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Bijnor News: एनएचएम घोटाले की जांच करने अगस्त में आएगी टीम
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बिजनौर। एनएचएम में वित्तीय अनियमितता की शिकायत की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई है। ऐसे में अब पांच सदस्य टीम अगस्त के पहले सप्ताह में एनएचएम में हुए घोटालों की जांच करने बिजनौर आएगी।
मुख्य संप्रेक्षा अधिकारी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं राधेश्याम ने जांच के लिए लेखाधिकारी मोहम्मद इब्राहिम, वरिष्ठ संप्रेक्षक नीरज मद्देशिया, वरिष्ठ संप्रेक्षक कपिल देव, वरिष्ठ संप्रेक्षक सुरेंद्र सिंह व वरिष्ठ संप्रेक्षक रमेश चंद्र मौर्य की टीम गठित की है। यह टीम तीन अगस्त से नौ अगस्त के मध्य जांच करने आएगी। बता दें कि शिकायतकर्ता मनोज कुमार ने एनएचएम में एक करोड़ से ज्यादा के घोटाले की शिकायत की थी।
जुलाई में सीएमओ ने मुख्य संप्रेक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर वरिष्ठ संप्रेक्षक को शिकायतकर्ता का रिश्तेदार बताते हुए जांच से हटाने की बात कही थी। इसके बाद मुख्य संप्रेक्षा अधिकारी ने सीएमओ को भेजे पत्र में कहा कि कौन किसका रिश्तेदार है, इसका कार्यालय अभिलेखों में कहीं भी उल्लेख नहीं होता। कोई भी संप्रेक्षक या वरिष्ठ संप्रेक्षक किसी भी आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना को उपलब्ध कराए जाने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं है। ऑडिट संबंधी सभी रिकॉर्ड मुख्य संप्रेक्षा अधिकारी के अधीन कार्यालय में संरक्षित होते हैं।
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इसलिए, जब कोई व्यक्ति आरटीआई के तहत मुख्य संप्रेक्षा अधिकारी से सूचनाएं मांगता है तो उन सूचनाओं की छायाप्रति उसे मुख्य संप्रेक्षा अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई जाती है।
सीएमओ डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने कहा कि एनएचएम में कोई गड़बड़ी नहीं है। शासन स्तर से हर साल ऑडिट होता है। इस बार भी हर साल की तरह ही टीम ऑडिट करने आ रही है।ल
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मुख्य संप्रेक्षा अधिकारी, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं राधेश्याम ने जांच के लिए लेखाधिकारी मोहम्मद इब्राहिम, वरिष्ठ संप्रेक्षक नीरज मद्देशिया, वरिष्ठ संप्रेक्षक कपिल देव, वरिष्ठ संप्रेक्षक सुरेंद्र सिंह व वरिष्ठ संप्रेक्षक रमेश चंद्र मौर्य की टीम गठित की है। यह टीम तीन अगस्त से नौ अगस्त के मध्य जांच करने आएगी। बता दें कि शिकायतकर्ता मनोज कुमार ने एनएचएम में एक करोड़ से ज्यादा के घोटाले की शिकायत की थी।
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जुलाई में सीएमओ ने मुख्य संप्रेक्षा अधिकारी को पत्र लिखकर वरिष्ठ संप्रेक्षक को शिकायतकर्ता का रिश्तेदार बताते हुए जांच से हटाने की बात कही थी। इसके बाद मुख्य संप्रेक्षा अधिकारी ने सीएमओ को भेजे पत्र में कहा कि कौन किसका रिश्तेदार है, इसका कार्यालय अभिलेखों में कहीं भी उल्लेख नहीं होता। कोई भी संप्रेक्षक या वरिष्ठ संप्रेक्षक किसी भी आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना को उपलब्ध कराए जाने के लिए सक्षम प्राधिकारी नहीं है। ऑडिट संबंधी सभी रिकॉर्ड मुख्य संप्रेक्षा अधिकारी के अधीन कार्यालय में संरक्षित होते हैं।
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इसलिए, जब कोई व्यक्ति आरटीआई के तहत मुख्य संप्रेक्षा अधिकारी से सूचनाएं मांगता है तो उन सूचनाओं की छायाप्रति उसे मुख्य संप्रेक्षा अधिकारी द्वारा उपलब्ध कराई जाती है।
सीएमओ डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने कहा कि एनएचएम में कोई गड़बड़ी नहीं है। शासन स्तर से हर साल ऑडिट होता है। इस बार भी हर साल की तरह ही टीम ऑडिट करने आ रही है।ल