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Bijnor: पत्नी के भाइयों ने की गुलशन की हत्या, हादसा दर्शाने को ट्रेन के सामने फेंका शव, लव मैरिज से थे नाराज
Mon, 04 May 2026 07:52 PM IST
Mohd Mustakim
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
Published by: Mohd Mustakim
Updated Mon, 04 May 2026 07:52 PM IST
सार
गुलशन हत्याकांड का खुलासा: बिजनौर जिले के गांव जुझेला में गुलशन ने अपनी प्रेमिका दीपा से जनवरी में शादी कर ली थी। मगर दीपा अपने पिता के घर में ही रह रही थी। दो भाइयों ने गांव के दो युवकों के साथ मिलकर गुलशन की हत्या कर दी। पुलिस ने तीन आरोपी गिरफ्तार किए हैं।
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गुलशन की फाइल फोटो और गिरफ्तार तीन हत्यारोपी।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
स्योहारा थाना क्षेत्र के गांव जुझेला निवासी गुलशन कुमार (24) की हत्या उसकी पत्नी के भाइयों अपने दो साथियों के साथ मिलकर की थी। हादसा दर्शाने के लिए शव को ट्रेन के आगे फेंक दिया था। शुरुआत में पुलिस ने भी इसे हादसा या आत्महत्या मान लिया था, लंबी जद्दोजहद के बाद प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस ने सोमवार को मृतक की प्रेमिका के भाई व उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा कर दिया, जबकि दूसरा भाई पकड़ में नहीं आया है।
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पुलिस के अनुसार, गुलशन का प्रेम प्रसंग गांव रहटोली की दीपा से पिछले तीन-चार वर्षों से था। जनवरी 2026 में दोनों ने कोर्ट मैरिज कर ली थी। इस विवाह से दीपा के परिजन नाराज थे और इसे अपनी बेइज्जती मान रहे थे। गुलशन देहरादून में रहता था जबकि दीपा अपने घर पर ही रहती है।
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शुक्रवार तड़के गुलशन, दीपा से मिलने उसके गांव आया था। आरोप है कि पहले से घात लगाए बैठे दीपा के भाइयों पंकज कुमार, अतर सिंह ने गांव के ही पुष्पेंद्र कुमार और रजनीश के साथ मिलकर गुलशन को पकड़ लिया। उसे बाइक पर बैठाकर गांव से बाहर ले गए और ट्रेन के सामने फेंक दिया गया ताकि घटना हादसा लगे। पूछताछ में आरोपी अतर सिंह ने पुलिस के सामने अपराध स्वीकार कर लिया।
इसके बाद पुलिस ने अतर सिंह, पुष्पेंद्र और रजनीश को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया। सीओ धामपुर अभय कुमार पांडेय ने बताया कि आरोपियों ने हत्या को ट्रेन दुर्घटना साबित करने के लिए शव को ट्रेन के सामने फेंक दिया था। सभी तथ्यों पर गहनता से कार्य कर घटना का खुलासा किया गया। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
हंगामे के बाद दर्ज की गई थी रिपोर्ट
पुलिस शुरुआत से ही इस घटना को ट्रेन दुर्घटना मान रही थी जबकि मृतक के पिता नृपेंद्र कुमार ने हत्या का आरोप लगाते हुए शव का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया था। करीब 25 घंटे तक चले हंगामे और दबाव के बाद पुलिस ने पंकज, अतर सिंह, अर्जुन और राहुल समेत अन्य के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके बाद ही शव का अंतिम संस्कार हो सका था।
पुलिस शुरुआत से ही इस घटना को ट्रेन दुर्घटना मान रही थी जबकि मृतक के पिता नृपेंद्र कुमार ने हत्या का आरोप लगाते हुए शव का अंतिम संस्कार करने से इंकार कर दिया था। करीब 25 घंटे तक चले हंगामे और दबाव के बाद पुलिस ने पंकज, अतर सिंह, अर्जुन और राहुल समेत अन्य के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके बाद ही शव का अंतिम संस्कार हो सका था।
भीम आर्मी पदाधिकारियों पर भी रिपोर्ट
इस पूरे मामले में पुलिस ने एक और रिपोर्ट दर्ज की है। हल्का इंचार्ज प्रमोद शर्मा की तहरीर पर भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष प्रशांत महासागर, लीगल एडवाइजर नईम अहमद, डॉ. अनिल कुमार, सुरेश कुमार और जिला सचिव लवली सहित 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आरोप है कि इन लोगों ने परिजनों के साथ मिलकर अंतिम संस्कार में देरी कराई और शव का निरादर किया। सड़क जाम की और सरकारी कार्य में बाधा डाली।
इस पूरे मामले में पुलिस ने एक और रिपोर्ट दर्ज की है। हल्का इंचार्ज प्रमोद शर्मा की तहरीर पर भीम आर्मी के जिलाध्यक्ष प्रशांत महासागर, लीगल एडवाइजर नईम अहमद, डॉ. अनिल कुमार, सुरेश कुमार और जिला सचिव लवली सहित 10-15 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आरोप है कि इन लोगों ने परिजनों के साथ मिलकर अंतिम संस्कार में देरी कराई और शव का निरादर किया। सड़क जाम की और सरकारी कार्य में बाधा डाली।
शुरुआती जांच पर उठे सवाल
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने इसे ट्रेन हादसा मान लिया था। परिजनों के आरोपों को महत्व नहीं दिया गया। जब परिजनों ने हंगामा किया और अंतिम संस्कार से इन्कार कर दिया, तब जाकर पुलिस ने हत्या की प्राथमिकी दर्ज की।
इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने इसे ट्रेन हादसा मान लिया था। परिजनों के आरोपों को महत्व नहीं दिया गया। जब परिजनों ने हंगामा किया और अंतिम संस्कार से इन्कार कर दिया, तब जाकर पुलिस ने हत्या की प्राथमिकी दर्ज की।
लगभग सफल हो गई थी साजिश
आरोपियों की योजना इतनी सुनियोजित थी कि पहली नजर में यह ट्रेन हादसा प्रतीत हो रहा था। गुलशन को रेलवे ट्रैक पर इस तरह फेंका गया कि कोई भी इसे आत्महत्या या दुर्घटना मान ले। यदि परिजन विरोध न करते तो घटना को हादसा ही करार दे दिया जाता और हत्याकांड का खुलासा नहीं हो पाता।
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आरोपियों की योजना इतनी सुनियोजित थी कि पहली नजर में यह ट्रेन हादसा प्रतीत हो रहा था। गुलशन को रेलवे ट्रैक पर इस तरह फेंका गया कि कोई भी इसे आत्महत्या या दुर्घटना मान ले। यदि परिजन विरोध न करते तो घटना को हादसा ही करार दे दिया जाता और हत्याकांड का खुलासा नहीं हो पाता।
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