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एतिहासिक इमारतों का होगा जीर्णोद्धार
Bijnor
Updated Sat, 23 Aug 2014 05:30 AM IST
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नजीबाबाद। जर्जर पत्थरगढ़ किले को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी पुरातत्व विभाग ने ली है। आगरा एवं मेरठ से आए अधिकारियों ने पत्थरगढ़ का किला, नवाब नजीबुद्दौला का मकबरा और नवाब के महल के दरवाजे का निरीक्षण कर जीर्णोद्धार की योजना तैयार की है।
पुरातत्व विभाग आगरा के सुप्रिंटेंडेंट आर्कियोलोजिस्ट एनके पाठक, असिस्टेंट सुप्रिंटेंडेंट आर्कियोलोजिस्ट इंजीनियर ओपी माहुर, सीनियर कंजरवेशन असिस्टेंट मुनज्जर अली, मेरठ के कंजरवेशन असिस्टेंट अंकित नामदेव ने गांव महावतपुर स्थित नवाब नजीबुद्दौला के किले (पत्थरगढ़ के किले) का निरीक्षण किया। टीम ने 18वीं सदी में निर्मित किले की जर्जर स्थिति पर चिंता जताई। एनके पाठक ने किले की ध्वस्त होती दीवारों एवं जर्जर हो रहे भवन को बचाने के लिए कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया। प्रथम चरण में किले की दीवारों पर उग रहे पेड़-पौधों को निकालकर ऐतिहासिक दीवारों को संरक्षित किया जाएगा। टीम ने कलात्मक कारीगरी से बने किले को मूल स्थिति में रखने के लिए मरम्मत की योजना भी तैयार करने पर विचार किया। पुरातत्व विभाग ने किले से जुड़ी पर्यटन संभावनाओं पर भी विचार करते हुए मंडल स्तर के अधिकारियों को रिपोर्ट भेजने की योजना बनाई है।
इससे पूर्व टीम ने नवाब नजीबुद्दौला के मकबरे का निरीक्षण किया। एएसआई एनके पाठक ने क्षेत्रीय लोगों से बात की। उन्होंने मकबरा परिसर में नवाब नजीबुद्दौला के वंशजों की कब्रों की जर्जर हालत के प्रति गंभीर नहीं होने और जीर्णोद्धार के नाम पर ऐतिहासिक इमारत का प्राचीन स्वरूप बदलने, दीवारों पर प्लास्टिक पेंट करने, फर्श पर पत्थर बिछाने, प्राचीन नक्काशी को नष्ट करने, अनाधिकृत रूप से मकबरा परिसर में निर्माण कराने पर नाराजगी जताई। टीम प्रतिनिधियों ने कहा कि भविष्य में पुरातत्व विभाग की अनुमति बगैर कोई भी ऐतिहासिक इमारत में एक कील भी नहीं ठोंकेगा। उन्होंने किसी भी कार्य के लिए पुरातत्व विभाग से संपर्क करने की सलाह दी। टीम ने मकबरा के बाहर बनी मार्केट निर्माण को अवैध बताया। इस दौरान मुतावल्ली महबूब अहमद, शाहिद सिद्दीकी, नईम टाटा, मोहम्मद आजाद आदि रहे।
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प्राचीन इमारतों के नजदीक नहीं हो सकता निर्माण
नजीबाबाद। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों के नजदीक निर्माण अवैधानिक है। उन्होंने बताया कि इन इमारतों से 100 मीटर की दूरी तक निर्माण नहीं किया जा सकता, 300 मीटर की दूरी तक निर्माण के लिए पुरातत्व विभाग से एनओसी लेनी आवश्यक है।
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पुरातत्व विभाग आगरा के सुप्रिंटेंडेंट आर्कियोलोजिस्ट एनके पाठक, असिस्टेंट सुप्रिंटेंडेंट आर्कियोलोजिस्ट इंजीनियर ओपी माहुर, सीनियर कंजरवेशन असिस्टेंट मुनज्जर अली, मेरठ के कंजरवेशन असिस्टेंट अंकित नामदेव ने गांव महावतपुर स्थित नवाब नजीबुद्दौला के किले (पत्थरगढ़ के किले) का निरीक्षण किया। टीम ने 18वीं सदी में निर्मित किले की जर्जर स्थिति पर चिंता जताई। एनके पाठक ने किले की ध्वस्त होती दीवारों एवं जर्जर हो रहे भवन को बचाने के लिए कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया। प्रथम चरण में किले की दीवारों पर उग रहे पेड़-पौधों को निकालकर ऐतिहासिक दीवारों को संरक्षित किया जाएगा। टीम ने कलात्मक कारीगरी से बने किले को मूल स्थिति में रखने के लिए मरम्मत की योजना भी तैयार करने पर विचार किया। पुरातत्व विभाग ने किले से जुड़ी पर्यटन संभावनाओं पर भी विचार करते हुए मंडल स्तर के अधिकारियों को रिपोर्ट भेजने की योजना बनाई है।
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इससे पूर्व टीम ने नवाब नजीबुद्दौला के मकबरे का निरीक्षण किया। एएसआई एनके पाठक ने क्षेत्रीय लोगों से बात की। उन्होंने मकबरा परिसर में नवाब नजीबुद्दौला के वंशजों की कब्रों की जर्जर हालत के प्रति गंभीर नहीं होने और जीर्णोद्धार के नाम पर ऐतिहासिक इमारत का प्राचीन स्वरूप बदलने, दीवारों पर प्लास्टिक पेंट करने, फर्श पर पत्थर बिछाने, प्राचीन नक्काशी को नष्ट करने, अनाधिकृत रूप से मकबरा परिसर में निर्माण कराने पर नाराजगी जताई। टीम प्रतिनिधियों ने कहा कि भविष्य में पुरातत्व विभाग की अनुमति बगैर कोई भी ऐतिहासिक इमारत में एक कील भी नहीं ठोंकेगा। उन्होंने किसी भी कार्य के लिए पुरातत्व विभाग से संपर्क करने की सलाह दी। टीम ने मकबरा के बाहर बनी मार्केट निर्माण को अवैध बताया। इस दौरान मुतावल्ली महबूब अहमद, शाहिद सिद्दीकी, नईम टाटा, मोहम्मद आजाद आदि रहे।
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प्राचीन इमारतों के नजदीक नहीं हो सकता निर्माण
नजीबाबाद। पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने कहा कि ऐतिहासिक इमारतों के नजदीक निर्माण अवैधानिक है। उन्होंने बताया कि इन इमारतों से 100 मीटर की दूरी तक निर्माण नहीं किया जा सकता, 300 मीटर की दूरी तक निर्माण के लिए पुरातत्व विभाग से एनओसी लेनी आवश्यक है।