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Bijnor News: मुंह का छोटा सा जख्म बन सकता है ओरल कैंसर
Sat, 24 May 2025 12:00 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sat, 24 May 2025 12:00 AM IST
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बिजनौर। मुंह में एक ही जगह पर बार-बार घाव होना ओरल कैंसर (मुंह का कैंसर) का कारण बन सकता है। यह घाव चोट लगने, एक ही जगह गुटखा रखने या फिर किसी अन्य कारण से भी हो सकता है। इसके उपचार में लापरवाही की तो रोग भयंकर रूप ले सकता है। मेडिकल अस्पताल के विशेषज्ञों की मानें तो तंबाकू के साथ स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही मुंह के कैंसर की बड़ी वजह है। मेडिकल अस्पताल में ईएनटी विभाग की हर ओपीडी में लगभग 80 मरीज परामर्श के लिए पहुंचते हैं। ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अंशु सिंह ने बताया कि ओपीडी में तीन से चार मरीजों में रोज कैंसर की पुष्टि होती है। इसके कारण जाने तो पता लगा कि तंबाकू के साथ आनुवांशिक और स्वास्थ्य में बार-बार होने वाली समस्या को लेकर लापरवाही भी कैंसर का कारण बनी है। चिकित्सकों ने बताया कि आमतौर पर मुंह में कैंसर होने का कारण एक ही जगह पर किसी भी चीज से बार-बार घाव बनना होता है। यह घाव कट जाने से, तंबाकू या सुपारी के सेवन से या बार -बार एक ही जगह पर छाला होने से होता है।
झाड़-फूंक या देसी इलाज में ज्यादा विश्वास करते हैं मरीज
डॉ. अंशु सिंह ने बताया कि जिन मरीजों में हम कैंसर की पुष्टि करते हैं उनमें से आधे वापस नहीं आते। ये मरीज झाड़-फूंक या किसी देसी इलाज के चक्कर में पड़ जाते हैं। इसके कुछ समय बाद जब कैंसर और बढ़ जाता है, तो वापस इलाज के लिए आते हैं। कई मरीज ऐसे आए जिनकी कैंसर की पहली श्रेणी में पुष्टि हुई थी लेकिन उन्होंने समुचित इलाज नहीं किया। बाद में वे बीमारी बढ़ जाने से उनके पास आए।
मुंह में गुटखा रखने वाली जगह पर ज्यादा खतरा : डॉ. वशिष्ठ
मेडिकल कॉलेज के दंत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शिरीन वशिष्ठ ने बताया कि कुछ लोग खैनी या गुटखा मुंह में एक निर्धारित जगह रखकर खाते हैं। ऐसे में वहां घाव होने से उसी जगह कैंसर का खतरा अधिक रहता है। वहीं शराब के सेवन के साथ तंबाकू का सेवन और भी खतरनाक है।
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लापरवाही सबसे ज्यादा हानिकारक : डॉ. अंशु
मेडिकल अस्पताल की ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अंशु का कहना है कि समय पर कैंसर का पता चलने पर इलाज संभव है। लोग तंबाकू के नुकसान पता होते हुए भी इसका सेवन करते हैं। वहीं अन्य लापरवाही से भी यह बड़ी बीमारी पैदा हो जाती है। समय -समय पर जांच कराते रहना चाहिए और तंबाकू का सेवन नहीं करना चाहिए।
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झाड़-फूंक या देसी इलाज में ज्यादा विश्वास करते हैं मरीज
डॉ. अंशु सिंह ने बताया कि जिन मरीजों में हम कैंसर की पुष्टि करते हैं उनमें से आधे वापस नहीं आते। ये मरीज झाड़-फूंक या किसी देसी इलाज के चक्कर में पड़ जाते हैं। इसके कुछ समय बाद जब कैंसर और बढ़ जाता है, तो वापस इलाज के लिए आते हैं। कई मरीज ऐसे आए जिनकी कैंसर की पहली श्रेणी में पुष्टि हुई थी लेकिन उन्होंने समुचित इलाज नहीं किया। बाद में वे बीमारी बढ़ जाने से उनके पास आए।
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मुंह में गुटखा रखने वाली जगह पर ज्यादा खतरा : डॉ. वशिष्ठ
मेडिकल कॉलेज के दंत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. शिरीन वशिष्ठ ने बताया कि कुछ लोग खैनी या गुटखा मुंह में एक निर्धारित जगह रखकर खाते हैं। ऐसे में वहां घाव होने से उसी जगह कैंसर का खतरा अधिक रहता है। वहीं शराब के सेवन के साथ तंबाकू का सेवन और भी खतरनाक है।
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लापरवाही सबसे ज्यादा हानिकारक : डॉ. अंशु
मेडिकल अस्पताल की ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. अंशु का कहना है कि समय पर कैंसर का पता चलने पर इलाज संभव है। लोग तंबाकू के नुकसान पता होते हुए भी इसका सेवन करते हैं। वहीं अन्य लापरवाही से भी यह बड़ी बीमारी पैदा हो जाती है। समय -समय पर जांच कराते रहना चाहिए और तंबाकू का सेवन नहीं करना चाहिए।