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वन्य संपदा के शृंगार से सजा है बिजनौर जनपद

Sat, 21 Mar 2020 12:33 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 21 Mar 2020 12:33 AM IST
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Bijnor district is adorned with the adornment of forest wealth
अमानगढ़ रेंज में पेड़ों से घिरा सड़क। - फोटो : BIJNOR
वन्य संपदा के शृंगार से सजा है बिजनौर जनपद
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बिजनौर। जिले में वन क्षेत्र की वजह से यहां की आबोहवा आसपास के सभी जिलों से बेहतर है। करीब दस प्रतिशत हिस्से में तो वन क्षेत्र ही हैं। वन क्षेत्र और यहां पलने वाले वन्यजीव जिलेवासियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं। लोग चाहें तो अपने आसपास इलाकों में भी अधिक से अधिक पौधरोपण कर जिले को और बेहतर बना सकते हैं।
गंगा किनारे महात्मा विदुर की कुटी से सुशोभित बिजनौर को कुदरत ने खूब वन संपदा दी है। जिले का रकबा 4634 स्क्वायर किलोमीटर है। इसमें से करीब 403 स्क्वायर किलोमीटर एरिया में वन संपदा है। करीब 51 लाख बीघा से भी अधिक जमीन खेती की जाती हैं। जिले के करीब से बह रहीं आधा दर्जन नदियां और वन क्षेत्र यहां के तापमान को कम करते हैं और हवा को भी साफ करते हैं। वन संपदा के लिहाज से देखा जाए तो बिजनौर जिला किसी पहाड़ी या अतिवर्षा वाले क्षेत्र की तरह हरियाली से भरा है।
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- हर साल हो रहा पौधरोपण
जिले में हर साल हरियाली को बढ़ावा देने के लिए कोशिश की जा रही हैं। पिछले साल 43 लाख पौधे लगाए गए थे। इस बार 51 लाख से अधिक पौधरोपण का लक्ष्य रखा गया है। पौधरोपण में सरकारी विभाग, सामाजिक संस्थाएं व युवा बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं।
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- अमानगढ़ रेंज में गिद्ध भी हैं
जिले में मुख्य रूप से सबसे बड़ी वन रेंज अमानगढ़ है। इसका रकबा करीब 9500 हेक्टेयर है। यहां वन्य जीवों की भरमार है। चीते से लेकर भालू, लोमड़ी, हाथी, अजगर, हिरन, चीतल व कई तरह के पक्षियों की भरमार है। गिद्ध भी अमानगढ़ रेंज में हैं। जिले के वनों में बहुत पुराने पेड़ खड़े हैं। पेड़ों से गिरे बीजों से ही नए पेड़ तैयार हो जाते हैं। वन्य जीवों के लिए वनों में गर्मी में प्यास बुझाने के लिए जगह जगह वॉटर होल बनाए जाते हैं।

- घरों में भी लगाएं पौधे - सेम्मारन
डीएफओ डा. एम सेम्मारन के मुताबिक हरियाली बढ़ाना ही प्रदूषण को खत्म करने का एकमात्र तरीका है। अधिक से अधिक पौधरोपण करना चाहिए। घरों में भी गमलों में पौधे लगाएं। हरियाली बढ़ाने में जिलेवासी ज्यादा से ज्यादा सहयोग करें।
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