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कालागढ़ में नजर आया गिद्धों का झुंड
Fri, 18 Jan 2019 12:24 AM IST
Deepak Sharma
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/बिजनौर
Published by: Deepak Sharma
Updated Fri, 18 Jan 2019 12:24 AM IST
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कालागढ़ में सूखास्रोत में बैठा गिद्धों का झुंड।
- फोटो : अमर उजाला
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कालागढ़ (बिजनौर) में विलुप्त हो गए गिद्ध फिर से लौट रहे हैं। इक्का दुक्का गिद्ध तो पहले भी वन क्षेत्रों में दिखाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार कालागढ़ वन प्रभाग स्थित सूखा स्रोत में गिद्धों का बड़ा झुंड दिखाई दिया है। इस झुंड में करीब 25 से 30 गिद्ध थे, जिनमें अत्यंत दुर्लभ प्रजाति सफेद गिद्ध का एक जोड़ा भी था। कार्बेट संरक्षित क्षेत्र के निदेशक राहुल ने बताया कि कार्बेट और कालागढ़ के टाइगर संरक्षित क्षेत्र में गिद्धों के घोंसले भी दिखाई दिए हैं। गिद्धों की सुरक्षा और संरक्षण पर ध्यान दिया जा रहा है।
तापमान के गिरने के साथ और चल रही शीतलहर के कारण पक्षियों के झुंड कालागढ़ में आ रहे हैं। वन विभाग अधिकारियों और ग्रामीणों को गिद्धों का यह झुंड कालागढ़ के सूखा स्रोत में बैठा दिखाई दिया है। इस झुंड के कुछ गिद्ध सूखा स्रोत के रेत में बैठे थे तो कुछ गिद्ध पेड़ों पर बैठे दिखाई दिए। इनमें सफेद गिद्ध (इजिप्शियन वल्चर) का एक जोड़ा भी दिखाई दिया है। विशेषज्ञों की माने तो यह प्रथम प्रजाति का गिद्ध है और इसे अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने संकट ग्रस्त प्राणियों की लाल सूची में शामिल किया हुआ है। स्थानीय नागरिक इनकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इससे पहले अमानगढ़ रेंज में भी गिद्ध दिखाई दिए। कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक राहुल का कहना है कि गिद्ध दूषित पर्यावरण और मवेशियों में इस्तेमाल डाइक्लोफोनिक दवा के चलते विलुप्त से हो गए थे। कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों के साथ- साथ कालागढ़ टाइगर रिजर्व के वनों में इन्हें देखा जाना इस क्षेत्र के लिए एक खास उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि यहां गिद्ध काफी समय से दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इस बार बड़े समूह में इनका नजर आना महत्वपूर्ण है।
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तापमान के गिरने के साथ और चल रही शीतलहर के कारण पक्षियों के झुंड कालागढ़ में आ रहे हैं। वन विभाग अधिकारियों और ग्रामीणों को गिद्धों का यह झुंड कालागढ़ के सूखा स्रोत में बैठा दिखाई दिया है। इस झुंड के कुछ गिद्ध सूखा स्रोत के रेत में बैठे थे तो कुछ गिद्ध पेड़ों पर बैठे दिखाई दिए। इनमें सफेद गिद्ध (इजिप्शियन वल्चर) का एक जोड़ा भी दिखाई दिया है। विशेषज्ञों की माने तो यह प्रथम प्रजाति का गिद्ध है और इसे अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ ने संकट ग्रस्त प्राणियों की लाल सूची में शामिल किया हुआ है। स्थानीय नागरिक इनकी तरफ आकर्षित हो रहे हैं। इससे पहले अमानगढ़ रेंज में भी गिद्ध दिखाई दिए। कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक राहुल का कहना है कि गिद्ध दूषित पर्यावरण और मवेशियों में इस्तेमाल डाइक्लोफोनिक दवा के चलते विलुप्त से हो गए थे। कार्बेट टाइगर रिजर्व के वनों के साथ- साथ कालागढ़ टाइगर रिजर्व के वनों में इन्हें देखा जाना इस क्षेत्र के लिए एक खास उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि यहां गिद्ध काफी समय से दिखाई दे रहे हैं, लेकिन इस बार बड़े समूह में इनका नजर आना महत्वपूर्ण है।
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