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एक जुलाई से लागू हो रही जीएसटी कर प्रणाली का व्यापारियों ने किया विरोध
Updated Sat, 01 Jul 2017 02:07 AM IST
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व्यापारी बोले जीएसटी के जो नियम हैं वह व्यापारी हित में नहीं हैं
जीएसटी में व्यापारियों के हित में संशोधन करने की आवाज उठाई
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
व्यापार मंडल अमरोहा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल ने एक जुलाई से लागू होने जा रही जीएसटी कर प्रणाली में व्यापारी हितों के खिलाफ लागू किए जा रहे नियमों के विरोध में कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। व्यापार संगठनों ने व्यापारी हित को ध्यान में रखते हुए जीएसटी में संशोधन की आवाज उठाते हुए वित्तमंत्री भारत सरकार को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
व्यापार मंडल अमरोहा के आह्वान पर नगर के व्यापारी बिजनौर रोड स्थित व्यापारी नेता सलाउ्ददीन मंसूरी के प्रतिष्ठान पर एकत्र हुए। प्रांतीय संगठन के उपाध्यक्ष व नगर इकाई के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम मंसूरी ने बताया कि एक जुलाई से लागू होने जा रहे जीएसटी कानून में बहुत खामियां हैं। जीएसटी में जो खामियां है, उन्हें दूर किया जाए। कहा कि कपड़ा व्यापार पर जीएसटी लागू किया गया है लेकिन तीस जून को व्यापारियों के पास एक्साइज ड्यूटी पेड का जो स्टाक है, इस स्टाक की बिक्री पर जीएसटी देना होगा। इस पर कपड़ा व्यापारियों पर दोहरी मार पड़ेगी। कपड़े के वर्तमान स्टॉक को जीएसटी से मुक्त रखने की व्यवस्था की जाए। इसके अतिरिक्त मंडी शुल्क को जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है। प्रदेश में मंडी शुल्क समाप्त किया जाए। जिला अध्यक्ष चेतन गुप्ता ने बताया कि जीएसटी में एक ट्रेड कंप्यूनिटी में कई-कई दरें रखी गई हैं। जिसके कारण व्यापारी को टैक्स गणना में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में किराने की वस्तुओं पर पांच व 12 प्रतिशत, स्टेशनरी पर पांच से 12 व 28 प्रतिशत दरों, दवाओं पर पांच से 12, 18 तथा जनरल मर्चेंट पर चार दर रखी गई हैं जो उचित नहीं हैं। तेरह सूत्रीय मांगों के संबंध में वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा गया। जिला अध्यक्ष चेतन गुप्ता, संरक्षण नारायण दास अग्रवाल, जिला महामंत्री सुबोध रस्तौगी, जिला युवा अध्यक्ष अनवर सालिम, साजिद मंसूरी, अमित मोहन, गोयल, आकाश अग्रवाल, सुरेश कुमार बिरमानी, निगम चतुर्वेदी, शंकर प्रवाश, सुबोध रस्तोगी, फकीर चंद यादव, मोहम्मद इरफान, नदीम उस्मानी, साधू महाराज, शाहनवाज अख्तर, भुवनेश कुमार शर्मा, मोहम्मद हनीफ आदि मौजूद रहे।
उधर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष सतीश कुमार अरोड़ा के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारी और व्यापारियों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर पांच सूत्रीय मांगों के संबंध में वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। जीएसटी में संशोधन की मांग की।
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प्रमुख मांगों में छोटी-छोटी त्रुटियों पर लगने वाली पेनाल्टी का प्रावधान समाप्त किया जाए। पीवी बिल को एक वर्ष के लिए स्थगित रखा जाए। कपड़े पर जीएसटी प्रणाली एक वर्ष तक स्थगित रखी जाए। जीएसटी लागू होने पर संभावित इंस्पेक्टर राज को हावी होने से रोका जाए। मंडी समिति शुल्क समाप्त करके जीएसटी में समायोजित किया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में जिला महामंत्री अशोक रस्तौगी, घनश्याम भार्गव, मुदित रस्तौगी, योगेश चंद्र सर्राफ, मनोज वर्मा, खालिद सिद्दीकी, चौधरी शकील, योगेश चंद्र सर्राफ, मुकेश कुमार रस्तौगी, श्याम गुप्ता आदि मौजूद रहे।
