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Bijnor News: अपार आईडी न बनने से प्रवेश पर संकट, फिसड्डी निजी स्कूलों को नोटिस
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ब्रजवीर चौधरी
बिजनौर। जिले में विभिन्न बोर्डों से संचालित स्कूलों और कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी बनवाना अनिवार्य है। इसके बावजूद निजी शिक्षण संस्थानों की लापरवाही सामने आ रही है। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में करीब 96 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार हो चुकी है, जबकि निजी स्कूलों में मात्र 46.68 प्रतिशत ही अपार आईडी बनी हैं। जिले में हजारों विद्यार्थियों की अपार आईडी अब तक नहीं बनने पर शिक्षा विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है।
माध्यमिक स्तर पर भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। राजकीय, सहायता प्राप्त, वित्तविहीन विद्यालयों और मदरसों में भी हजारों विद्यार्थियों की अपार आईडी नहीं बन सकी है। विभाग के अनुसार आईडी बनाने में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों को चेतावनी नोटिस जारी किए हैं। अपार आईडी नहीं बनने से उत्तीर्ण विद्यार्थियों को दूसरे विद्यालयों में प्रवेश लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले के परिषदीय विद्यालयों में अपार आईडी बनाने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि सबसे खराब स्थिति निजी स्कूलों की है। निजी बेसिक विद्यालयों में 1.69 लाख विद्यार्थियों में से केवल 79,123 की अपार आईडी बन सकी हैं, जबकि 90,363 विद्यार्थी अब भी वंचित हैं। माध्यमिक स्तर के वित्तविहीन विद्यालयों और मदरसों में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार नहीं हो पाई है।
किस श्रेणी में कितनी बनी अपार आईडी
परिषदीय विद्यालय : 1,41,710 में 1,16,443 तैयार, 25,267 शेष।
सहायता प्राप्त बेसिक : 6,343 में 5,614 तैयार, 729 शेष।
निजी बेसिक : 1,69,486 में 79,123 तैयार, 90,363 शेष।
वित्तविहीन माध्यमिक : 2,22,729 में 1,20,968 तैयार, 1,01,758 शेष।
मदरसे : 58,238 में 26,249 तैयार, 31,989 शेष।
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 15178 अध्ययनरत विद्यार्थियों में से 12361 आईडी बनी और 2817 विद्यार्थी रह गए वंचित
अपार आईडी क्यों है जरूरी
प्रत्येक विद्यार्थी की डिजिटल शैक्षणिक पहचान होती है।
एक ही आईडी में छात्र का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।
विद्यालय बदलने, प्रवेश, छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक सेवाओं में सुविधा मिलती है।
कक्षा 9 से 12 तक प्रवेश और रिकॉर्ड सत्यापन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन ने बताया कि जिन स्कूलों में अपार आईडी बनाने की प्रगति संतोषजनक नहीं है, उन्हें चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं। कई बार संदेश भेजकर भी प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। अब संबंधित प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों की बैठक बुलाकर लंबित विद्यार्थियों की अपार आईडी शीघ्र बनवाने के लिए सख्त निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यार्थी को अपार आईडी के अभाव में परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
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बिजनौर। जिले में विभिन्न बोर्डों से संचालित स्कूलों और कॉलेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री) आईडी बनवाना अनिवार्य है। इसके बावजूद निजी शिक्षण संस्थानों की लापरवाही सामने आ रही है। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में करीब 96 प्रतिशत विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार हो चुकी है, जबकि निजी स्कूलों में मात्र 46.68 प्रतिशत ही अपार आईडी बनी हैं। जिले में हजारों विद्यार्थियों की अपार आईडी अब तक नहीं बनने पर शिक्षा विभाग ने सख्ती शुरू कर दी है।
माध्यमिक स्तर पर भी स्थिति संतोषजनक नहीं है। राजकीय, सहायता प्राप्त, वित्तविहीन विद्यालयों और मदरसों में भी हजारों विद्यार्थियों की अपार आईडी नहीं बन सकी है। विभाग के अनुसार आईडी बनाने में लापरवाही बरतने वाले स्कूलों को चेतावनी नोटिस जारी किए हैं। अपार आईडी नहीं बनने से उत्तीर्ण विद्यार्थियों को दूसरे विद्यालयों में प्रवेश लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले के परिषदीय विद्यालयों में अपार आईडी बनाने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि सबसे खराब स्थिति निजी स्कूलों की है। निजी बेसिक विद्यालयों में 1.69 लाख विद्यार्थियों में से केवल 79,123 की अपार आईडी बन सकी हैं, जबकि 90,363 विद्यार्थी अब भी वंचित हैं। माध्यमिक स्तर के वित्तविहीन विद्यालयों और मदरसों में भी बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की अपार आईडी तैयार नहीं हो पाई है।
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किस श्रेणी में कितनी बनी अपार आईडी
परिषदीय विद्यालय : 1,41,710 में 1,16,443 तैयार, 25,267 शेष।
सहायता प्राप्त बेसिक : 6,343 में 5,614 तैयार, 729 शेष।
निजी बेसिक : 1,69,486 में 79,123 तैयार, 90,363 शेष।
वित्तविहीन माध्यमिक : 2,22,729 में 1,20,968 तैयार, 1,01,758 शेष।
मदरसे : 58,238 में 26,249 तैयार, 31,989 शेष।
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के 15178 अध्ययनरत विद्यार्थियों में से 12361 आईडी बनी और 2817 विद्यार्थी रह गए वंचित
अपार आईडी क्यों है जरूरी
प्रत्येक विद्यार्थी की डिजिटल शैक्षणिक पहचान होती है।
एक ही आईडी में छात्र का पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है।
विद्यालय बदलने, प्रवेश, छात्रवृत्ति और अन्य शैक्षणिक सेवाओं में सुविधा मिलती है।
कक्षा 9 से 12 तक प्रवेश और रिकॉर्ड सत्यापन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सचिन ने बताया कि जिन स्कूलों में अपार आईडी बनाने की प्रगति संतोषजनक नहीं है, उन्हें चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं। कई बार संदेश भेजकर भी प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। अब संबंधित प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों की बैठक बुलाकर लंबित विद्यार्थियों की अपार आईडी शीघ्र बनवाने के लिए सख्त निर्देश दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि किसी भी विद्यार्थी को अपार आईडी के अभाव में परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
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