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वन चौकी पर बांधे पशु और पाथे उपले
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Wed, 29 Nov 2017 12:00 AM IST
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वन चौकी पर पशुओं को बांधकर प्रदर्शन करते किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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रेहड़ में प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता विफल होने के बाद भाकियू कार्यकर्ताओं ने वन विभाग की चौकी पर कब्जा जमाना शुरू कर दिया है। किसानों ने मंगलवार को वन चौकी पर अपने पशुओं को लेकर जाकर बांध दिया और वहीं पर महिलाओं ने गोबर आदि पाथना शुरू कर दिया है। किसानों ने चेताया कि जब तक उनकी समस्या का स्थाई समाधान नहीं होता है, धरना जारी रहेगा।
वन विभाग के अधिकारियों की मनमानी के विरोध में भाकियू कार्यकर्ता प्रशासन से बेहद खफा है। वन विभाग की केहरीपुर चौकी पर सरकार की ओर से तैनाती के बाद भी कोई अधिकारी नहीं रहता है। चौकी पर तैनात एक दारोगा ने तो पास के गांव में एक प्राइवेट भवन पर समानांतर चौकी चला रखी है। वन विभाग के अधिकारियों का चौकी पर तैनात अधीनस्थों पर को नियंत्रण नहीं है। शिकायत पर किसी को सुनवाई नहीं होती है। सोमवार केे एसडीएम आजाद भगत सिंह और सीओ अर्चना सिंह ने किसानों के बीच में पहुंच कर उनकी समस्या का निदान करने का प्रयास किया था। पर अधिकारियों के वन विभाग के अधिकारियों का बचाव करने के कारण वार्ता विफल हो गई थी।
मंगलवार को कार्यकर्ताओं ने पशुओं को वन चौकी पर बांध कर और महिलाओं ने गोबर के उपले पथवाकर आंदोलन को और तेज कर दिया है। कहा कि जब इस चौकी पर वन विभाग का कोई मतलब नहीं रह गया है तो अब भाकियू ही इसका उपयोग करेगी। किसानों ने वन विभाग के इन सभी आरोपों को गलत करार दिया है कि गांव रानी नांगल में किसानों ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर रखा है। किसानों ने प्रदेश के सीएम से दखलंदाजी कर न्याय दिलाने और विभाग के प्रति लापरवाही वन विभाग के अधिकारियों के बर्खास्त करने की मांग की है।
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किसानों ने बेदखली के मामले को लेकर पांच दिसंबर को डीएफओ कार्यालय का घेराव करेंगे। धरने में दर्शन फौजी, बलजीत सिंह, मलकीत सिंह, संदीप, रोहताश,हरनाम, जोगेंद्र, सोनू रहे।
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वन विभाग के अधिकारियों की मनमानी के विरोध में भाकियू कार्यकर्ता प्रशासन से बेहद खफा है। वन विभाग की केहरीपुर चौकी पर सरकार की ओर से तैनाती के बाद भी कोई अधिकारी नहीं रहता है। चौकी पर तैनात एक दारोगा ने तो पास के गांव में एक प्राइवेट भवन पर समानांतर चौकी चला रखी है। वन विभाग के अधिकारियों का चौकी पर तैनात अधीनस्थों पर को नियंत्रण नहीं है। शिकायत पर किसी को सुनवाई नहीं होती है। सोमवार केे एसडीएम आजाद भगत सिंह और सीओ अर्चना सिंह ने किसानों के बीच में पहुंच कर उनकी समस्या का निदान करने का प्रयास किया था। पर अधिकारियों के वन विभाग के अधिकारियों का बचाव करने के कारण वार्ता विफल हो गई थी।
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मंगलवार को कार्यकर्ताओं ने पशुओं को वन चौकी पर बांध कर और महिलाओं ने गोबर के उपले पथवाकर आंदोलन को और तेज कर दिया है। कहा कि जब इस चौकी पर वन विभाग का कोई मतलब नहीं रह गया है तो अब भाकियू ही इसका उपयोग करेगी। किसानों ने वन विभाग के इन सभी आरोपों को गलत करार दिया है कि गांव रानी नांगल में किसानों ने वन विभाग की जमीन पर कब्जा कर रखा है। किसानों ने प्रदेश के सीएम से दखलंदाजी कर न्याय दिलाने और विभाग के प्रति लापरवाही वन विभाग के अधिकारियों के बर्खास्त करने की मांग की है।
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किसानों ने बेदखली के मामले को लेकर पांच दिसंबर को डीएफओ कार्यालय का घेराव करेंगे। धरने में दर्शन फौजी, बलजीत सिंह, मलकीत सिंह, संदीप, रोहताश,हरनाम, जोगेंद्र, सोनू रहे।