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तारों को अर्घ्य देकर पूरा किया अहोई अष्टमी व्रत
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बिजनौर में अहोई पूजन करती महिलाएं।
- फोटो : BIJNOR
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तारों को अर्घ्य देकर पूरा किया अहोई अष्टमी व्रत
बिजनौर/नगीना। जिले में अहोई अष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। माताओं ने संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रखा। इसके बाद तारों को अर्घ्य देकर पूजन कर व्रत पूरा किया। अहोई अष्टमी पर पुत्रों ने अपनी माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
सोमवार को अहोई अष्टमी का पर्व मनाया गया। महिलाओं ने संतान की सलामती के लिए निर्जला उपवास रखा। पुत्रों के हाथों से चांदी की माला पहनी। पूजन करते समय महिलाओं ने अहोई माता को भोग लगाया। इसके बाद तारों को अर्घ्य देकर संतान की लंबी आयु की कामना कर अन्न ग्रहण किया। अहोई अष्टमी की तैयारी बाजार में पहले से ही चल रही थी। ज्वेलर्स की दुकानों से चांदी के मोतियों की खरीदारी भी हुई। इसके अलावा महिलाओं ने पुत्रों की सुख समृद्धि के लिए बुजुर्गों को कपड़े देकर आशीर्वाद लिया।
नगीना में भी महिलाओं ने पारंपरिक अनुष्ठान के साथ अहोई माता की कथा का गुणगान कर तारे निकलने पर अपना व्रत पूर्ण किया। महिलाओं ने अहोई माता की दीवार पर तस्वीर कच्चे चावल के घोल से तस्वीर बनाई। बाजार से तस्वीर लाकर पूजन किया। अनाज की कमोईयां, पूजा की थाली में दीप जलाकर अहोई माता की पौराणिक कथा सुनी।
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बिजनौर/नगीना। जिले में अहोई अष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। माताओं ने संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रखा। इसके बाद तारों को अर्घ्य देकर पूजन कर व्रत पूरा किया। अहोई अष्टमी पर पुत्रों ने अपनी माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।
सोमवार को अहोई अष्टमी का पर्व मनाया गया। महिलाओं ने संतान की सलामती के लिए निर्जला उपवास रखा। पुत्रों के हाथों से चांदी की माला पहनी। पूजन करते समय महिलाओं ने अहोई माता को भोग लगाया। इसके बाद तारों को अर्घ्य देकर संतान की लंबी आयु की कामना कर अन्न ग्रहण किया। अहोई अष्टमी की तैयारी बाजार में पहले से ही चल रही थी। ज्वेलर्स की दुकानों से चांदी के मोतियों की खरीदारी भी हुई। इसके अलावा महिलाओं ने पुत्रों की सुख समृद्धि के लिए बुजुर्गों को कपड़े देकर आशीर्वाद लिया।
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नगीना में भी महिलाओं ने पारंपरिक अनुष्ठान के साथ अहोई माता की कथा का गुणगान कर तारे निकलने पर अपना व्रत पूर्ण किया। महिलाओं ने अहोई माता की दीवार पर तस्वीर कच्चे चावल के घोल से तस्वीर बनाई। बाजार से तस्वीर लाकर पूजन किया। अनाज की कमोईयां, पूजा की थाली में दीप जलाकर अहोई माता की पौराणिक कथा सुनी।
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