योजना में शामिल किया गया है। कारोबार को बढ़ावा देने के लिए सरकार पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन सरकार द्वारा दी जाने वाली छूट का लाभ कारोबारियों के बजाए निर्यातकों को मिलता है।
काष्ठकला उद्यमी इसका लाभ उन्हें ही दिलाने की मांग कर रहे हैं। उद्यमी इरशाद मुल्तानी के अनुसार काष्ठकला उद्योग को पिछले साल बहुत नुकसान उठाना पड़ा है। सरकार के वनों की लकड़ियों को और महंगी करने और काम न मिलने की वजह से कारोबार ठप रहा। इस बार कारोबार को विदेशों से ऑर्डर मिल रहे हैं। उम्मीद है कि अगले साल के आखिर तक कारोबार फिर से पटरी पर आ जाएगा।