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दूसरे राज्यों में फंसे मजदूर लगा रहे मदद की गुहार
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कर्नाटक में फंसे बिजनौर के बंगाली समाज के मजदूर।
- फोटो : BIJNOR
कर्नाटक, महाराष्ट्र में फंसे हैं बिजनौर के बंगाली मजदूर
बिजनौर/बेगावाला। रोजगार की तलाश में कर्नाटक व महाराष्ट्र गए बंगाली कॉलोनियों के मजदूर लॉकडाउन में वहीं फंसकर रह गए हैं। सारी कमाई भी खर्च हो गई है। अब ये मजदूर घर वापसी के लिए की आस लगाए लगाए बैठे हैं।
कोतवाली शहर की बंगाली कॉलोनी धर्मनगरी व हेमराज कॉलोनी के करीब 16 मजदूर जनवरी में काम करने के लिए कर्नाटक के कोप्पल जिले में गए थे। वे वहां हाईवे किनारे बनने वाले नाले में सैटरिंग लगाने का काम करते हैं। कर्नाटक में काम कर रहे मजदूरों ने घासीवाला निवासी ध्रुव मंडल से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि उन्हें कर्नाटक में रोज की मजदूरी 500 रुपये मिलती है। बिजनौर में मजदूरी 300 से 350 रुपये ही मिलती है। ज्यादा मजदूरी की आस में वे कर्नाटक आए थे। लॉकडाउन लगने से मजदूरी खत्म हो गई और जो पैसे मिले थे वे भी खत्म हो गए। यूपी, उड़ीसा व आसपास के राज्य के कई लोग वहां फंसे हैं। सभी लोग अपने घर आना चाहते हैं। कर्नाटक के प्रशासन को अपनी पूरी जानकारी दे दी है। वहां से दूूसरे राज्यों को जाने के लिए ट्रेन चलाई गई है। वे भी जल्दी यहां से निकलने की आस लगा रहे हैं। महाराष्ट्र में भी चार व आंध्र प्रदेश में एक मजदूर फंसा है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से भी मदद की गुहार लगाई है।
ये हैं फंसे मजदूर
कर्नाटक में शिवानंद राय, गोविंद, देवा, विपुल राय, सुधीर राय, नैनी मंडल, अरुण राय, बलाई राम, विशाल, मिथुन देव, ध्रुव मंडल, आदित्य, शिवम चक्रवर्ती, सूरज, प्रणव विश्वास, संजय विश्वास, महाराष्ट्र में प्रकाश हल्दर, नृपेंद्र, सुबल विश्वास, गंगा विश्वास और आंध्र प्रदेश में नारायण हल्दर फंसे हैं।
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बिजनौर/बेगावाला। रोजगार की तलाश में कर्नाटक व महाराष्ट्र गए बंगाली कॉलोनियों के मजदूर लॉकडाउन में वहीं फंसकर रह गए हैं। सारी कमाई भी खर्च हो गई है। अब ये मजदूर घर वापसी के लिए की आस लगाए लगाए बैठे हैं।
कोतवाली शहर की बंगाली कॉलोनी धर्मनगरी व हेमराज कॉलोनी के करीब 16 मजदूर जनवरी में काम करने के लिए कर्नाटक के कोप्पल जिले में गए थे। वे वहां हाईवे किनारे बनने वाले नाले में सैटरिंग लगाने का काम करते हैं। कर्नाटक में काम कर रहे मजदूरों ने घासीवाला निवासी ध्रुव मंडल से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि उन्हें कर्नाटक में रोज की मजदूरी 500 रुपये मिलती है। बिजनौर में मजदूरी 300 से 350 रुपये ही मिलती है। ज्यादा मजदूरी की आस में वे कर्नाटक आए थे। लॉकडाउन लगने से मजदूरी खत्म हो गई और जो पैसे मिले थे वे भी खत्म हो गए। यूपी, उड़ीसा व आसपास के राज्य के कई लोग वहां फंसे हैं। सभी लोग अपने घर आना चाहते हैं। कर्नाटक के प्रशासन को अपनी पूरी जानकारी दे दी है। वहां से दूूसरे राज्यों को जाने के लिए ट्रेन चलाई गई है। वे भी जल्दी यहां से निकलने की आस लगा रहे हैं। महाराष्ट्र में भी चार व आंध्र प्रदेश में एक मजदूर फंसा है। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से भी मदद की गुहार लगाई है।
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ये हैं फंसे मजदूर
कर्नाटक में शिवानंद राय, गोविंद, देवा, विपुल राय, सुधीर राय, नैनी मंडल, अरुण राय, बलाई राम, विशाल, मिथुन देव, ध्रुव मंडल, आदित्य, शिवम चक्रवर्ती, सूरज, प्रणव विश्वास, संजय विश्वास, महाराष्ट्र में प्रकाश हल्दर, नृपेंद्र, सुबल विश्वास, गंगा विश्वास और आंध्र प्रदेश में नारायण हल्दर फंसे हैं।
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