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आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला जड़ा
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Sat, 10 Sep 2016 12:21 AM IST
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बिजनौर में शुक्रवार को कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करते आंगनबाड़ी कार्यकर्ता।
- फोटो : अमर उजाला
बिजनौर में राज्य कर्मचारी घोषित कराने सहित अनेक मांगों को लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता आंगनबाड़ी केंद्रों पर ताला जड़कर सड़कों पर उतर आए। उन्होंने जुलूस निकालकर कलक्ट्रेट पहुंची और धरने पर बैठ गईं। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम बी चंद्रकला को दिया।
उत्तर प्रदेश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एसोसिएशन एवं सहायिका कर्मचारी एसोसिएशन के बैनर तले जिले भर के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका हड़ताल पर रहीं। टाउन हॉल में एकत्र होकर कलक्ट्रेट पहुंचकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वक्ताओं ने कहा कि वे किसी भी विभाग के कर्मचारी से कम काम नहीं करते। कुपोषण के खिलाफ उनके द्वारा ही जंग लड़ी जा रही है, फिर भी उनकी अनदेखी की जा रही है। इसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रदर्शन करते हुए कलक्ट्रेट में लेखपालों के साथ ही धरना देकर बैठ गए। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम बी चंद्रकला को सौंपा। धरने की अध्यक्षता शारदा चौधरी व वेत्रलता शर्मा ने की। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष राजेश्वरी राठी, पूनम देवी, शीला, मधुबाला, राजो देवी, संदेश आदि मौजूद रहीं।
वहीं बिजनौर में डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन ने अनेक मांगों को लेकर सीएमओ कार्यालय पर एक दिवसीय धरना दिया। धरने में फार्मेसिस्ट, चीफ फार्मेसिस्ट ने मांगों के लंबित होने पर रोष व्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि वेतन विसंगति दूर करने पद सृजन, संवर्ग का पुनर्गठन की मांग करते आ रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि महानिदेशालय द्वारा उनकी पदोन्नति नहीं की जा रही है। वहीं वहीं अफजलगढ़ में सरकारी अस्पतालों में फार्मेसिस्टों के हड़ताल पर चले जाने से मरीज परेशान हैं। अफजलगढ़ सीएचसी, कासमपुरगढ़ी पीएचसी, हरेवली पीएचसी, कादराबाद पीएचसी, और सुआवाला पीएचसी के फार्मेसिस्ट हड़ताल पर हैं।
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फार्मेसिस्ट वेतन विसंगति दूर करने, पुरानी पेंशन बहाली और 10 वर्ष से अधिक कार्यरत फार्मेसिस्टों को राजपत्रित अधिकारियों का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले अधिकतर मरीज दवाएं लिया बिना ही लौट रहे हैं। फार्मासिस्ट मनोज शर्मा, सतीश कुमार, अमित, दिनेश आदि ने लंबित मांगें पूरा न करने पर रोष जताया है।
दूध, घी खाकर लड़ेंगे साइकिल वाले से
प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि साइकिल वाले देश बर्बाद कर रहे हैं। राज्य की पावर राज्यपाल और लेखपाल दोनों का शोषण कर रहे हैं। इस बार केंद्रों पर दूध और घी आएगा तो उसे प्रधान को देने के बजाए आंगनबाड़ी खुद खाएंगी और ताकतवर होकर साइकिल वाले से लड़ेंगी।
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उत्तर प्रदेश आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एसोसिएशन एवं सहायिका कर्मचारी एसोसिएशन के बैनर तले जिले भर के आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका हड़ताल पर रहीं। टाउन हॉल में एकत्र होकर कलक्ट्रेट पहुंचकर सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। वक्ताओं ने कहा कि वे किसी भी विभाग के कर्मचारी से कम काम नहीं करते। कुपोषण के खिलाफ उनके द्वारा ही जंग लड़ी जा रही है, फिर भी उनकी अनदेखी की जा रही है। इसको बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता प्रदर्शन करते हुए कलक्ट्रेट में लेखपालों के साथ ही धरना देकर बैठ गए। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम बी चंद्रकला को सौंपा। धरने की अध्यक्षता शारदा चौधरी व वेत्रलता शर्मा ने की। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष राजेश्वरी राठी, पूनम देवी, शीला, मधुबाला, राजो देवी, संदेश आदि मौजूद रहीं।
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वहीं बिजनौर में डिप्लोमा फार्मेसिस्ट एसोसिएशन ने अनेक मांगों को लेकर सीएमओ कार्यालय पर एक दिवसीय धरना दिया। धरने में फार्मेसिस्ट, चीफ फार्मेसिस्ट ने मांगों के लंबित होने पर रोष व्यक्त किया। वक्ताओं ने कहा कि वेतन विसंगति दूर करने पद सृजन, संवर्ग का पुनर्गठन की मांग करते आ रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि महानिदेशालय द्वारा उनकी पदोन्नति नहीं की जा रही है। वहीं वहीं अफजलगढ़ में सरकारी अस्पतालों में फार्मेसिस्टों के हड़ताल पर चले जाने से मरीज परेशान हैं। अफजलगढ़ सीएचसी, कासमपुरगढ़ी पीएचसी, हरेवली पीएचसी, कादराबाद पीएचसी, और सुआवाला पीएचसी के फार्मेसिस्ट हड़ताल पर हैं।
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फार्मेसिस्ट वेतन विसंगति दूर करने, पुरानी पेंशन बहाली और 10 वर्ष से अधिक कार्यरत फार्मेसिस्टों को राजपत्रित अधिकारियों का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाले अधिकतर मरीज दवाएं लिया बिना ही लौट रहे हैं। फार्मासिस्ट मनोज शर्मा, सतीश कुमार, अमित, दिनेश आदि ने लंबित मांगें पूरा न करने पर रोष जताया है।
दूध, घी खाकर लड़ेंगे साइकिल वाले से
प्रदर्शन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का कहना है कि साइकिल वाले देश बर्बाद कर रहे हैं। राज्य की पावर राज्यपाल और लेखपाल दोनों का शोषण कर रहे हैं। इस बार केंद्रों पर दूध और घी आएगा तो उसे प्रधान को देने के बजाए आंगनबाड़ी खुद खाएंगी और ताकतवर होकर साइकिल वाले से लड़ेंगी।