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Bijnor News: छह मार्च को होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
Sun, 05 Mar 2023 12:14 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 05 Mar 2023 12:14 AM IST
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बिजनौर। होली का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। इस बार होलिका दहन छह मार्च को किया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार होलिका दहन का शुभ समय शाम 6:20 मिनट से शाम 7:30 मिनट तक है।
होलिका दहन फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। मगर इस बार होलिका दहन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ छह मार्च 2023 को शाम 4:18 मिनट से हो रहा है। इसका समापन सात मार्च को शाम 6:10 मिनट पर होगा। पंचाग के अनुसार छह मार्च को ही शाम 4:17 मिनट से भद्रा शुरू होकर सात मार्च को सुबह 5:15 मिनट तक रहेगी।
भद्राकाल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। हालांकि शास्त्रानुसार छह मार्च को प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में शाम 6:20 मिनट से शाम 7:30 मिनट तक होलिका दहन का श्रेष्ठ समय रहेगा। होलिका दहन के समय देसी घी में भीगी हुई दो लौंग, दो बताशे, एक पान के पत्ते की आहुति देनी चाहिए। वहीं अविवाहित कन्याओं को एक पान के पत्ते पर एक साबुत बताशा और हल्दी की साबुत गांठ रखकर होलिका दहन की अग्नि में आहुति देनी चाहिए। भगवान शंकर और माता पार्वती का ध्यान रखना चाहिए।
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इसके अलावा होलिका की अग्नि में एक नारियल, पान, दो सुपारी अर्पित करनी चाहिए। वहीं होलिका दहन की राख बहुत शुभ मानी जाती है। होलिका की भस्म को घर में छिड़कने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसके अलावा होली के दिन गरीबों को दान करना चाहिए।
छह मार्च को प्रदोष व्यापिनी में होगा होलिका दहन: पंडित ललित शर्मा
सिविल लाइन स्थित धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा का कहना है कि प्रतिपदा, चतुर्दशी और भद्राकाल में होलिका दहन नहीं होता है। अगर पूर्णिमा दो दिन प्रदोष काल को व्याप्त कर रही हो तो दूसरे दिन ही प्रदोषकाल में होलिका दहन किया जाता है। इस बार फाल्गुन शुक्ला पूर्णिमा तिथि छह मार्च को ही प्रदोष व्यापिनी है। इसलिए होलिका दहन छह मार्च को ही किया जाएगा।
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होलिका दहन फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि को किया जाता है। मगर इस बार होलिका दहन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ छह मार्च 2023 को शाम 4:18 मिनट से हो रहा है। इसका समापन सात मार्च को शाम 6:10 मिनट पर होगा। पंचाग के अनुसार छह मार्च को ही शाम 4:17 मिनट से भद्रा शुरू होकर सात मार्च को सुबह 5:15 मिनट तक रहेगी।
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भद्राकाल में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता है। हालांकि शास्त्रानुसार छह मार्च को प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में शाम 6:20 मिनट से शाम 7:30 मिनट तक होलिका दहन का श्रेष्ठ समय रहेगा। होलिका दहन के समय देसी घी में भीगी हुई दो लौंग, दो बताशे, एक पान के पत्ते की आहुति देनी चाहिए। वहीं अविवाहित कन्याओं को एक पान के पत्ते पर एक साबुत बताशा और हल्दी की साबुत गांठ रखकर होलिका दहन की अग्नि में आहुति देनी चाहिए। भगवान शंकर और माता पार्वती का ध्यान रखना चाहिए।
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इसके अलावा होलिका की अग्नि में एक नारियल, पान, दो सुपारी अर्पित करनी चाहिए। वहीं होलिका दहन की राख बहुत शुभ मानी जाती है। होलिका की भस्म को घर में छिड़कने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इसके अलावा होली के दिन गरीबों को दान करना चाहिए।
छह मार्च को प्रदोष व्यापिनी में होगा होलिका दहन: पंडित ललित शर्मा
सिविल लाइन स्थित धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा का कहना है कि प्रतिपदा, चतुर्दशी और भद्राकाल में होलिका दहन नहीं होता है। अगर पूर्णिमा दो दिन प्रदोष काल को व्याप्त कर रही हो तो दूसरे दिन ही प्रदोषकाल में होलिका दहन किया जाता है। इस बार फाल्गुन शुक्ला पूर्णिमा तिथि छह मार्च को ही प्रदोष व्यापिनी है। इसलिए होलिका दहन छह मार्च को ही किया जाएगा।