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Bijnor News: खूंटे से बंधी रस्सी और आस्था से बांधा 40 करोड़ का तटबंध

Wed, 26 Aug 2026 01:40 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 26 Aug 2026 01:40 AM IST
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A 40 crore embankment was built with a rope tied to a peg and faith.
खूंटों के सहारे 40 करोड़ का तटबंध...गंगा का जलस्तर बढ़ने से बैराज से रावली के बीच करीब 40 करोड़
बिजनौर। करीब 40 करोड़ रुपये से बनाए गए एक किलोमीटर लंबे तटबंट को गंगा की लहरों से बचाने के लिए सिंचाई विभाग प्रार्थना और जुगाड़ का सहारा ले रहा है। परक्यूपाइन स्टड पानी के बहाव में बह न जाएं, इसलिए उन्हें खूंटे में रस्सी बांधकर रोका जा रहा है। यही नहीं सिंचाई विभाग के अधिकारी सुबह-शाम तटबंध पर पूजा करके मां गंगा के रौद्र रूप को शांत होने और तटबंध की रक्षा की मनुहार भी कर रहे हैं।
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बिजनौर बैराज के 11 किलोमीटर तटबंध का निर्माण वर्ष 1984 में किया गया था। पिछले साल गंगा की धारा से करीब एक किमी हिस्सा टूटने के कगार पर पहुंच चुका था। इस बार बरसात से पहले करीब 1060 मीटर हिस्से को आर्टिकुलेटिंग कंक्रीट ब्लॉक मैट्रेस (एसीबीएम) तकनीक से मजबूत किया गया। इस सुरक्षा कवच की खासियत बताई गई थी कि पानी नीचे से कटान करे तो भी संरचना जमीन की सतह के साथ ढलते हुए तटबंध की रक्षा करेगी।
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अब गंगा ने जैसे ही अपना रास्ता बदला, करोड़ों रुपयों की मजबूती की परीक्षा शुरू हो गई। गंगा तटबंध से करीब 50 मीटर के दायरे में बह रही है। तटबंध के ऊपर बनाए गए आरसीसी प्लेटफार्म में बड़ी दरारें नजर आ रही हैं, जिसे छिपाने के लिए सीमेंट लगाया जा रहा है। पानी की टक्कर से 50 मीटर के दायरे में दो पैनल क्षतिग्रस्त होने की बात विभाग बता रहा है। उस स्थान पर 100 से 150 मजदूर तटबंध बचाने में लगाए गए हैं। मिट्टी के कट्टे गंगा में डाले जा रहे हैं। बल्ला क्रेट लगाए जा रहे हैं और परक्यूपाइन स्टड भी नदी में उतारे जा रहे हैं, ताकि गंगा की धारा तटबंध से सीधे न टकराए।
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पिछले साल घटते पानी ने ही काट दिया था तटबंध

वर्ष 2025 में रावली गंगा तटबंध पर अगस्त माह के अंतिम पखवाड़े में कटान शुरू हो गया था। गंगा की धारा तटबंध के पास आ गई। जैसे-जैसे जलस्तर घटा, तटबंध की मिट्टी नीचे से निकलती गई। 500 से ज्यादा मजदूर, दस से ज्यादा जेसीबी और 20 से ज्यादा डंपर इसे बचाने के लिए लगाए गए। 15 दिन बचाने का प्रयास चला लेकिन सभी प्रयास पानी में बह गए। अंत में 08 सितंबर 2028 की रात हालात 12 गांवों को खाली करने की चेतावनी दी गई। इसके बाद गंगा की धारा का रुख बदला और तटबंध बच गया। इस साल इस हिस्से की मरम्मत कराई गई थी।


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तटबंध पूरी तरह सुरक्षित : अधिशासी अभियंता

तटबंध पूरी तरह से सुरक्षित है। जहां धारा टकरा रही थी, वहां नीचे से मिट्टी निकल गई। इससे एसीबीएम लॉन्च हो गया है। अब वह दीवार का काम कर रहा है। वहां गंगा की धारा ज्यादा नुकसान न करे, इसलिए एहतियात के तौर पर परक्यूपाइन स्टड लगाए जा रहे हैं।

- करण पाल सिंह, अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग
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