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प्रशिक्षण से पहले टीईटी करना शिक्षकों को पड़ा भारी
Updated Thu, 14 Jun 2018 01:00 AM IST
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प्रशिक्षण से पहले टीईटी करना पड़ा भारी
बिजनौर। बीएड और बीटीसी की परीक्षा उत्तीर्ण करने से पहले टीईटी की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले शिक्षकों की नियुक्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति को गलत बताया है। जबकि जिले में ऐसे शिक्षकों की भरमार है, जिन्होंने बीएड, बीटीसी की परीक्षा से पहले टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण की है। बेसिक शिक्षा विभाग ने ऐसे शिक्षकों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश ने उन परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों में खलबली मचा दी है जिन्होंने बीएड, बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त करने से पहले ही टीईटी की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। जबकि बीटीसी, बीएड का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद यह परीक्षा उत्तीर्ण करनी थी। 2011 में गणित एवं विज्ञान के 29 हजार शिक्षकों की भर्ती तथा उसके बाद अन्य पांच बार हुई बीटीसी व उर्दू बीटीसी शिक्षक भर्ती में ऐसे शिक्षकों की संख्या जिले में काफी है, जिन्होंने बीएड व बीटीसी का प्रशिक्षण पूरा होने से पहले ही टीईटी की परीक्षा उत्तीर्ण कर परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नौकरी पा ली। अब हाई कोर्ट ने ऐसे शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए कहा है। जिले में करीब 200 ऐसे शिक्षक बताए जाते हैं जिन्होंने टीईटी परीक्षा पहले ही उत्तीर्ण कर ली थी। इन शिक्षकों को नौकरी करते कई साल हो गए हैं। शिक्षक भी अपने बचाव के लिए पुन: कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में लगे हैं। शिक्षा विभाग ने ब्लाक स्तर पर ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करने की योजना बनाई है। जबकि शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच भी पूरे हुए पांच-छह साल बीत चुके हैं। पर अब हाई कोर्ट का आदेश आने से शिक्षक परेशान है। उधर, बीएसए महेश चंद का कहना है कि शासन का जो भी आदेश होगा उसका पालन कराया जाएगा।
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बिजनौर। बीएड और बीटीसी की परीक्षा उत्तीर्ण करने से पहले टीईटी की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले शिक्षकों की नियुक्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ऐसे शिक्षकों की नियुक्ति को गलत बताया है। जबकि जिले में ऐसे शिक्षकों की भरमार है, जिन्होंने बीएड, बीटीसी की परीक्षा से पहले टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण की है। बेसिक शिक्षा विभाग ने ऐसे शिक्षकों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है।
इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश ने उन परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों में खलबली मचा दी है जिन्होंने बीएड, बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त करने से पहले ही टीईटी की परीक्षा उत्तीर्ण कर ली थी। जबकि बीटीसी, बीएड का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद यह परीक्षा उत्तीर्ण करनी थी। 2011 में गणित एवं विज्ञान के 29 हजार शिक्षकों की भर्ती तथा उसके बाद अन्य पांच बार हुई बीटीसी व उर्दू बीटीसी शिक्षक भर्ती में ऐसे शिक्षकों की संख्या जिले में काफी है, जिन्होंने बीएड व बीटीसी का प्रशिक्षण पूरा होने से पहले ही टीईटी की परीक्षा उत्तीर्ण कर परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नौकरी पा ली। अब हाई कोर्ट ने ऐसे शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए कहा है। जिले में करीब 200 ऐसे शिक्षक बताए जाते हैं जिन्होंने टीईटी परीक्षा पहले ही उत्तीर्ण कर ली थी। इन शिक्षकों को नौकरी करते कई साल हो गए हैं। शिक्षक भी अपने बचाव के लिए पुन: कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में लगे हैं। शिक्षा विभाग ने ब्लाक स्तर पर ऐसे शिक्षकों की सूची तैयार करने की योजना बनाई है। जबकि शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच भी पूरे हुए पांच-छह साल बीत चुके हैं। पर अब हाई कोर्ट का आदेश आने से शिक्षक परेशान है। उधर, बीएसए महेश चंद का कहना है कि शासन का जो भी आदेश होगा उसका पालन कराया जाएगा।
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