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ठंड व पाले का असर गेंहू की लेट प्रजाति पर
Updated Fri, 12 Jan 2018 12:25 AM IST
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गेहूं की पिछेती प्रजाति के लिए अच्छी नहीं सर्दी
बिजनौर।
जिले में कोहरे का प्रकोप जारी है, ठंड का असर देर से गेहूं की पिछेती प्रजातियों की पैदावार पर पड़ेगा। गेहूं की फसल में किसी भी बीमारी का प्रकोप नहीं होना किसानों के लिए राहत देने वाली बात है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक अभी मौसम का तापमान और गिर सकता है। किसान गेहूं की फसल को ठंड से बचाने के लिए कृषि विभाग द्वारा दिए गए सुझावों पर अमल करें।
जिले में बृहस्पतिवार को भी घना कोहरा छाया रहा। हालांकि करीब 12 बजे ही धूप निकलने से ठंड से काफी राहत मिली। तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस तक रहा। परियोजना निदेशक आत्मा योगेंद्र पाल योगी के अनुसार पिछले दस दिन से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। तापमान सात डिग्री सेल्सियस से नीचे जाने पर पाला और ठंड गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक है। इसका असर पैदावार पर पड़ेगा। गेहूं की बुवाई का समय 25 दिसंबर तक होता है। जिले में गेहूं की पिछेती प्रजाति पांच, छह जनवरी तक बोई गई हैं। पिछेती प्रजाति के गेहूं की फसल पर पाले और ठंड का असर पड़ने से पैदावार कम होगी। जिस गेहूं की जमाव अभी पूरी तरह नहीं हुआ है, उस गेहूं की बढ़ोत्तरी पर भी ठंड और पाले का असर पड़ रहा है। क्योंकि गेहूं सिराओ में पानी की मात्रा होनी जरूरी है। किसानों को सलाह दी जाती है कि पिछेती प्रजाति के गेहूं की फसल में नमी रखें। पाले से बचाने के लिए खेत में पानी भर दें। किसानों को गेहूं की फसल को पाले से बचाने की जानकारी देने के लिए कृषि विभाग की ब्लाक स्तरीय टीम गांव-गांव संपर्क कर रही है।
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बिजनौर।
जिले में कोहरे का प्रकोप जारी है, ठंड का असर देर से गेहूं की पिछेती प्रजातियों की पैदावार पर पड़ेगा। गेहूं की फसल में किसी भी बीमारी का प्रकोप नहीं होना किसानों के लिए राहत देने वाली बात है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक अभी मौसम का तापमान और गिर सकता है। किसान गेहूं की फसल को ठंड से बचाने के लिए कृषि विभाग द्वारा दिए गए सुझावों पर अमल करें।
जिले में बृहस्पतिवार को भी घना कोहरा छाया रहा। हालांकि करीब 12 बजे ही धूप निकलने से ठंड से काफी राहत मिली। तापमान 4.5 डिग्री सेल्सियस तक रहा। परियोजना निदेशक आत्मा योगेंद्र पाल योगी के अनुसार पिछले दस दिन से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। तापमान सात डिग्री सेल्सियस से नीचे जाने पर पाला और ठंड गेहूं की फसल के लिए नुकसानदायक है। इसका असर पैदावार पर पड़ेगा। गेहूं की बुवाई का समय 25 दिसंबर तक होता है। जिले में गेहूं की पिछेती प्रजाति पांच, छह जनवरी तक बोई गई हैं। पिछेती प्रजाति के गेहूं की फसल पर पाले और ठंड का असर पड़ने से पैदावार कम होगी। जिस गेहूं की जमाव अभी पूरी तरह नहीं हुआ है, उस गेहूं की बढ़ोत्तरी पर भी ठंड और पाले का असर पड़ रहा है। क्योंकि गेहूं सिराओ में पानी की मात्रा होनी जरूरी है। किसानों को सलाह दी जाती है कि पिछेती प्रजाति के गेहूं की फसल में नमी रखें। पाले से बचाने के लिए खेत में पानी भर दें। किसानों को गेहूं की फसल को पाले से बचाने की जानकारी देने के लिए कृषि विभाग की ब्लाक स्तरीय टीम गांव-गांव संपर्क कर रही है।
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