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पंचायतों में उप स्वास्थ्य केंद्र और बारातघर बदहाल
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पंचायतों में उप स्वास्थ्य केंद्र और बारातघर बदहाल
मंडावली/नजीबाबाद। ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये की लागत से बने अधिकांश उप स्वास्थ्य केंद्र और बारातघर देखभाल के अभाव में बदहाल हैं। ग्रामीणों को उप स्वास्थ्य केंद्रों से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और बारातघरों से शहरी तर्ज पर बेहतर समारोह व्यवस्था मुहैया कराने की शासन ने पहल की थी, लेकिन ग्रामीणों ने केंद्रों और बारातघरों में उपले, लकड़ी और पशु बांध कर योजना को ग्रहण लगा दिया।
विकास खंड नजीबाबाद की पंचायतों में सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर उप स्वास्थ्य केंद्र और बारातघर बनाकर पंचायतों के सुपुर्द किया। शासन की मंशा थी कि ग्रामीणों को शहर की तर्ज पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और शादी-जन्मोत्सव के लिए बेहतर समारोह व्यवस्था दी जाए। ग्रामीणों ने करण सिंह, महेश अनिल, जयप्रकाश, बलवीर, ओमप्रकाश, जोनी, मुकेश अग्रवाल, रजत, नितिन, अजीत, इमरान, मुन्ने, इकबाल, रईस अहमद, मुजाहिद का कहना है कि सरकार ने उप स्वास्थ्य केंद्र बना तो दिए लेकिन उसमें काफी समय तक स्वास्थ्य कर्मियों की व्यवस्था न होने से केंद्र शोपीस बने हैं। वहीं बारातघरों पर ग्राम प्रधानों को कब्जा रहा है उन्हें आम ग्रामीणों को इस्तेमाल के लिए नहीं दिया गया जिससे वे देखभाल के अभाव में बदहाल हो गए।
बदहाली के लिए ग्रामीण खुद जिम्मेदार
ग्राम पंचायत शेखुपुरा आलम में उप स्वास्थ्य केंद्र और बारातघर बेहद बदहाल हैं। ग्रामीणों ने इसमें उपले और लकड़ी रखकर अतिक्रमण कर लिया है। ग्राम प्रधान आकांक्षा देवी का कहना है कि केंद्र और बारातघर बदहाली की कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायती की है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। मोहनपुर के ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह का कहना है कि उप स्वास्थ्य केंद्र और बारातघर पर गंदगी फैलाने के लिए कई बार ग्रामीणों चेतावनी दी। लेकिन कार्रवाई न होने से ग्रामीण परिसर में पशु छोड़ देते हैं। ग्राम पंचायत प्रेमपुुरी में बना बारातघर बेहद खस्ताहाल है। बरातघर में एक भी समारोह न होने से कुछ ग्रामीणों ने उसमें गंदगी फैला दी। ग्राम प्रधान सुनीता देवी का कहना है कि उन्होंने कई बार सफाई कर्मियों से बरातघर की सफाई कराई लेकिन कुछ लोगों बारातघर को गंदा करने से नहीं मान रहे हैं। ग्राम पंचायत करौली के ग्राम प्रधान रोहिताश सिंह का कहना है कि उनके यहां उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण काफी समय पहले हुआ था। उप स्वास्थ्य केंद्र काफी पुराना होने तथा रखरखाव का पैसा न आने से बदहाल है। कुछ ग्रामीणों केंद्र के परिसर में पशु चरने के लिए छोड़ देते हैं।
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मंडावली/नजीबाबाद। ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये की लागत से बने अधिकांश उप स्वास्थ्य केंद्र और बारातघर देखभाल के अभाव में बदहाल हैं। ग्रामीणों को उप स्वास्थ्य केंद्रों से बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और बारातघरों से शहरी तर्ज पर बेहतर समारोह व्यवस्था मुहैया कराने की शासन ने पहल की थी, लेकिन ग्रामीणों ने केंद्रों और बारातघरों में उपले, लकड़ी और पशु बांध कर योजना को ग्रहण लगा दिया।
विकास खंड नजीबाबाद की पंचायतों में सरकार ने लाखों रुपये खर्च कर उप स्वास्थ्य केंद्र और बारातघर बनाकर पंचायतों के सुपुर्द किया। शासन की मंशा थी कि ग्रामीणों को शहर की तर्ज पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और शादी-जन्मोत्सव के लिए बेहतर समारोह व्यवस्था दी जाए। ग्रामीणों ने करण सिंह, महेश अनिल, जयप्रकाश, बलवीर, ओमप्रकाश, जोनी, मुकेश अग्रवाल, रजत, नितिन, अजीत, इमरान, मुन्ने, इकबाल, रईस अहमद, मुजाहिद का कहना है कि सरकार ने उप स्वास्थ्य केंद्र बना तो दिए लेकिन उसमें काफी समय तक स्वास्थ्य कर्मियों की व्यवस्था न होने से केंद्र शोपीस बने हैं। वहीं बारातघरों पर ग्राम प्रधानों को कब्जा रहा है उन्हें आम ग्रामीणों को इस्तेमाल के लिए नहीं दिया गया जिससे वे देखभाल के अभाव में बदहाल हो गए।
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बदहाली के लिए ग्रामीण खुद जिम्मेदार
ग्राम पंचायत शेखुपुरा आलम में उप स्वास्थ्य केंद्र और बारातघर बेहद बदहाल हैं। ग्रामीणों ने इसमें उपले और लकड़ी रखकर अतिक्रमण कर लिया है। ग्राम प्रधान आकांक्षा देवी का कहना है कि केंद्र और बारातघर बदहाली की कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायती की है, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। मोहनपुर के ग्राम प्रधान सुरेंद्र सिंह का कहना है कि उप स्वास्थ्य केंद्र और बारातघर पर गंदगी फैलाने के लिए कई बार ग्रामीणों चेतावनी दी। लेकिन कार्रवाई न होने से ग्रामीण परिसर में पशु छोड़ देते हैं। ग्राम पंचायत प्रेमपुुरी में बना बारातघर बेहद खस्ताहाल है। बरातघर में एक भी समारोह न होने से कुछ ग्रामीणों ने उसमें गंदगी फैला दी। ग्राम प्रधान सुनीता देवी का कहना है कि उन्होंने कई बार सफाई कर्मियों से बरातघर की सफाई कराई लेकिन कुछ लोगों बारातघर को गंदा करने से नहीं मान रहे हैं। ग्राम पंचायत करौली के ग्राम प्रधान रोहिताश सिंह का कहना है कि उनके यहां उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण काफी समय पहले हुआ था। उप स्वास्थ्य केंद्र काफी पुराना होने तथा रखरखाव का पैसा न आने से बदहाल है। कुछ ग्रामीणों केंद्र के परिसर में पशु चरने के लिए छोड़ देते हैं।
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