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बैंकों में कम नहीं हो रही कैश के लिए कतार

Thu, 29 Dec 2016 11:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर Updated Thu, 29 Dec 2016 11:54 PM IST
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Banks are not in the queue for cash
धामपुर यूनियन बैंक के एटीएम के बाहर लगी लोगों की लाइन। - फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में नोटबंदी के 50 दिन बाद भी व्यवस्था पटरी पर नहीं आई। अभी भी लोग दो-दो हजार रुपये के नोट  पाने के लिए एटीएम के बाहर लाइन में लगे रहने को मजबूर है। बृहस्पतिवार को कई बैंकों में कैश नहीं होने से लोगों को केवल मायूसी हाथ लगी। अधिकतर ग्राहकों ने कहा कि कैश नहीं मिलने के कारण घर और परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। 
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येस बैंक के बाहर एटीएम की लाइन में लगे गांव जैतरा निवासी अमन कुमार ने बताया कि 50 दिन में करीब उन्हें बमुश्किल अभी तक छह हजार रुपये ही मिल सके। दो दो हजार रुपये लेने के चक्कर में उन्हें दिनभर लाइन में लगने को विवश होना पड़ रहा है। लाइन में लगे रहने के बाद भी यह कोई गारंटी नहीं है कि उसे एटीएम से दो हजार का नोट मिल ही जाए। गांव शादीपुर निवासी महिला रेखा रानी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी का नोटबंदी का प्लान अच्छा है। दिक्कत आ रही है। इन दिक्कतों के दूर होने में अभी और समय लगेगा। 50 दिन में सुधार होने वाला नहीं दिखता।  शेरकोट के मोहल्ला निकम्माशाह निवासी मोहम्मद अरशद आदि ने कहा कि केंद्र सरकार ने नोटबंदी कर देशवासियों को तबाह कर दिया है। 
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लोग एक-एक पैैसे को अपने खाते से निकालने को बैंकों के बाहर लाइन में लगने को मजबूर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कैश को लेकर बैंकों में कोई सुधार नहीं है। लोगों के विवाह शादी के तय कार्यक्रम कैश नहीं मिलने से हट रहे है। बीमार लोगों का अच्छे अस्पतालों में उपचार कराना टेढ़ी खीर हो रहा है। 
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धामपुर के जनरल मर्चेंट व्यापारी मुकेश कुमार ग्रोवर ने कहा कि नोटबंदी के चलते व्यापारियों का कारोबार ठप हो गया है। उन्हें इन दिनों के भीतर भारी घाटा हुआ है। माल की बिक्री गाहकों के नहीं आने से थम गई है। सर्दी के लिए मंगाया गरम माल बिक्री नहीं होने से गोदामों में ऐसा ही भरा पड़ा है। गांव परमावाला निवासी एवं हरियाणा की एक कंपनी में इंजीनियर के पद पर कार्यरत जयदेव सिंह ने कहा कि नोटबंदी से अभी भी लोगों को दिक्कतें आ रही है। उन्होंने कहा ‌िक अब तो सरकार की आेर से मांगी गई मियाद भी पूरी हो गई है। अब इतनी परेशानी नहीं होनी चाहिए। लेकिन उन्हें लाइन में लगने के बाद भी कैश नहीं मिल रहा है। शोर मचाने के बाद भी न तो उनकी सरकार सुन रही है और न ही बैंक अधिकारी ध्यान दे रहे हैं। 

बृहस्पतिवार को एचडीएफसी, ऐक्सिस बैक में कैश आउट का बोर्ड टांग देने पर लोगों को केवल मायूसी मिली। यहां भी कैश के ‌िलए ग्राहक भटकते रहे।
उधर, बिजनौर शहर में बैंकों में बृहस्पतिवार को ज्यादा भीड़ नहीं रही। ग्रामीण इलाकों में स्थितियां अभी सुधर नहीं पाई है।  बैंकों में बृहस्पतिवार को हालात सामान्य दिखाई दिए। एसबीआई, पीएनबी, बैंक ऑफ बड़ौदा, सर्व यूपी ग्रामीण बैंक, इलाहाबाद बैंक आदि में नोटबंदी के पहले के हालात दिखे। इलाहाबाद बैंक के आगे लगने वाली ग्राहकों की लाइन कम रही। गजरौला शिव में ग्राहकों को छह-छह हजार रुपये तक का भुगतान किया गया। कैश नहीं होने पर चंदक की पीएनबी शाखा बुधवार को नहीं खुली थी। इससे लोग परेशान रहे।
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