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नजीबाबाद से हरिद्वार फोरलेन पर वन्य जीवों के लिए बनेगा गलियारा

Fri, 03 Jun 2022 12:18 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jun 2022 12:18 AM IST
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A corridor for wildlife will be built on Najibabad to Haridwar four lane
बिजनौर में नेशनल हाईवे पर नजीबाबाद-हरिद्वार के बीच अधूरा पड़ा एक लेन का काम। - फोटो : BIJNOR
नजीबाबाद से हरिद्वार फोरलेन पर वन्य जीवों के लिए बनेगा गलियारा
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बिजनौर। नजीबाबाद से हरिद्वार जाते हैं तो सड़क पर कभी-कभी हाथी रास्ता रोक लेते हैं, लेकिन आने वाले दिनों में यह खतरा नहीं रहेगा। वन्य जीवों के विचरण के लिए फोरलेन हाईवे के नीचे से सुरक्षित गलियारा बनाया जाएगा। इसके लिए फोरलेन में छह जगहों पर अंडरपास बनाए जाने हैं। चार एलिफेंट अंडर पास बनेंगे, जबकि दो अंडरपास छोटे वन्य जीवों के लिए होंगे। इन पर 110 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
हरिद्वार से काशीपुर तक करीब दो हजार करोड़ रुपये की लागत से हाईवे को फोरलेन में तब्दील किया जाना था। नजीबाबाद से काशीपुर तक हाईवे को फोरलेन बनाया जा चुका है। जिस पर ट्रैफिक सरपट दौड़ रहा है। इस दूरी में टोल की वसूली भी होने लगी। नजीबाबाद से हरिद्वार के बीच काम अभी अधर में है। हालांकि 71 प्रतिशत फोरलेन सड़क बनाई जा चुकी है। अब इस प्रोजेक्ट में वन्य जीवों के लिए अंडरपास को भी जोड़ा गया है। हाईवे के शुरुआती प्रोजेक्ट में सिर्फ वन्य जीवों के लिए दो ही अंडरपास शामिल थे। जिनमें 290 मीटर का अंडरपास हाथियों के लिए टेढ़ी पुलिया के पास बनाया जाना था। दूसरा अंडर पास रवासन नदी के पास बनना था। फरवरी 2018 में वन विभाग ने फोरलेन का काम बंद करा दिया। वन विभाग ने अपनी जमीन की एवज में एक हजार करोड़ की डिमांड की। हालांकि अब बिना पैसे दिए ही सहमति बन गई है। बाद में वन विभाग ने पांच किलोमीटर लंबा वन्य जीवों के लिए अंडर पास बनाने के कहा। अब दोनों ही संस्थाओं में छह जगहों पर अंडरपास बनाने पर सहमति बनी है। जिनमें हाथियों की आवाजाही के लिए चार अंडरपास बनेंगे। जिनमें दो की लंबाई पांच-पांच सौ मीटर होगी। बाकी चार अंडरपास की लंबाई कम रहेगी।
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12 अप्रैल से बंद है फोरलेन का काम
नजीबाबाद से हरिद्वार के बीच हाईवे का निर्माण यूं ही लटका रहा। अब खनन सामग्री नहीं मिलने के कारण 12 अप्रैल से बंद है। हालांकि नेशनल हाईवे के अधिकारियों ने उत्तराखंड शासन के समक्ष मुद्दा उठाया है। बता दें कि उत्तराखंड मेें खनन पर रोक है। ऐसे में रेत बजरी हाईवे के निर्माण को नहीं मिल रही है। इस दूरी में 24 जनवरी को 2018 को काम शुरू किया गया था, जिसके बाद 12 फरवरी 2018 को वन विभाग ने काम बंद करा दिया था। साल 2020 आते आते ठेकेदार अपना सामान समेट कर चला गया। बाद में दूसरा ठेकेदार ढूंढा गया तो अब खनन सामग्री मिलनी बंद हो गई।
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नौ बड़े पुल बनकर हुए तैयार
46 किलोमीटर सड़क बन चुकी है, करीब 20 किलोमीटर अटकी हुई है। इस पर नौ बडे़ पुल बनकर तैयार हो चुके हैं, सिर्फ दो ही बाकी रह गए हैं। करीब 61 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बता दें कि बीच में वन विभाग भी पांच किलोमीटर लंबा अंडरपास बनाकर देने के लिए कह रहा था। लेकिन अब इस दूरी में छोटे छोटे छह अंडरपास वन्य जीवों के लिए बनाकर देने पर सहमति बन गई है।

पहले वन विभाग हाथी और अन्य वन्य जीवों के लिए पांच किलोमीटर लंबा अंडरपास बनाकर देने के लिए कह रहा था। जोकि प्रोजेक्ट में शामिल नहीं था। अब इस दूरी में छह जगहों पर एलिफेंट और एनिमल अंडरपास बनाने पर सहमति बन गई है। हाथियों के लिए पांच-पांच सौ मीटर लंबे और ऊंचाई वाले अंडरपास बनाए जाएंगे। खनन सामग्री नहीं मिलने की वजह से भी अभी काम बंद है।
- बीपी पाठक, परियोजना निदेशक एनएचएआई
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