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चुनौतियों के चक्रवात में चलेगा उपचुनाव
Bijnor
Updated Sat, 23 Aug 2014 05:30 AM IST
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बिजनौर। विधान सभा के उपचुनाव का शंखनाद हो गया है। राजनीतिक दल हो या फिर प्रशासन सभी के लिए यह चुनाव चुनौतियों के चक्रवात से कम नहीं है। राजनीतिक दलों के लिए जहां वर्चस्व को बचाने की चुनौती है तो वहीं प्रशासन के लिए लड़खड़ाती फिजा को संभालकर शांति कायम रखने की चुनौती है।
सूबे में बिजनौर सहित 12 विधान सभा क्षेत्रों में उप चुनाव हो रहा है। बुधवार से अधिसूचना जारी हो गई है। 13 सितंबर को चुनाव होना है। भाजपा के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। वजह साफ है, इन सीटों पर भाजपा ही काबिज थी। भाजपा विधायक सांसद बने और इनके इस्तीफे के बाद ही उप चुनाव हो रहा है। लोकसभा चुनाव में जबरदस्त जीत के बाद भाजपा का लक्ष्य उत्तर प्रदेश है। ऐसे में लोकसभा चुनाव के बाद विधान सभा का उप चुनाव भाजपा के वर्चस्व का पैमाना माना जा रहा है। भाजपा भी बिजनौर, कैराना, ठाकुरद्वारा सहित सभी सीटों पर उपचुनाव में हर कीमत पर जीत हासिल करने की रणनीति बना रही है। उत्तराखंड में हुए उप चुनाव में मुंह की खाने के बाद पार्टी हाईकमान ने संगठन के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं से उप चुनाव को चुनौती के रूप में लेने के लिए कहा है। वेस्ट की धूरी गन्ने की फसल है।
बसपा इस चुनावी मैदान से बाहर है। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद रालोद के लिए जाट मुस्लिमों को एक मंच पर लाना बड़ी चुनौती है। लोकसभा चुनाव में जाटों को आरक्षण मिलने के बाद भी जाट मतदाताओं ने हैंडपंप का पानी नहीं पिया और खूब कमल खिलाया। ऐसे में रालोद के लिए अपने मूलवोट बैंक को लेकर भी दुविधा बनी हुई है। सत्तारूढ़ सपा के लिए भी चुनौतियां कम नहीं है। बिजनौर सीट पर सपा आज तक भी अपना कब्जा नहीं जमा पाई है। सूत्रों के मुताबिक इस बार सपा ने उप चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है। हर सीट पर कई कई मंत्रियों को चुनाव प्रचार में लगाने की तैयारी की जा रही है। सपा के सत्तारूढ़ होने के कारण उसकी चुनौती अन्य दलों के मुकाबले ज्यादा है। बिजली को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। किसानों के गन्ने का बकाया पेमेंट नहीं किया गया है।
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प्रशासन के लिए भी ये चुनाव चुनौतीपूर्ण है। आसपास के जिलों की फिजा लड़खड़ाई हुई है। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर व कांठ के बवाल के बाद स्थिति और भी गंभीर मानी जा रही है। बिजनौर जिले में भी कभी मूर्ति तोड़ने तो कभी लाउड स्पीकर उतारने व विवाद स्थलों पर निर्माण कार्य कराने को लेकर विवाद हो चुके हैं। उप चुनाव निश्चित इलाकों में ही होना है। ऐसे में सभी असमाजिक तत्वों की नजर उप चुनाव पर है। हालांकि प्रशासन कानून व्यवस्था के लिए पूरी रणनीति तैयार कर रहा है।
डीएम भूपेंद्र एस चौधरी का कहना है कि शरारती तत्वों से निपटने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। अगर चुनाव में कोई भी गड़बड़ी करने का प्रयास करता है तो उसके साथ सख्ती बरती जाएगी। चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाएगा।
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सूबे में बिजनौर सहित 12 विधान सभा क्षेत्रों में उप चुनाव हो रहा है। बुधवार से अधिसूचना जारी हो गई है। 13 सितंबर को चुनाव होना है। भाजपा के लिए यह चुनाव बेहद अहम माना जा रहा है। वजह साफ है, इन सीटों पर भाजपा ही काबिज थी। भाजपा विधायक सांसद बने और इनके इस्तीफे के बाद ही उप चुनाव हो रहा है। लोकसभा चुनाव में जबरदस्त जीत के बाद भाजपा का लक्ष्य उत्तर प्रदेश है। ऐसे में लोकसभा चुनाव के बाद विधान सभा का उप चुनाव भाजपा के वर्चस्व का पैमाना माना जा रहा है। भाजपा भी बिजनौर, कैराना, ठाकुरद्वारा सहित सभी सीटों पर उपचुनाव में हर कीमत पर जीत हासिल करने की रणनीति बना रही है। उत्तराखंड में हुए उप चुनाव में मुंह की खाने के बाद पार्टी हाईकमान ने संगठन के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं से उप चुनाव को चुनौती के रूप में लेने के लिए कहा है। वेस्ट की धूरी गन्ने की फसल है।
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बसपा इस चुनावी मैदान से बाहर है। मुजफ्फरनगर दंगे के बाद रालोद के लिए जाट मुस्लिमों को एक मंच पर लाना बड़ी चुनौती है। लोकसभा चुनाव में जाटों को आरक्षण मिलने के बाद भी जाट मतदाताओं ने हैंडपंप का पानी नहीं पिया और खूब कमल खिलाया। ऐसे में रालोद के लिए अपने मूलवोट बैंक को लेकर भी दुविधा बनी हुई है। सत्तारूढ़ सपा के लिए भी चुनौतियां कम नहीं है। बिजनौर सीट पर सपा आज तक भी अपना कब्जा नहीं जमा पाई है। सूत्रों के मुताबिक इस बार सपा ने उप चुनाव में पूरी ताकत झोंक दी है। हर सीट पर कई कई मंत्रियों को चुनाव प्रचार में लगाने की तैयारी की जा रही है। सपा के सत्तारूढ़ होने के कारण उसकी चुनौती अन्य दलों के मुकाबले ज्यादा है। बिजली को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। किसानों के गन्ने का बकाया पेमेंट नहीं किया गया है।
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प्रशासन के लिए भी ये चुनाव चुनौतीपूर्ण है। आसपास के जिलों की फिजा लड़खड़ाई हुई है। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर व कांठ के बवाल के बाद स्थिति और भी गंभीर मानी जा रही है। बिजनौर जिले में भी कभी मूर्ति तोड़ने तो कभी लाउड स्पीकर उतारने व विवाद स्थलों पर निर्माण कार्य कराने को लेकर विवाद हो चुके हैं। उप चुनाव निश्चित इलाकों में ही होना है। ऐसे में सभी असमाजिक तत्वों की नजर उप चुनाव पर है। हालांकि प्रशासन कानून व्यवस्था के लिए पूरी रणनीति तैयार कर रहा है।
डीएम भूपेंद्र एस चौधरी का कहना है कि शरारती तत्वों से निपटने के लिए प्रशासन ने पूरी तैयारी कर ली है। अगर चुनाव में कोई भी गड़बड़ी करने का प्रयास करता है तो उसके साथ सख्ती बरती जाएगी। चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाएगा।