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खांडसारी इकाई लगाने में उद्यमी नहीं ले रहे दिलचस्पी
Updated Fri, 03 Aug 2018 12:30 AM IST
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बिजनौर। जिले के उद्यमी खांडसारी इकाई लगाने में दिलचस्पी नही ले रहे हैं। सहायक चीनी आयुक्त दफ्तर में मात्र सात आवेदन नई इकाई लगाने की मंजूरी के लिए आए हैं।
शासन ने गुड़ उद्योग को बढ़ावा देकर चीनी मिलों का गन्ने का दवाब कम करने के लिए खांडसारी उद्यमियों को नई यूनिट लगाने के लिए प्रेरित करने की मुहिम शुरू की है। खांडसारी और गन्ना विभाग उद्यमियों को शासन की ओर से घोषित सुविधाओं की जानकारी दे रहे हैं। सहायक चीनी आयुक्त चंदन सिंह वर्मा के अनुसार नई खांडसारी इकाई लगाने के लिए सात आवेदन आए है। दो आवेदन अंतिम मंजूरी के लिए वेबसाइट पर अपलोड कर दिए हैं। जिले में 130 खांडसारी इकाई पंजीकृत हैं। इनमें वित्तीय वर्ष 2017-2018 में 51 इकाई चली थी। इन इकाइयों ने करीब 40 लाख क्विंटल गन्ना पेरा था। खांडसारी इकाई गुड़ भी बनाती है। जिला गन्ना बाहुल्य है, इसलिए खांडसारी इकाई चीनी मिलों से काफी पहले चल जाती हैं। सहायक चीनी आयुक्त के मुताबिक 79 इकाई बंद पड़ी हैं। अधिकांश इकाईयों ने मशीनरी बेच दी है। खांडसारी इकाइयों की टेक्नोलॉजी अपग्रेड नहीं होने से रिकवरी कम है। जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार यदि खांडसारी उद्योग अपनी पटरी पर लौट आता है तो चीनी मिलों का गन्ना दवाब काफी हद तक कम हो जाएगा।
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शासन ने गुड़ उद्योग को बढ़ावा देकर चीनी मिलों का गन्ने का दवाब कम करने के लिए खांडसारी उद्यमियों को नई यूनिट लगाने के लिए प्रेरित करने की मुहिम शुरू की है। खांडसारी और गन्ना विभाग उद्यमियों को शासन की ओर से घोषित सुविधाओं की जानकारी दे रहे हैं। सहायक चीनी आयुक्त चंदन सिंह वर्मा के अनुसार नई खांडसारी इकाई लगाने के लिए सात आवेदन आए है। दो आवेदन अंतिम मंजूरी के लिए वेबसाइट पर अपलोड कर दिए हैं। जिले में 130 खांडसारी इकाई पंजीकृत हैं। इनमें वित्तीय वर्ष 2017-2018 में 51 इकाई चली थी। इन इकाइयों ने करीब 40 लाख क्विंटल गन्ना पेरा था। खांडसारी इकाई गुड़ भी बनाती है। जिला गन्ना बाहुल्य है, इसलिए खांडसारी इकाई चीनी मिलों से काफी पहले चल जाती हैं। सहायक चीनी आयुक्त के मुताबिक 79 इकाई बंद पड़ी हैं। अधिकांश इकाईयों ने मशीनरी बेच दी है। खांडसारी इकाइयों की टेक्नोलॉजी अपग्रेड नहीं होने से रिकवरी कम है। जिला गन्ना अधिकारी यशपाल सिंह के अनुसार यदि खांडसारी उद्योग अपनी पटरी पर लौट आता है तो चीनी मिलों का गन्ना दवाब काफी हद तक कम हो जाएगा।
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