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जीएसटी में व्यापारियों के हित में संशोधन करने की आवाज उठाई
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा।
व्यापार मंडल अमरोहा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल ने एक जुलाई से लागू होने जा रही जीएसटी कर प्रणाली में व्यापारी हितों के खिलाफ लागू किए जा रहे नियमों के विरोध में कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। व्यापार संगठनों ने व्यापारी हित को ध्यान में रखते हुए जीएसटी में संशोधन की आवाज उठाते हुए वित्तमंत्री भारत सरकार को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा।
व्यापार मंडल अमरोहा के आह्वान पर नगर के व्यापारी बिजनौर रोड स्थित व्यापारी नेता सलाउ्ददीन मंसूरी के प्रतिष्ठान पर एकत्र हुए। प्रांतीय संगठन के उपाध्यक्ष व नगर इकाई के अध्यक्ष मोहम्मद इब्राहीम मंसूरी ने बताया कि एक जुलाई से लागू होने जा रहे जीएसटी कानून में बहुत खामियां हैं। जीएसटी में जो खामियां है, उन्हें दूर किया जाए। कहा कि कपड़ा व्यापार पर जीएसटी लागू किया गया है लेकिन तीस जून को व्यापारियों के पास एक्साइज ड्यूटी पेड का जो स्टाक है, इस स्टाक की बिक्री पर जीएसटी देना होगा। इस पर कपड़ा व्यापारियों पर दोहरी मार पड़ेगी। कपड़े के वर्तमान स्टॉक को जीएसटी से मुक्त रखने की व्यवस्था की जाए। इसके अतिरिक्त मंडी शुल्क को जीएसटी में शामिल नहीं किया गया है। प्रदेश में मंडी शुल्क समाप्त किया जाए। जिला अध्यक्ष चेतन गुप्ता ने बताया कि जीएसटी में एक ट्रेड कंप्यूनिटी में कई-कई दरें रखी गई हैं। जिसके कारण व्यापारी को टैक्स गणना में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि वर्तमान में किराने की वस्तुओं पर पांच व 12 प्रतिशत, स्टेशनरी पर पांच से 12 व 28 प्रतिशत दरों, दवाओं पर पांच से 12, 18 तथा जनरल मर्चेंट पर चार दर रखी गई हैं जो उचित नहीं हैं। तेरह सूत्रीय मांगों के संबंध में वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा गया। जिला अध्यक्ष चेतन गुप्ता, संरक्षण नारायण दास अग्रवाल, जिला महामंत्री सुबोध रस्तौगी, जिला युवा अध्यक्ष अनवर सालिम, साजिद मंसूरी, अमित मोहन, गोयल, आकाश अग्रवाल, सुरेश कुमार बिरमानी, निगम चतुर्वेदी, शंकर प्रवाश, सुबोध रस्तोगी, फकीर चंद यादव, मोहम्मद इरफान, नदीम उस्मानी, साधू महाराज, शाहनवाज अख्तर, भुवनेश कुमार शर्मा, मोहम्मद हनीफ आदि मौजूद रहे।
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उधर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल के जिला अध्यक्ष सतीश कुमार अरोड़ा के नेतृत्व में संगठन के पदाधिकारी और व्यापारियों ने कलक्ट्रेट पहुंचकर पांच सूत्रीय मांगों के संबंध में वित्त मंत्री को संबोधित ज्ञापन डीएम को सौंपा। जीएसटी में संशोधन की मांग की।
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प्रमुख मांगों में छोटी-छोटी त्रुटियों पर लगने वाली पेनाल्टी का प्रावधान समाप्त किया जाए। पीवी बिल को एक वर्ष के लिए स्थगित रखा जाए। कपड़े पर जीएसटी प्रणाली एक वर्ष तक स्थगित रखी जाए। जीएसटी लागू होने पर संभावित इंस्पेक्टर राज को हावी होने से रोका जाए। मंडी समिति शुल्क समाप्त करके जीएसटी में समायोजित किया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में जिला महामंत्री अशोक रस्तौगी, घनश्याम भार्गव, मुदित रस्तौगी, योगेश चंद्र सर्राफ, मनोज वर्मा, खालिद सिद्दीकी, चौधरी शकील, योगेश चंद्र सर्राफ, मुकेश कुमार रस्तौगी, श्याम गुप्ता आदि मौजूद रहे।