{"_id":"62d6f6d9b2c0920de736b038","slug":"bamboo-forests-will-be-set-up-on-the-banks-of-the-ganges-from-balavali-to-ravali-bijnor-news-mrt597682925","type":"story","status":"publish","title_hn":"बालावाली से रावली तक गंगा किनारे लगेंगे बांस के वन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बालावाली से रावली तक गंगा किनारे लगेंगे बांस के वन
विज्ञापन
बिजनार में खादर क्षेत्र में गंगा से होता कटान।
- फोटो : BIJNOR
बालावाली से रावली तक गंगा किनारे लगेंगे बांस के वन
बिजनौर। यूं तो बांस बहु उपयोगी है, लेकिन यह गंगा की तेज धार का भी सामना करेगा। जी हां, बालवाली से रावली तक गंगा किनारे बांस लगाए जाने की तैयारी है। बीस किलोमीटर की दूरी में गंगा के तट पर बांस के वन विकसित किए जाएंगे। जिससे गंगा किनारे जमीनों के होने वाले कटान को थामा जा सके। वहीं, जिले के तालाबों में जल का क्षय रोकने के लिए बांस रोपण का काम चल रहा है।
हर साल की बरसात गंगा खादर के लिए दुश्वारियां लेकर आती है। जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ आती है और कम होता है जमीनों का कटान शुरू हो जाता है। जलस्तर बढ़कर नीचे खिसकता है तो खेत के खेत गंगा में समाने लगते हैं। हालांकि बाढ़ और कटान निरोधी कार्यों के लिए 62 करोड़ की परियोजना मंजूर हो चुकी है। फिर भी प्रशासन ने प्राकृतिक तरीके से कटान को रोकने की योजना पर विचार शुरू किया है। जिसमें बड़े स्तर पर बांस का पौधरोपण किया जाएगा। दरअसल, बांस के पौधे दूर तक फैल जाते हैं और इनकी जड़ें गहरी होती हैं।
प्रशासन ने बालावाली से लेकर रावली तक गंगा के कटाव से ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए योजना बनाकर शासन को भेजी है। साथ ही प्रशासन बालावाली से रावली तक बांस का पौधारोपण करने की तैयारी में है। सीडीओ पूर्ण वोहरा के अनुसार बांस का पौधरोपण वन विभाग के सहयोग से होगा। मनरेगा के जिला उपायुक्त को कार्य में तेजी लाने की हिदायत दी गई है। एपीओ दिनेश कुमार ने बताया कि इसके अंतर्गत 15 ग्राम पंचायतों के करीब 50 गांव आएंगे। विकास विभाग, वन विभाग तथा मनरेगा बांस पौधरोपण का ब्लु प्रिंट तैयार करने में जुटे हैं। जल्द ही प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
विज्ञापन
जल का क्षरण भी रोकता है बांस
जिले में 1134 पंचायतों में करीब 2500 गांव हैं। गांवों में बड़ी संख्या में ताल तलैया हैं। तालाब जल संचयन के प्राकृतिक श्रोत हैं। बरसात में जल का संचयन होता है। जिससे भूगर्भ जल स्तर बढ़ता है। कृषि तथा अन्य कार्य में अत्यधिक जल दोहन से भूगर्भ जल स्तर गिरा। जल संकट उत्पन्न हो गया। शासन ने जल संकट से उबरने के लिए जल संचयन अभियान शुरू किया। रेन वाटर हार्वेस्टिंग आदि योजना चल रही हैं। शासन की मंशा है कि तालाब जल से लबालब रहें। इसके लिए तालाबों का जल क्षरण रोकना जरूरी है। बांस जल का क्षय रोकने का प्राकृतिक तरीका है। जिले में तालाबों के किनारे बांस का पौधरोपण हो रहा है।
बांस रोपण में स्योहारा ब्लॉक ने ली दिलचस्पी
बांस के जल शोधन व जल क्षय रोकने के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। इसलिए ग्रामीण जल क्षरण रोकने के लिए बांस का पौधारोपण करने लगे हैं। जिले में 11 ब्लॉक हैं। परंतु बांस रोपण में स्योहारा ब्लॉक ने ही सबसे अधिक दिलचस्पी दिखाई है। एपीओ दिनेश कुमार के अनुसार स्योहारा ब्लॉक में सामूहिक बांस रोपण 3490 तथा व्यक्तिगत बांस रोपण 200 हुआ है। कुल .369 हेक्टेयर रकबे में बांस रोपण हुआ है। अन्य ब्लॉक में बांस रोपण के लिए तालाब चिह्नित करने आदि की प्रक्रिया शुरू है। नजीबाबाद ब्लॉक के बीडीओ ज्ञान सिंह के मुताबिक ब्लॉक में बांस रोपण के लिए तालाब चिह्नित करने का काम अंतिम चरण में है।
बांस रोपण से ये होंगे फायदे
