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जरायम की कैंची से कतरी जिंदगी को रफू कर रहा अजमल
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पुलिस के सत्यापन में चांदपुर के गांव गोयली में सिलाई करता मिला हिस्ट्रीशीटर अजमल
- फोटो : BIJNOR
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जरायम की कैंची से कतरी जिंदगी को रफू कर रहा अजमल
बिजनौर। इसे पुलिस का खौफ कहें या कुछ और लेकिन, हिस्ट्रीशीर अपराध से तौबा करने लगे हैं। जी हां, पुलिस ने जिलेभर में सत्यापन अभियान चलाया तो तस्वीर साफ हुई। कोई घोड़ा बग्गी चला रहा है तो ई रिक्शा। अपराधी विशाल भी चांदपुर में एक नुक्कड़ पर हर रोज गोलगप्पे बेचता नजर आता है।
जिले के 22 थानों में 1834 अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खुली हुई है। जिले के 135 हिस्ट्रीशीटरों को पुलिस जेल भेज चुकी है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों से हिस्ट्रीशीटर जेल भेजे गए हैं। बता दें अब तक जिले में 1585 मौजूद मिले हैं। जिन पर लगातार नजर रखी जा रही है। चुनाव को लेकर कराए जा रहे सत्यापन में सामने आया कि तमाम हिस्ट्रीशीटर अपराध की दुनिया से तौबा कर चुके हैं।
केस नंबर एक
चांदपुर थाना के गांव गोयली का रहने वाले अजमल पुत्र रईस पर आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। गोकशी के अपराध में अजमल लिप्त रहा। जिस वजह से उसकी हिस्ट्रीशीट खोल दी गई। अब सत्यापन के लिए प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार गांव पहुंचे तो अजमल सिलाई करता मिला। उसने अपने परिवार का गुजारा करने के लिए सिलाई का काम शुरू कर दिया। अजमल ने पुलिस को बताया कि साहब अब में अपराध नहीं करता हूं। मैने अपना काम कर लिया है।
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केस नंबर दो
चांदपुर का रहने वाला विशाल हिस्ट्रीशीटर शहर में एक नुक्कड़ पर गोल गप्पे की रेहड़ी लगाता है। पुलिस को इसे ढूंढने की जरूरत ही नहीं पड़ती। छह साल पहले विशाल की हिस्ट्रीशीट खुली थी जो अब गोलगप्पे बेचता है। उसने भी अपराध को तौबा कर ली और सादगी की जिंदगी जी रहा है।
केस नंबर तीन
थाना कोतवाली देहात का हिस्ट्रीशीटर रफीक पुत्र हुसैनबख्श गौसपुर तिराहा का रहने वाला है। प्रभारी निरीक्षक हरिशचंद्र जोशी ने बताया कि रफीक अब घोड़ा बग्गी चलाता है। वहीं, महेश्वरी जट का रहने वाला हिस्ट्रीशीटर नफीस ई रिक्शा चला रहा है। नफीस पर चोरी के मुकदमे दर्ज थे।
केस नंबर चार
गौसपुर तिराहा का रहने वाला हिस्ट्रीशीटर सत्तार अब गाड़ी चलाता है, जबकि उसका भाई गफ्फार खेतों में मजदूरी करता है। दोनों ही भाई पहले गोकशी में लिप्त रहते थे। जिन्हें दुराचारी की श्रेणी में डाल दिया था। अब ये अपराध छोड़ मेहनत मजदूरी कर गुजारा कर रहे हैं।
वर्जन:::
सक्रिय हिस्ट्रीशीटर पर निगाह रखी जाती है। जिन्होंने अपराध छोड़ कामकाज शुरू कर दिया, उन्हें परेशान नहीं किया जाता है। तमाम हिस्ट्रीशीटर मेहनत मजदूरी करने लगे हैं - डॉ. प्रवीण रंजन सिंह, एएसपी सिटी।
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बिजनौर। इसे पुलिस का खौफ कहें या कुछ और लेकिन, हिस्ट्रीशीर अपराध से तौबा करने लगे हैं। जी हां, पुलिस ने जिलेभर में सत्यापन अभियान चलाया तो तस्वीर साफ हुई। कोई घोड़ा बग्गी चला रहा है तो ई रिक्शा। अपराधी विशाल भी चांदपुर में एक नुक्कड़ पर हर रोज गोलगप्पे बेचता नजर आता है।
जिले के 22 थानों में 1834 अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खुली हुई है। जिले के 135 हिस्ट्रीशीटरों को पुलिस जेल भेज चुकी है। अलग-अलग थाना क्षेत्रों से हिस्ट्रीशीटर जेल भेजे गए हैं। बता दें अब तक जिले में 1585 मौजूद मिले हैं। जिन पर लगातार नजर रखी जा रही है। चुनाव को लेकर कराए जा रहे सत्यापन में सामने आया कि तमाम हिस्ट्रीशीटर अपराध की दुनिया से तौबा कर चुके हैं।
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केस नंबर एक
चांदपुर थाना के गांव गोयली का रहने वाले अजमल पुत्र रईस पर आधा दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। गोकशी के अपराध में अजमल लिप्त रहा। जिस वजह से उसकी हिस्ट्रीशीट खोल दी गई। अब सत्यापन के लिए प्रभारी निरीक्षक मनोज कुमार गांव पहुंचे तो अजमल सिलाई करता मिला। उसने अपने परिवार का गुजारा करने के लिए सिलाई का काम शुरू कर दिया। अजमल ने पुलिस को बताया कि साहब अब में अपराध नहीं करता हूं। मैने अपना काम कर लिया है।
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केस नंबर दो
चांदपुर का रहने वाला विशाल हिस्ट्रीशीटर शहर में एक नुक्कड़ पर गोल गप्पे की रेहड़ी लगाता है। पुलिस को इसे ढूंढने की जरूरत ही नहीं पड़ती। छह साल पहले विशाल की हिस्ट्रीशीट खुली थी जो अब गोलगप्पे बेचता है। उसने भी अपराध को तौबा कर ली और सादगी की जिंदगी जी रहा है।
केस नंबर तीन
थाना कोतवाली देहात का हिस्ट्रीशीटर रफीक पुत्र हुसैनबख्श गौसपुर तिराहा का रहने वाला है। प्रभारी निरीक्षक हरिशचंद्र जोशी ने बताया कि रफीक अब घोड़ा बग्गी चलाता है। वहीं, महेश्वरी जट का रहने वाला हिस्ट्रीशीटर नफीस ई रिक्शा चला रहा है। नफीस पर चोरी के मुकदमे दर्ज थे।
केस नंबर चार
गौसपुर तिराहा का रहने वाला हिस्ट्रीशीटर सत्तार अब गाड़ी चलाता है, जबकि उसका भाई गफ्फार खेतों में मजदूरी करता है। दोनों ही भाई पहले गोकशी में लिप्त रहते थे। जिन्हें दुराचारी की श्रेणी में डाल दिया था। अब ये अपराध छोड़ मेहनत मजदूरी कर गुजारा कर रहे हैं।
वर्जन:::
सक्रिय हिस्ट्रीशीटर पर निगाह रखी जाती है। जिन्होंने अपराध छोड़ कामकाज शुरू कर दिया, उन्हें परेशान नहीं किया जाता है। तमाम हिस्ट्रीशीटर मेहनत मजदूरी करने लगे हैं - डॉ. प्रवीण रंजन सिंह, एएसपी सिटी।