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अमर उजाला अभियान : माहौल बना तो बढ़ा विद्यार्थियों में उत्साह

Sat, 02 Apr 2022 12:15 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 02 Apr 2022 12:15 AM IST
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Amar Ujala Campaign: Enthusiasm among the students increased if the atmosphere was created
अमर उजाला अभियान : माहौल बना तो बढ़ा विद्यार्थियों में उत्साह
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बिजनौर। कोरोनाकाल के बाद शिक्षा में बड़े स्तर पर बदलाव हो रहा है। परिषदीय विद्यालयों में भी कंप्यूटर शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। जनपद में संचालित 14 कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में प्रोजेक्टर के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है। परिषदीय विद्यालयों में एक कक्ष को हाईटेक किया जा रहा है। एक कक्ष को स्मार्ट क्लास के रूप में विकसित किया जा रहा है। जिससे परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र तकनीकी शिक्षा से दूर न रहें। स्कूल-कॉलेजों में छात्र-छात्राएं रोजाना जाकर उत्साह के साथ कक्षाएं ले रहे हैं।
परिषदीय, माध्यमिक, उच्च स्तर के स्कूल, कॉलेजों में पढ़ाई पर बड़ा संकट आया था। दो साल छात्रों का बड़ा नुकसान हुआ है। अब सभी बोर्ड के विद्यालय अपने छात्रों को फिर से उसी रूप में लाने के लिए नवाचार का प्रयोग कर रहे हैं। स्कूलों में छात्रों को स्वस्थ रखने के लिए योग व खेल प्रतियोगिता कराई गई हैं। कोर्स को कम समय में पूरा करने के लिए पाठ को कहानी के रूप में वर्णित करके पूरा किया है। कोरोनाकाल में छोटे छात्र लंबे समय विद्यालयों से दूर रहे। स्कूल खुलने पर उन पर बहुत जोर पड़ा है। अब धीरे धीरे छोटे-बड़े सभी छात्र नियमित कक्षाओं में आ रहे हैं और अपने सहपाठियों के साथ पढ़ाई कर उत्साहित हैं। कक्षा 12 वीं की छात्रा शिल्पी ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई की, लेकिन स्कूल में पढ़ाई ज्यादा समझ में आई।
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फिर से बना पढ़ाई का वातावरण
गत दो वर्ष विद्यार्थियों की पढ़ाई ऑनलाइन हुई। बड़े छात्र उसे समझने के लिए व्हाट्सएप या फोन करके जानकारी कर लेते थे। अब स्कूल, कॉलेज खुल गए हैं और क्लास में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। घर की अपेक्षा क्लास में पढ़ने वाले छात्र को सब कुछ आसानी समझ में आ जाता है। क्योंकि क्लास में पढ़ाई का एक अच्छा वातावरण बना रहता है - कृष्ण कुमार, प्राचार्य कृष्णा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस गोलबाग
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प्रेरणादायक कहानियों से याद कराया पाठ
कोरोनाकाल की वजह से विद्यार्थियों की पढ़ाई पर प्रभाव पड़ा है। ऑनलाइन पढ़ाई एक अच्छा माध्यम सामने आया है। माध्यमिक व परिषदीय विद्यालयों के छात्र कोरोनाकाल में ही इसका प्रयोग कर पाए हैं। अब सभी स्कूलों को हाईटेक बनाने पर बल दिया जा रहा है। कोरोनाकाल में पढ़ाई में कमजोर हुए छात्रों को कक्षा में शिक्षक प्रेरणादायक कहानियों के माध्यम पढ़ा रहे हैं - मनोज कुमार, शिक्षक
स्वयं भी करनी पड़ी मेहनत
कोरोनाकाल में पढ़ाई बेपटरी हो गई थी। डर की वजह से बच्चों की पढ़ाई तथा खेल कूद पूरी तरह प्रभावित हुए थे। फिर ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हुई। बच्चों को पहले बड़ी कठिनाई हुई, लेकिन बच्चों की मदद को स्वयं भी मेहनत करनी पड़ी। ताकि अगली क्लास के लिए बच्चें कमजोर न पड़ जाएं। स्कूल में फिर से जाने पर बच्चे पहले जैसी स्थिति में लौट आएं हैं - मोनिका चौधरी, अभिभावक

कक्षा में अतिरिक्त पढ़ाई से दूर की कमजोरी
कोरोनाकाल में ऑनलाइन पढ़ाई के विभिन्न माध्यमों से सभी विद्यार्थियों को शिक्षा से जोड़े रखा। तहसील व ब्लॉक पर प्रधानाचार्यों को नोडल बनाया गया था, ताकि ऑनलाइन पढ़ाई की निगरानी की जा सके। परीक्षाओं से पहले स्कूल खुलने पर शिक्षकों ने अतिरिक्त कक्षाएं संचालन कर एवं नवाचार के माध्यम से छात्रों की कमजोरी को दूर किया - राजेश कुमार, डीआईओएस
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