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Amangarh Jungle : अमानगढ़ में एम-स्ट्राइप्स एप से होगी वन्यजीवों और वनकर्मियों की निगरानी, WWF ने बांटे मोबाइल

Fri, 18 Nov 2022 04:28 AM IST
दुष्यंत शर्मा रजनीश त्यागी, बिजनौर
रजनीश त्यागी, बिजनौर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 18 Nov 2022 04:28 AM IST
सार

Bijnor :अब कोई वनकर्मी गेस्ट हाउस में बैठकर गश्त की फर्जी सूचना नहीं दे पाएगा। जंगल में बाघ समेत सभी वन्य जीवों के मूवमेंट के साथ-साथ वनकर्मियों की मुस्तैदी पर भी जिला मुख्यालय से ही निगरानी की जा सकेगी। बृहस्पतिवार को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने सभी वनकर्मियों को मोबाइल फोन बांटे। इसमें एम-स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग एप डाला गया है।

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Bijnor : M-stripes app will monitor wildlife and forest workers in Amangarh
अमानगढ़। - फोटो : amar ujala

विस्तार

अमानगढ़ में पर्यटन शुरू होने के साथ ही वन्य जीवों की सुरक्षा के भी कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं। अब कोई वनकर्मी गेस्ट हाउस में बैठकर गश्त की फर्जी सूचना नहीं दे पाएगा। जंगल में बाघ समेत सभी वन्य जीवों के मूवमेंट के साथ-साथ वनकर्मियों की मुस्तैदी पर भी जिला मुख्यालय से ही निगरानी की जा सकेगी। बृहस्पतिवार को डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम ने सभी वनकर्मियों को मोबाइल फोन बांटे। इसमें एम-स्ट्राइप्स पेट्रोलिंग एप डाला गया है।

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अमानगढ़ में दो दिन पहले पर्यटन शुरू हुआ तो वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ को वन्य जीवों की सुरक्षा की चिंता भी सताने लगी। इसे देखते हुए जंगल की निगरानी कड़ी करने का निर्णय भी लिया गया। इसके लिए डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम अमानगढ़ पहुंची। टीम में पीलीभीत से आए नरेश कुमार, हल्द्वानी से आए मिराज शामिल रहे। डीएफओ डॉ. अनिल पटेल की मौजूदगी में अमानगढ़ में सभी वनकर्मियों को मोबाइल फोन बांटे गए। इन मोबाइल में एम-स्ट्राइप्स एप भी डाला गया। डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि इस एप के जरिए कर्मचारियों की गतिविधियों पर तो नजर रहेगी ही, साथ ही वन्य जीवों के मूवमेंट के बारे में भी मुख्यालय पर ही पता चल सकेगा।
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क्या है एम-स्ट्राइप्स एप
एम-स्ट्राइप्स का पूरा नाम मॉनिटरिंग सिस्टम फॉर टाइगर, इंटेंसिव प्रोटेक्शन एंड इकोलॉजी स्टेटस है। यह एप राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के द्वारा तैयार किया गया था। इसे डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के माध्यम से टाइगर रिजर्व में कर्मचारियों के मोबाइल फोन में चलाया जा रहा है। इस एप के जरिए वन अधिकारी संबंधित कर्मचारी की रियल टाइम लोकेशन का पता लगा सकेगा। साथ ही उसके द्वारा की गई गश्त की जानकारी भी होगी। एप में कर्मचारियों को जंगल में दिखने वाले वन्य जीवों के मूवमेंट की जानकारी भी भरनी होगी, जिसका पता मुख्यालय पर चल जाएगा। हर महीने इसके डाटा की समीक्षा भी की जाएगी।
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अमानगढ़ में लगाए जा रहे कैमरा ट्रैप
डीएफओ डॉ. अनिल पटेल ने बताया कि अमानगढ़ में प्रत्येक वर्ष कैमरा ट्रैप लगाए जाते हैं, ताकि बाघों की निगरानी, उनके मूवमेंट का पता चल सके। अमानगढ़ में कैमरा ट्रैप लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। शीघ्र ही इसके जरिए जंगल में बाघों की मौजूदगी का सही पता चल सकेगा।


पर्यटन के लिए एडवांस बुकिंग शुरू
एसडीओ वन विभाग ने बताया कि पर्यटन के लिए एडवांस बुकिंग सुविधा शुरू कर दी गई है। इसके लिए पर्यटक जिला मुख्यालय पर वन विभाग के डिविजन कार्यालय पर भी संपर्क कर सकता है। इसके अलावा अमानगढ़ रेंज कार्यालय जाकर भी एडवांस बुकिंग करा सकता है। इसके लिए कुछ जिप्सी निर्धारित की गई हंै। एसडीओ ने बताया कि रेंजर अमानगढ़ के मोबाइल नंबर 9808548211 पर बुकिंग संबंधी जानकारी भी दी जाएगी।

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