तालाबों में बांस रोपण से तालाब अपने मूल स्वरूप में रहेंगे। जल का क्षरण रुकेगा। भूगर्भ जल स्तर बढ़ेगा। जल का प्राकृतिक शुद्धीकरण होगा। जंगली जानवरों को प्यास बुझाने के लिए शुद्ध जल मिलेगा। जल संकट में प्यास बुझाने के लिए जंगली जानवर नहीं आएंगे। बांस जन्म से लेकर मृत्यु तक काम आता है। बांस कीमती होता है। ग्रामपंचायतों के तालाबों में बांस उत्पादन से पंचायतों की आमदनी बढ़ेगी। विकास कार्य अधिक होंगे। बांस का पौधरोपण मनरेगा से होगा। इसलिए मनरेगा मजदूरों को काम मिलेगा।
विज्ञापन
बिजनौर। यूं तो बांस बहु उपयोगी है, लेकिन यह गंगा की तेज धार का भी सामना करेगा। जी हां, बालवाली से रावली तक गंगा किनारे बांस लगाए जाने की तैयारी है। बीस किलोमीटर की दूरी में गंगा के तट पर बांस के वन विकसित किए जाएंगे। जिससे गंगा किनारे जमीनों के होने वाले कटान को थामा जा सके। वहीं, जिले के तालाबों में जल का क्षय रोकने के लिए बांस रोपण का काम चल रहा है।
हर साल की बरसात गंगा खादर के लिए दुश्वारियां लेकर आती है। जलस्तर बढ़ने पर बाढ़ आती है और कम होता है जमीनों का कटान शुरू हो जाता है। जलस्तर बढ़कर नीचे खिसकता है तो खेत के खेत गंगा में समाने लगते हैं। हालांकि बाढ़ और कटान निरोधी कार्यों के लिए 62 करोड़ की परियोजना मंजूर हो चुकी है। फिर भी प्रशासन ने प्राकृतिक तरीके से कटान को रोकने की योजना पर विचार शुरू किया है। जिसमें बड़े स्तर पर बांस का पौधरोपण किया जाएगा। दरअसल, बांस के पौधे दूर तक फैल जाते हैं और इनकी जड़ें गहरी होती हैं।
विज्ञापन
प्रशासन ने बालावाली से लेकर रावली तक गंगा के कटाव से ग्रामीणों को राहत दिलाने के लिए योजना बनाकर शासन को भेजी है। साथ ही प्रशासन बालावाली से रावली तक बांस का पौधारोपण करने की तैयारी में है। सीडीओ पूर्ण वोहरा के अनुसार बांस का पौधरोपण वन विभाग के सहयोग से होगा। मनरेगा के जिला उपायुक्त को कार्य में तेजी लाने की हिदायत दी गई है। एपीओ दिनेश कुमार ने बताया कि इसके अंतर्गत 15 ग्राम पंचायतों के करीब 50 गांव आएंगे। विकास विभाग, वन विभाग तथा मनरेगा बांस पौधरोपण का ब्लु प्रिंट तैयार करने में जुटे हैं। जल्द ही प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।
विज्ञापन
जल का क्षरण भी रोकता है बांस
जिले में 1134 पंचायतों में करीब 2500 गांव हैं। गांवों में बड़ी संख्या में ताल तलैया हैं। तालाब जल संचयन के प्राकृतिक श्रोत हैं। बरसात में जल का संचयन होता है। जिससे भूगर्भ जल स्तर बढ़ता है। कृषि तथा अन्य कार्य में अत्यधिक जल दोहन से भूगर्भ जल स्तर गिरा। जल संकट उत्पन्न हो गया। शासन ने जल संकट से उबरने के लिए जल संचयन अभियान शुरू किया। रेन वाटर हार्वेस्टिंग आदि योजना चल रही हैं। शासन की मंशा है कि तालाब जल से लबालब रहें। इसके लिए तालाबों का जल क्षरण रोकना जरूरी है। बांस जल का क्षय रोकने का प्राकृतिक तरीका है। जिले में तालाबों के किनारे बांस का पौधरोपण हो रहा है।
बांस रोपण में स्योहारा ब्लॉक ने ली दिलचस्पी
बांस के जल शोधन व जल क्षय रोकने के सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। इसलिए ग्रामीण जल क्षरण रोकने के लिए बांस का पौधारोपण करने लगे हैं। जिले में 11 ब्लॉक हैं। परंतु बांस रोपण में स्योहारा ब्लॉक ने ही सबसे अधिक दिलचस्पी दिखाई है। एपीओ दिनेश कुमार के अनुसार स्योहारा ब्लॉक में सामूहिक बांस रोपण 3490 तथा व्यक्तिगत बांस रोपण 200 हुआ है। कुल .369 हेक्टेयर रकबे में बांस रोपण हुआ है। अन्य ब्लॉक में बांस रोपण के लिए तालाब चिह्नित करने आदि की प्रक्रिया शुरू है। नजीबाबाद ब्लॉक के बीडीओ ज्ञान सिंह के मुताबिक ब्लॉक में बांस रोपण के लिए तालाब चिह्नित करने का काम अंतिम चरण में है।
बांस रोपण से ये होंगे फायदे
तालाबों में बांस रोपण से तालाब अपने मूल स्वरूप में रहेंगे। जल का क्षरण रुकेगा। भूगर्भ जल स्तर बढ़ेगा। जल का प्राकृतिक शुद्धीकरण होगा। जंगली जानवरों को प्यास बुझाने के लिए शुद्ध जल मिलेगा। जल संकट में प्यास बुझाने के लिए जंगली जानवर नहीं आएंगे। बांस जन्म से लेकर मृत्यु तक काम आता है। बांस कीमती होता है। ग्रामपंचायतों के तालाबों में बांस उत्पादन से पंचायतों की आमदनी बढ़ेगी। विकास कार्य अधिक होंगे। बांस का पौधरोपण मनरेगा से होगा। इसलिए मनरेगा मजदूरों को काम मिलेगा।