{"_id":"5a26dbf44f1c1baf678bfe69","slug":"51512496116-bijnor-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीएम को भागूवाला के ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीएम को भागूवाला के ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन
Updated Tue, 05 Dec 2017 11:18 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नजीबाबाद/भागूवाला (बिजनौर)। भागूवाला के ग्रामीणों ने डीएम को प्रार्थना पत्र देकर आठ वर्ष से चल रही चकबंदी प्रक्रिया पूर्णरूप से बंद करने और भागूवाला क्षेत्र में धारा छह के आदेश पारित करने की मांग की।
भागूवाला क्षेत्र में कई वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। चकबंदी अधिकारियों पर भूमाफियाओं से हमसाज होने कर आरोप है। क्षेत्र के वरिष्ठ अधिवक्ता मो. अहसान के नेतृत्व में भागूवाला और मंडावली के ग्रामीणों ने मंगलवार को डीएम जगतराज को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का आरोप है कि चकबंदी प्रक्रिया के दौरान चकबंदी अधिकारी प्रॉपर्टी डीलरों और आर्थिक रूप से संपन्न जमीन मालिकों से हमसाज होकर छोटे किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की जमीनें खुर्द बुर्द कर रहे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि चकबंदी आयुक्त और डीएम बिजनौर के समक्ष पूर्व में उठाई गई चकबंदी समस्या पर खुली बैठक बुलाई गई थी। जिसमें ग्राम प्रधान, चकबंदी समिति के सदस्य और किसानों ने सर्वसम्मति से चकबंदी प्रक्रिया बंद करने का प्रस्ताव पास किया था। तत्कालीन डीएम ने चकबंदी प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। आरोप है कि चकबंदी विभाग के अधिकारियों ने चकबंदी आयुक्त लखनऊ और प्रशासन को गुमराह कर रोक का प्रस्ताव निरस्त करा दिया। ग्रामीणों ने चकबंदी बंद कराने के संबंध में उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर होने का दावा करते हुए डीएम से भागूवाला की चकबंदी प्रक्रिया तत्काल रोकने और क्षेत्र में धारा छह कराने का आदेश जारी करने की मांग की। डीएम से मिले प्रतिनिधिमंडल में मो. अहसान, मो. नाजिम, मो. आरिफ, नईम अंसारी, मो. शहबाज, महबूब अहमद, अब्दुल खालिद, मो. असलम, शौकत सहित अनेक ग्रामीण शामिल थे।
विज्ञापन
भागूवाला क्षेत्र में कई वर्षों से चकबंदी प्रक्रिया चल रही है। चकबंदी अधिकारियों पर भूमाफियाओं से हमसाज होने कर आरोप है। क्षेत्र के वरिष्ठ अधिवक्ता मो. अहसान के नेतृत्व में भागूवाला और मंडावली के ग्रामीणों ने मंगलवार को डीएम जगतराज को ज्ञापन सौंपा। ग्रामीणों का आरोप है कि चकबंदी प्रक्रिया के दौरान चकबंदी अधिकारी प्रॉपर्टी डीलरों और आर्थिक रूप से संपन्न जमीन मालिकों से हमसाज होकर छोटे किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की जमीनें खुर्द बुर्द कर रहे हैं। पीड़ितों का आरोप है कि चकबंदी आयुक्त और डीएम बिजनौर के समक्ष पूर्व में उठाई गई चकबंदी समस्या पर खुली बैठक बुलाई गई थी। जिसमें ग्राम प्रधान, चकबंदी समिति के सदस्य और किसानों ने सर्वसम्मति से चकबंदी प्रक्रिया बंद करने का प्रस्ताव पास किया था। तत्कालीन डीएम ने चकबंदी प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। आरोप है कि चकबंदी विभाग के अधिकारियों ने चकबंदी आयुक्त लखनऊ और प्रशासन को गुमराह कर रोक का प्रस्ताव निरस्त करा दिया। ग्रामीणों ने चकबंदी बंद कराने के संबंध में उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर होने का दावा करते हुए डीएम से भागूवाला की चकबंदी प्रक्रिया तत्काल रोकने और क्षेत्र में धारा छह कराने का आदेश जारी करने की मांग की। डीएम से मिले प्रतिनिधिमंडल में मो. अहसान, मो. नाजिम, मो. आरिफ, नईम अंसारी, मो. शहबाज, महबूब अहमद, अब्दुल खालिद, मो. असलम, शौकत सहित अनेक ग्रामीण शामिल थे।
विज्ञापन