{"_id":"598375a84f1c1b98628b4765","slug":"after-the-rains-of-the-mountains","type":"story","status":"publish","title_hn":"पहाड़ों की बारिश से मालन फिर उफनी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पहाड़ों की बारिश से मालन फिर उफनी
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Fri, 04 Aug 2017 12:42 AM IST
विज्ञापन
बिजनौर के ग्राम ब्रह्मपुरी में घुसा मालन नदी का पानी।
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बेगावाला में पहाड़ों पर हो रही भारी बारिश से मालन नदी उफनने लगी है। बुधवार रात गांव ब्रह्मपुरी में मालन का पानी भरने से खलबली मच गई। गांववालों ने पानी बढ़ने के डर से जागकर रात गुजारी। सुबह होते-होते पानी उतरने से गांव वालों ने राहत की सांस ली। गांववालों की हजारों बीघा फसल अब भी जलमग्न है।
खादर क्षेत्र के लिए पहाड़ों पर हो रही बारिश मुसीबत बन जाती है। पहाड़ों पर हो रही बारिश से बुधवार रात को मालन नदी उफन गई। मालन नदी का पानी रात करीब दस बजे गांव में घूस गया। घरों के बाहर सड़कों पर पानी भरा देखकर गांव वाले दहशत में आ गए। कुछ गांव वाले घरों की छतों पर चढ़ गए। हालांकि सुबह होते-होते जलस्तर कम होने से गांव से मालन नदी का पानी उतर गया।
गांव वालों की हजारों बीघा फसलों में मालन नदी का पानी भरा हुआ है। गांव में दोपहर तक दो से तीन फीट तक पानी भर गया। स्कूल गए बच्चों को नाव से घर लाया गया। रावली, शहजादपुर, भोगपुर, इनामपुरा आदि गांवों को जोड़ने वाले मालन नदी के रपटे पर भी दो फीट पानी बह रहा है। अगर पानी इससे ज्यादा बढ़ जाए तो आने जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। गांव से खेतों की ओर गए सभी रास्तों पर अभी भी पानी भरा हुआ है।
विज्ञापन
गांव वालों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी उनकी सुध नहीं ले रहे हैं। हर बार बारिश में वे अपने ही गांव में विस्थापित से बन जाते हैं। नेता भी आते हैं और वोट लेकर पांच साल में मुड़कर नहीं देखते हैं।
मध्य गंगा बैराज के एक्सईएन शरद सौरभ गिरि का कहना है कि गंगा में 60 हजार क्यूसेक पानी चल रहा है। गंगा के पानी से खतरे वाली अभी कोई परिस्थिति नहीं है। उन्होंने ग्रामीणों से फिर भी सतर्कता बरतने की अपील की है।
विज्ञापन
खादर क्षेत्र के लिए पहाड़ों पर हो रही बारिश मुसीबत बन जाती है। पहाड़ों पर हो रही बारिश से बुधवार रात को मालन नदी उफन गई। मालन नदी का पानी रात करीब दस बजे गांव में घूस गया। घरों के बाहर सड़कों पर पानी भरा देखकर गांव वाले दहशत में आ गए। कुछ गांव वाले घरों की छतों पर चढ़ गए। हालांकि सुबह होते-होते जलस्तर कम होने से गांव से मालन नदी का पानी उतर गया।
विज्ञापन
गांव वालों की हजारों बीघा फसलों में मालन नदी का पानी भरा हुआ है। गांव में दोपहर तक दो से तीन फीट तक पानी भर गया। स्कूल गए बच्चों को नाव से घर लाया गया। रावली, शहजादपुर, भोगपुर, इनामपुरा आदि गांवों को जोड़ने वाले मालन नदी के रपटे पर भी दो फीट पानी बह रहा है। अगर पानी इससे ज्यादा बढ़ जाए तो आने जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है। गांव से खेतों की ओर गए सभी रास्तों पर अभी भी पानी भरा हुआ है।
विज्ञापन
गांव वालों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारी उनकी सुध नहीं ले रहे हैं। हर बार बारिश में वे अपने ही गांव में विस्थापित से बन जाते हैं। नेता भी आते हैं और वोट लेकर पांच साल में मुड़कर नहीं देखते हैं।
मध्य गंगा बैराज के एक्सईएन शरद सौरभ गिरि का कहना है कि गंगा में 60 हजार क्यूसेक पानी चल रहा है। गंगा के पानी से खतरे वाली अभी कोई परिस्थिति नहीं है। उन्होंने ग्रामीणों से फिर भी सतर्कता बरतने की अपील की है।