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गंगा पार से नाव से लाई जा रही पलेज
Updated Fri, 13 Apr 2018 12:08 AM IST
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नांगलसोती। पलेजिया किसान जान हथेली पर रखकर गंगा पार कर रहे हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने पर जान जोखिम में डालकर बिना नाविक ही गंगा पार कर रोजाना दर्जनों किसान खेतों पर जा रहे हैं।
नांगलसोती सहित शहजादपुर, जीतपुर, खानपुर, सौफतपुर, ढोलापुरी, तिसोतरा, गौसपुर आदि गांवों के किसान गंगा खादर क्षेत्र में पलेज की खेती करते हैं। अधिकांश किसानों ने गंगा पार पलेज की फसल लगा रखी है। पलेज में कार्य करने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में किसान और मजदूर गंगा पार करते हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने पर सौफतपुर गंगा घट्टी और नांगल क्षेत्र में लगी नाव से अपने खेतों पर पहुंचते हैं। लेकिन नाव पर नाविक न होने से ऐसे लोग खुद ही नाव चलाकर गंगा पार कर रहे हैं।
देवेंद्र सिंह, हरपाल सिंह, लोकेंद्र सिंह का कहना है कि गंगा में पानी अधिक होने पर उन्हें मजबूरन नाव से खेतों पर जाना होता है। किसान बताते हैं कि उनकी आजीविका पलेज पर ही निर्भर होती है। रोजी-रोटी के लिए उन्हें जोखिम उठाने पर मजबूर होना पड़ता है। ब्रजपाल, सौपाल, शिवध्यान का कहना है गंगा पार से उनकी फसल उत्तर प्रदेश सीमा में लाने के एवज में नाव वालों से उनका डेढ़ लाख रुपये में अनुबंध हुआ है। फिलहाल पलेज की फसल नाममात्र को ही उपलब्ध हो रही है। और नाविक न होने से वे स्वयं ही नाव चलाकर खेतों से फसल ला रहे हैं। उधर, नांगल थानाध्यक्ष आरके सिंह ने स्थिति से अनभिज्ञता व्यक्त की। उन्होंने क्षेत्र में भ्रमण कर जायजा लेने की बात कही।
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नांगलसोती सहित शहजादपुर, जीतपुर, खानपुर, सौफतपुर, ढोलापुरी, तिसोतरा, गौसपुर आदि गांवों के किसान गंगा खादर क्षेत्र में पलेज की खेती करते हैं। अधिकांश किसानों ने गंगा पार पलेज की फसल लगा रखी है। पलेज में कार्य करने के लिए रोजाना बड़ी संख्या में किसान और मजदूर गंगा पार करते हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने पर सौफतपुर गंगा घट्टी और नांगल क्षेत्र में लगी नाव से अपने खेतों पर पहुंचते हैं। लेकिन नाव पर नाविक न होने से ऐसे लोग खुद ही नाव चलाकर गंगा पार कर रहे हैं।
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देवेंद्र सिंह, हरपाल सिंह, लोकेंद्र सिंह का कहना है कि गंगा में पानी अधिक होने पर उन्हें मजबूरन नाव से खेतों पर जाना होता है। किसान बताते हैं कि उनकी आजीविका पलेज पर ही निर्भर होती है। रोजी-रोटी के लिए उन्हें जोखिम उठाने पर मजबूर होना पड़ता है। ब्रजपाल, सौपाल, शिवध्यान का कहना है गंगा पार से उनकी फसल उत्तर प्रदेश सीमा में लाने के एवज में नाव वालों से उनका डेढ़ लाख रुपये में अनुबंध हुआ है। फिलहाल पलेज की फसल नाममात्र को ही उपलब्ध हो रही है। और नाविक न होने से वे स्वयं ही नाव चलाकर खेतों से फसल ला रहे हैं। उधर, नांगल थानाध्यक्ष आरके सिंह ने स्थिति से अनभिज्ञता व्यक्त की। उन्होंने क्षेत्र में भ्रमण कर जायजा लेने की बात कही।
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