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विश्व सीओपीडी दिवस

Tue, 17 Nov 2020 11:21 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 17 Nov 2020 11:21 PM IST
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Be careful about lung health
डा.तजीन आरिफ। - फोटो : BIJNOR
फेफड़ों के स्वास्थ्य के प्रति भी बरतें सावधानी
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बिजनौर। क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोरी डिजीज (सीओपीडी) फेफड़ों की एक ऐसी बीमारी है, जिसकी रोकथाम और प्रबंधन किया जा सकता है। ये खतरनाक बीमारी हो सकती है और बढ़ भी सकती है। इस परिस्थिति में फेफड़ों में श्वसन नलिकाओं में प्रवाह होने लगता है और वे संकरी हो जाती हैं। इसलिए फेफड़ों के स्वास्थ्य के प्रति सावधानी बरतना बेहद ही जरूरी है।
आज विश्व सीओपीडी दिवस है। इसे मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को इसके प्रति जागरुक करना है। पुरानी श्वसन संबंधी बीमारी किसी भी समय उभर सकती है। वरिष्ठ परामर्श फिजीशियन एवं छाती रोग विशेषज्ञ अनिल अग्रवाल ने कहा कि 2019 में सीओपीडी भारत में मौतों का दूसरा सबसे बड़ा कारण था। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक वृद्धि हुई है। ये संख्या 80 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में और 75-80 वर्ष आयु की महिलाओं में सबसे अधिक बढ़ी है। इसका सबसे मुख्य कारण तंबाकू और धुआं है। खराब वातावरण वाले घरों में रसोई और गर्माहट के लिए उपयोग में लाए जा रहे ईंधनों से घर के अंदर होने वाले वायु प्रदूषण से भी यह समस्या बढ़ती है।
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सूफिया मेमोरियल हॉस्पिटल की चेस्ट फिजीशियन तजीन आरिफ ने बताया कि सीओपीडी हृदय संबंधी समस्याओं को और अधिक बढ़ा सकती है। अलग-अलग लोगों में सांस के कारण भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। इसलिए आवश्यक बात ये ही है कि सीओपीडी से संबंधित मरीज अपनी स्थिति को समझें। अपना इलाज सही रूप से करें, वरना यह सीओपीडी में बदल जाता है। उन्होंने बताया कि भारत में 17 से 29 करोड़ मरीज सीओपीडी के मरीज हैं। दुनिया भर में सीओपीडी के मरीजों को ठंड के मौसम में अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता होती है। वातावरण में मौजूद वायरस एवं हवा से फैलने वाले इंफैक्शन सीओपीडी के मरीजों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने बताया कि अभी तक सीओपीडी का कोई इलाज अभी नहीं है। फिर भी अपनी जीवन शैली में बदलाव कर इससे बचा सकता है। इसके लिए स्वयं को बेहतर महसूस करने और अधिक सक्रिय रहने की आवश्यकता है।
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सीओपीडी के लक्षण
-सांस फूलना, बार-बार खांसी आना।
-बलगम के साथ खांसी आना।
-बार-बार नाक बहना और गले का संक्रमण होना।
-होंठ या नाखून नीले पड़ने के साथ थकान होना।

 डा.अनिल अग्रवाल।

डा.अनिल अग्रवाल।- फोटो : BIJNOR

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