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कृषि के हक में नहीं बैरियर फ्री फार्म ट्रेडिंग

Thu, 23 Jul 2020 12:09 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jul 2020 12:09 AM IST
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Barrier free farm trading not in favor of agriculture
कृषि के हक में नहीं बैरियर फ्री फार्म ट्रेडिंग
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बिजनौर। किसानों की आमदनी बढ़ाने के नाम पर सरकार की ओर से निजी कंपनी से उनके करार का रास्ता खोला जा रहा है। लेकिन किसान नेता सरकार के इस फैसले से खुश नहीं हैं। वे इसे देश में कांट्रेक्ट फार्मिंग की शुरूआत मान रहे हैं। वे इसे किसानों के लिए नहीं बल्कि व्यापारियों के हित में लिया गया फैसला बता रहे हैं।
सरकार ने किसानों के लिए बैरियर फ्री फार्म ट्रेडिंग कानून बनाया है। इसके अंतर्गत किसान अपने उत्पादों की बिक्री सरकारी सूचीबद्ध मंडियों के बजाए राज्य के भीतर या बाहर निजी खरीदारों या कंपनियों को कर सकते हैं। किसानों को फसल तैयार होने से पहले भी उसका सौदा करने की छूट दी जाएगी। कानून के अंतर्गत यह सौदा किसान कहीं भी कर सकता है। लेकिन इस कानून में ऐसा कुछ भी नहीं है जो पहले से लागू न हो। निजी कंपनी पहले से ही किसानों से माल खरीदती रही हैं। जिले का चावल विदेशों तक तो जिले की पॉपुलर आदि की लकड़ी यमुनानगर में जाती है।
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कांट्रेक्ट फार्मिंग की शुरूआत कर रही सरकार
भाकियू के युवा प्रदेश अध्यक्ष दिगंबर सिंह का कहना है कि सरकार कांट्रेक्ट फार्मिंग की शुरूआत कर रही है। नए कानून में सरकार ने फसलों का न्यूनतम मूल्य देने की कोई बात नहीं कही है। इस तरह के कानून के अंतर्गत ही किसान मिलों को गन्ना देते हैं और मिल अपनी मर्जी से गन्ना भुगतान करते हैं। मिलों पर भी 14 दिन में भुगतान न देने पर ब्याज देने का प्रावधान है, लेकिन आज तक इसका पालन नहीं हुआ है। सरकार अगर किसानों का हित चाहती है तो वह किसानों को फसल लागत का डेढ़ गुना मूल्य व फसलों के बिकने की गारंटी की बात करे।
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यह किसानों को लुभाने की कोशिश है
भाकियू अंबावता के जिलाध्यक्ष विजयपाल सिंह का कहना है कि सरकार किसान को राहत पहुंचाने के बजाए केवल लुभाने की कोशिश कर रही है। जब चीनी मिल ही भुगतान नहीं कर रहीं तो बाकी कंपनियों की क्या गारंटी है। फसलों की लागत का डेढ़ गुना मूल्य व फसल बिकने की गारंटी किसान की सबसे बड़ी मांग है। इसके लिए ही सरकार कुछ करे। तभी किसान और खेती की हालत में सुधार हो सकता है, वरना तो किसान को घाटा ही घाटा है।

किसान को नहीं, व्यापारियों को होगा फायदा
भाकियू लोकशक्ति के जिलाध्यक्ष वीर सिंह सहरावत का कहना है कि किसान को गन्ने के बाद अब दूसरी फसलों में भी कंपनियों का गुलाम बनाने की तैयारी की जा रही है। किसान को उसकी फसल का उचित दाम आज भी नहीं दिलाया जा रहा है। केवल व्यापारियों के हित के लिए काम किया जा रहा है। वहीं, किराना एवं अनाज व्यापार संघ के पूर्व अध्यक्ष सुशील जिंदल का कहना है कि सरकार के नए कानून से किसान को कोई लाभ होता नहीं दिख रहा है। हालांकि व्यापारियों को इससे फायदा होगा और उन्हें मंडी शुल्क बचेगा।
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