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गन्ने की खेती छोड़ जैविक सब्जियों से कमाया मोटा मुनाफा
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गन्ने की खेती छोड़ जैविक सब्जियों से कमाया मोटा मुनाफा
बिजनौर। गन्ने की फसल की हो रही दुर्गति को देखकर किसान दूसरी फसलों की ओर रुख करने लगे हैं। किसान राजवीर सिंह प्रजापति ने आधे खेत में जैविक खेती से सब्जी बोई। राजवीर सिंह को आधी जमीन में ही गन्ने से ज्यादा रुपया मिल गया। अब वह अपनी बाकी जमीन में भी सब्जी बोने की तैयारी कर रहा है। बाकी किसान भी राजवीर सिंह की खेती का मॉडल अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।
गांव शादीपुर निवासी राजवीर सिंह प्रजापति के पास करीब 11 बीघा जमीन है। वे जमीन में गन्ना बोते थे। 11 बीघा जमीन में करीब दो लाख का गन्ना निकलता था। इतने कम गन्ने की भी न तो समय पर पर्ची मिलती थीं और भुगतान। राजवीर सिंह ने किसानों के एक कार्यक्रम में जानकारी हासिल कर जैविक विधि से सब्जी की खेती शुरू की। सर्दी की शुरूआत में पांच बीघा खेत में टमाटर, मटर, चना, साग, गोभी आदि बोई। जैविक विधि की फसल होने के कारण सब्जी के दाम बाकी किसानों की सब्जी से दो से तीन रुपये प्रति किलो तक अधिक मिले। पांच बीघे के खेत से राजवीर सिंह ने करीब ढाई लाख रुपये की सब्जी बेची। अब राजवीर सिंह गन्ने की खेती को छोड़कर सब्जी की खेती अपना रहे हैं। गांव के बाकी किसान भी उनकी ही तरह सब्जी की खेती करने को जागरूक हो रहे हैं।
खेत में बना लिया पॉली हाउस
राजवीर सिंह ने अपने खेत में छोटा सा पॉली हाउस भी बनाया है। वह अपने खेत में ही पहले फसलों की नर्सरी तैयार करते हैं और फिर उन्हें खेत में बोते हैं। इससे खेत देर से खाली होने के बाद भी फसल की बुवाई लेट नहीं होती है। राजवीर सिंह खेत में खाद के लिए डी कंपोजर का प्रयोग करते हैं। यह जैविक विधि से काम करता है। इसे फसल पर भी स्प्रे किया जा सकता है। डी कंपोजर में मौजूद जीवाणु फसल के अवशेषों को गलाकर उन्हें खाद बना देते हैं। राजवीर सिंह के अनुसार किसानों को दूसरी फसलों की ओर भी रुख करना चाहिए। जैविक विधि से सब्जी बोने में बहुत लाभ है। केवल गन्ने की खेती के भरोसे नहीं रहना चाहिए।
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बिजनौर। गन्ने की फसल की हो रही दुर्गति को देखकर किसान दूसरी फसलों की ओर रुख करने लगे हैं। किसान राजवीर सिंह प्रजापति ने आधे खेत में जैविक खेती से सब्जी बोई। राजवीर सिंह को आधी जमीन में ही गन्ने से ज्यादा रुपया मिल गया। अब वह अपनी बाकी जमीन में भी सब्जी बोने की तैयारी कर रहा है। बाकी किसान भी राजवीर सिंह की खेती का मॉडल अपनाने के लिए आगे आ रहे हैं।
गांव शादीपुर निवासी राजवीर सिंह प्रजापति के पास करीब 11 बीघा जमीन है। वे जमीन में गन्ना बोते थे। 11 बीघा जमीन में करीब दो लाख का गन्ना निकलता था। इतने कम गन्ने की भी न तो समय पर पर्ची मिलती थीं और भुगतान। राजवीर सिंह ने किसानों के एक कार्यक्रम में जानकारी हासिल कर जैविक विधि से सब्जी की खेती शुरू की। सर्दी की शुरूआत में पांच बीघा खेत में टमाटर, मटर, चना, साग, गोभी आदि बोई। जैविक विधि की फसल होने के कारण सब्जी के दाम बाकी किसानों की सब्जी से दो से तीन रुपये प्रति किलो तक अधिक मिले। पांच बीघे के खेत से राजवीर सिंह ने करीब ढाई लाख रुपये की सब्जी बेची। अब राजवीर सिंह गन्ने की खेती को छोड़कर सब्जी की खेती अपना रहे हैं। गांव के बाकी किसान भी उनकी ही तरह सब्जी की खेती करने को जागरूक हो रहे हैं।
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खेत में बना लिया पॉली हाउस
राजवीर सिंह ने अपने खेत में छोटा सा पॉली हाउस भी बनाया है। वह अपने खेत में ही पहले फसलों की नर्सरी तैयार करते हैं और फिर उन्हें खेत में बोते हैं। इससे खेत देर से खाली होने के बाद भी फसल की बुवाई लेट नहीं होती है। राजवीर सिंह खेत में खाद के लिए डी कंपोजर का प्रयोग करते हैं। यह जैविक विधि से काम करता है। इसे फसल पर भी स्प्रे किया जा सकता है। डी कंपोजर में मौजूद जीवाणु फसल के अवशेषों को गलाकर उन्हें खाद बना देते हैं। राजवीर सिंह के अनुसार किसानों को दूसरी फसलों की ओर भी रुख करना चाहिए। जैविक विधि से सब्जी बोने में बहुत लाभ है। केवल गन्ने की खेती के भरोसे नहीं रहना चाहिए।
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