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बचपन में गंभीर बीमारी से पीड़ित अस्दुल्लाह ने रखा रोजा
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लाइलाज बीमारी से ग्रसित अस्दुल्लाह ने कोरोना पीड़ितों के लिए रखा रोजा
नजीबाबाद। गंभीर बीमारी से ग्रासित अस्दुल्लाह की कोरोना पीड़ितों के लिए रोजा रखने की जिद के आगे परिवार को झुकना पड़ा। बचपन से गंभीर बीमारी से जूझ रहे अस्दुल्लाह ने रोजा रखा और कोरोना पीड़ितों की जल्द सेहत कर दुआ मांगी।
मोहल्ला हवेतीतला निवासी प्रिंटर्स मो. इस्लाम का 13 वर्षीय पुत्र लाइलाज बीमारी सिस्टिक फाय्ब्रोसिस से पीड़ित है। पाचन और पोषण में पूरी तरह अक्षम अस्दुल्लाह की जिंदगी बचाने को दिन में तीन बार भाप और बार-बार थोड़ा खाना दिया जाता है।
जिंदगी की जंग लड़ रहे अस्दुल्लाह ने रविवार को परिजनों के लाख मना करने पर यह कहते हुए अपनी जिंदगी में पहला रोजा रखा कि उसे अल्लाह को मुंह दिखाना है। रोजा फर्ज है। रोजा रखकर वह अल्लाह से उन लोगों के लिए जल्द सेहत और जिंदगी की भी दुआ मांगेगा जो लोग कोरोना संक्रमित होकर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।अस्दुल्लाह की हिम्मत और हौसले को हर किसी ने सराहते हुए सलाम किया।
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नजीबाबाद। गंभीर बीमारी से ग्रासित अस्दुल्लाह की कोरोना पीड़ितों के लिए रोजा रखने की जिद के आगे परिवार को झुकना पड़ा। बचपन से गंभीर बीमारी से जूझ रहे अस्दुल्लाह ने रोजा रखा और कोरोना पीड़ितों की जल्द सेहत कर दुआ मांगी।
मोहल्ला हवेतीतला निवासी प्रिंटर्स मो. इस्लाम का 13 वर्षीय पुत्र लाइलाज बीमारी सिस्टिक फाय्ब्रोसिस से पीड़ित है। पाचन और पोषण में पूरी तरह अक्षम अस्दुल्लाह की जिंदगी बचाने को दिन में तीन बार भाप और बार-बार थोड़ा खाना दिया जाता है।
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जिंदगी की जंग लड़ रहे अस्दुल्लाह ने रविवार को परिजनों के लाख मना करने पर यह कहते हुए अपनी जिंदगी में पहला रोजा रखा कि उसे अल्लाह को मुंह दिखाना है। रोजा फर्ज है। रोजा रखकर वह अल्लाह से उन लोगों के लिए जल्द सेहत और जिंदगी की भी दुआ मांगेगा जो लोग कोरोना संक्रमित होकर जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।अस्दुल्लाह की हिम्मत और हौसले को हर किसी ने सराहते हुए सलाम किया।
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