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पशुपालन में बढ़ा जिले के किसानों का रूझान संशोधित फाइल
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बिजनौर। 20वीं पशु गणना के आंकड़े शासन ने जारी कर दिए हैं। इसके अनुसार जिले में किसानों का रुझान पशुपालन में पहले से बढ़ा है। किसान पशुपालन करके आमदनी बढ़ा रहे हैं। 19वीं पशु गणना के मुकाबले गायों की संख्या में जिले में बढ़ोतरी हुई है।
बिजनौर कृषि प्रधान जिला है। जिले में करीब पांच लाख हेक्टेअर जमीन में खेती होती है। खेती ही जिले के किसानों की लाइफ लाइन है। जिले के किसान पशुपालन भी अनिवार्य रूप से करते हैं। किसानों के लिए पशुपालन इतना महत्वपूर्ण होता है कि इंसानों की गणना की तरह देश में पशुगणना भी होती है। पशु गणना हर पांच साल में होती है और इसके आंकड़े शासन द्वारा जारी होते हैं।
19वीं पशुगणना में जिले में तीन लाख तीन हजार 396 गोवंश व छह लाख 63 हजार 348 हजार महिषवंश(भैंस) पशु थे। कुल नौ लाख 66 हजार 744 पशु मिले हैं। 20 वीं पशुगणना के अनुसार जिले में पशुपालन का आंकड़ा बढ़ा है। 20वीं पशु गणना के अनुसार तीन लाख 78 हजार 290 गोवंश व छह लाख 22 हजार 405 महिषवंशीय पशु मिले हैं। कुल दस लाख 695 पशु जिले में मिले हैं। पशुओं की संख्या 33 हजार 951 बढ़ी है। 19वीं पशु गणना के मुकाबले अब जिले में गोवंश की संख्या 74 हजार 894 बढ़ गई है। वहीं महिषवंश की संख्या 40 हजार 943 घट गई है। पशु गणना के आंकड़ों से साफ है कि किसानों का रुझान पशुपालन में बढ़ रहा है।
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बिना पशुपालन कैसी खेती
पशुपालन खेती का आधार है। पशुपालन के बिना खेती नहीं हो सकती है। खेत को गोबर के खाद से लेकर दूध बेचने तक किसान को पशुओं से बहुत आमदनी होती है। जिले के सैकड़ों किसान पशुपालन के दम पर ही जैविक खेती को अपना रहे हैं। कई किसान उद्योग के रूप में डेरी संचालन कर रहे हैं।
उन्नत नस्ल के पशु पालकर बढ़ाएं आमदनी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के अनुसार किसानों को पशुपालन की ओर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। किसान उन्नत नस्ल के पशु पालें और अपनी आमदनी बढ़ाएं।
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बिजनौर कृषि प्रधान जिला है। जिले में करीब पांच लाख हेक्टेअर जमीन में खेती होती है। खेती ही जिले के किसानों की लाइफ लाइन है। जिले के किसान पशुपालन भी अनिवार्य रूप से करते हैं। किसानों के लिए पशुपालन इतना महत्वपूर्ण होता है कि इंसानों की गणना की तरह देश में पशुगणना भी होती है। पशु गणना हर पांच साल में होती है और इसके आंकड़े शासन द्वारा जारी होते हैं।
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19वीं पशुगणना में जिले में तीन लाख तीन हजार 396 गोवंश व छह लाख 63 हजार 348 हजार महिषवंश(भैंस) पशु थे। कुल नौ लाख 66 हजार 744 पशु मिले हैं। 20 वीं पशुगणना के अनुसार जिले में पशुपालन का आंकड़ा बढ़ा है। 20वीं पशु गणना के अनुसार तीन लाख 78 हजार 290 गोवंश व छह लाख 22 हजार 405 महिषवंशीय पशु मिले हैं। कुल दस लाख 695 पशु जिले में मिले हैं। पशुओं की संख्या 33 हजार 951 बढ़ी है। 19वीं पशु गणना के मुकाबले अब जिले में गोवंश की संख्या 74 हजार 894 बढ़ गई है। वहीं महिषवंश की संख्या 40 हजार 943 घट गई है। पशु गणना के आंकड़ों से साफ है कि किसानों का रुझान पशुपालन में बढ़ रहा है।
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बिना पशुपालन कैसी खेती
पशुपालन खेती का आधार है। पशुपालन के बिना खेती नहीं हो सकती है। खेत को गोबर के खाद से लेकर दूध बेचने तक किसान को पशुओं से बहुत आमदनी होती है। जिले के सैकड़ों किसान पशुपालन के दम पर ही जैविक खेती को अपना रहे हैं। कई किसान उद्योग के रूप में डेरी संचालन कर रहे हैं।
उन्नत नस्ल के पशु पालकर बढ़ाएं आमदनी
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी के अनुसार किसानों को पशुपालन की ओर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। किसान उन्नत नस्ल के पशु पालें और अपनी आमदनी बढ़ाएं।