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बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते 79 प्रतिशत अभिभावक
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बच्चों को स्कूल नहीं भेजना चाहते 79 प्रतिशत अभिभावक
बिजनौर। शासन ने यूपी बोर्ड के विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों से बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए लिखित अनुमति मांगी है। इसमें जिले के 79 प्रतिशत अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। अपने बच्चों को विद्यालय भेजने की अनुमति देने वालों में अधिकांश अभिभावक ग्रामीण क्षेत्रों के हैं।
विद्यालय कोरोना के कारण करीब सात माह से बंद हैं। शासन ने लाकडाउन अवधि में हुए छात्रों के पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए ऑनलाइन पढ़ाई चला रखी है। जिले के 387 विद्यालयों में सवा लाख से अधिक विद्यार्थियों में से करीब 60 हजार ही ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़े हैं। करीब 75 हजार आनलाइन पढ़ाई से वंचित हैं। अनलॉक -4 में विद्यालयों को खोले जाने का प्रस्ताव है। शासन ने तय शर्तों के साथ विद्यालय विद्यार्थियों को मार्ग दर्शन के लिए खोलने से पहले अभिभावकों से बच्चों को स्कूल भेजने पर सहमति मांगी है। इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से नौ बिंदु का प्रारूप विद्यालयों को भेजा गया था। विद्यालयों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए जागरूक करने, अभिभावकों की संख्या तथा स्वैच्छिक आधार पर बच्चो को स्कूल भेजने की लिखित अनुमति देने वालों की संख्या का विवरण अंकित करना था। जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार के अनुसार 387 विद्यालयों में 1,34,499 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनके 72,356 अभिभावकों को जागरूक किया गया है। अभिभावकों को विद्यालयों में साफ सफाई, सैनिटाइजेशन आदि की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि 28,569 अभिभावकों ने बच्चों को स्वैच्छिक आधार पर मार्गदर्शन लेने हेतु स्कूल भेजने की लिखित अनुमति दी है। अभी अनुमति आ रही है। शासन को विद्यालय खोलने का निर्णय करना है।
कोरोना से बचकर ही जीवन चलना है
बिजनौर। जिले में मात्र 21 प्रतिशत अभिभावकों ने बच्चों को मार्ग दर्शन के लिए विद्यालय भेजने की लिखित अनुमति दी है। इनमें 60 प्रतिशत से अधिक अभिभावक ग्रामीण बताए गए हैं। जिले में 282 वित्तविहीन विद्यालय हैं। अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र में संचालित हैं। पावटी क्षेत्र के बलराम सिंह, नूरपुर गोहावर के निर्मल ने बताया कि ग्रामीण बच्चे स्कूल जाकर पढ़ सकते हैं। कोरोना से बचाव रखकर ही जीवन चलना है। बड़े बच्चों को सावधानी के साथ स्कूल भेजने में नुकसान नहीं है। वित्तविहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्य हरवीर सिंह, जितेंद्र सिंह, अजब सिंह शासन के निर्णय की सराहना की है।
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बिजनौर। शासन ने यूपी बोर्ड के विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावकों से बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए लिखित अनुमति मांगी है। इसमें जिले के 79 प्रतिशत अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने के लिए तैयार नहीं हैं। अपने बच्चों को विद्यालय भेजने की अनुमति देने वालों में अधिकांश अभिभावक ग्रामीण क्षेत्रों के हैं।
विद्यालय कोरोना के कारण करीब सात माह से बंद हैं। शासन ने लाकडाउन अवधि में हुए छात्रों के पढ़ाई के नुकसान की भरपाई के लिए ऑनलाइन पढ़ाई चला रखी है। जिले के 387 विद्यालयों में सवा लाख से अधिक विद्यार्थियों में से करीब 60 हजार ही ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़े हैं। करीब 75 हजार आनलाइन पढ़ाई से वंचित हैं। अनलॉक -4 में विद्यालयों को खोले जाने का प्रस्ताव है। शासन ने तय शर्तों के साथ विद्यालय विद्यार्थियों को मार्ग दर्शन के लिए खोलने से पहले अभिभावकों से बच्चों को स्कूल भेजने पर सहमति मांगी है। इसके लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से नौ बिंदु का प्रारूप विद्यालयों को भेजा गया था। विद्यालयों को बच्चों को स्कूल भेजने के लिए जागरूक करने, अभिभावकों की संख्या तथा स्वैच्छिक आधार पर बच्चो को स्कूल भेजने की लिखित अनुमति देने वालों की संख्या का विवरण अंकित करना था। जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार के अनुसार 387 विद्यालयों में 1,34,499 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इनके 72,356 अभिभावकों को जागरूक किया गया है। अभिभावकों को विद्यालयों में साफ सफाई, सैनिटाइजेशन आदि की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि 28,569 अभिभावकों ने बच्चों को स्वैच्छिक आधार पर मार्गदर्शन लेने हेतु स्कूल भेजने की लिखित अनुमति दी है। अभी अनुमति आ रही है। शासन को विद्यालय खोलने का निर्णय करना है।
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कोरोना से बचकर ही जीवन चलना है
बिजनौर। जिले में मात्र 21 प्रतिशत अभिभावकों ने बच्चों को मार्ग दर्शन के लिए विद्यालय भेजने की लिखित अनुमति दी है। इनमें 60 प्रतिशत से अधिक अभिभावक ग्रामीण बताए गए हैं। जिले में 282 वित्तविहीन विद्यालय हैं। अधिकांश ग्रामीण क्षेत्र में संचालित हैं। पावटी क्षेत्र के बलराम सिंह, नूरपुर गोहावर के निर्मल ने बताया कि ग्रामीण बच्चे स्कूल जाकर पढ़ सकते हैं। कोरोना से बचाव रखकर ही जीवन चलना है। बड़े बच्चों को सावधानी के साथ स्कूल भेजने में नुकसान नहीं है। वित्तविहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्य हरवीर सिंह, जितेंद्र सिंह, अजब सिंह शासन के निर्णय की सराहना की है।
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