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50 घंटे बाद भी गंगा में बहे लोगों का सुराग नहीं
अमर उजाला/बिजनौर
Updated Mon, 27 Aug 2018 12:22 AM IST
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नाव डूबने से लापता लोगों की तलाश करते एनडीआरएफ, बाढ़ राहत दल की टीम और ग्रामीण।
- फोटो : अमर उजाला
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बिजनौर में शुक्रवार को गांव चौहड़वाला के सामने नाव पलटने से गंगा में समाए नौ लोगों 50 घंटे बाद भी कोई पता नही चला है। रविवार को भी बैराज से लेकर रावली व राजारामपुर तक एनडीआएफ, पीएसी व स्थानीय गोताखोरों ने गंगा में संयुक्त रूप से सर्च अभियान चलाया। कोई सफलता नहीं मिली। गंगा मे इन टीमों को फोकस झाड़ियां रहीं।
शुक्रवार को मंडावर थाने के गांव डेबलगढ (राजारामपुर) के लोग नाव में सवार होकर गंगा पार करके पशुओं के लिए चारा लेने गए थे। चारा लेकर लौटते समय उनकी नाव चौहड़वाला के सामने गंगा के बीचोंबीच उफनती लहर में फंस गई थी। गांव वालों के मुताबिक नाव में 28 लोग सवार थे। 17 को उसी दिन लोगों ने गंगा से सकुशल निकल लिया था। नगीनी नाम की महिला का रावली से आगे गंगा में शव मिला था। शनिवार को मीना देवी महिला का भी रावली से आगे झाड़ियों में फंसा शव मिला था। हेलीकाप्टर के अलावा एनडीएआफ, पीएसी की टीम के साथ स्थानीय गोताखोर व गंगा में डूब लोगों के परिजन गंगा को खंगालने में जुटे रहे,पर कोई सफलता नहीं मिली। शनिवार की शाम छह बजे तक गंगा में सर्च अभियान चलाया गया। एक और महिला मिली, लेकिन उसकी भी मौत हो गई। रविवार सुबह करीब छह बजे ये टीम फिर से सक्रिय हो गई। यह टीम दिनभर गंगा को खंगालती रही पर उन्हें कोई नहीं मिला। इन टीमों को फोकस गंगा में खड़ी झाड़ी पर रहा। इन टीमों को उम्मीद रही कि झाड़ियों में गंगा में डूबा कोई न कोई हो सकता है ,पर कोई नहीं मिला। टीम ने राजारामपुर से लेकर गंगा बैराज तक अभियान चलाया। स्थानीय गोताखोर, टायरों व नाव के सहारे गंगा मेें सक्रिय रहे। एनडीआरएफ व पीएसी की टीम भी स्थानीय गोताखोरों की मदद लेती रही। एडीएम बृजेश सिंह व सीओ महेश कुमार भी गंगा के क्षेत्र में सक्रिय रहे। टीमों से हर पल की जानकारी लेते रहे।
जवानों ने बोट से उतरकर झाड़ियों को खंगाला
पीएसी की टीम ने अपनी बोट से कई जगह गंगा में झाड़ियों को खंगाला। पीएसी के जवान बोट से उतर कर गंगा मेें लंबा डंडा हाथ में लेकर झाड़ियों को देर तक खंगालने में जुटे रहे पर झाड़ियों में उन्हें कुछ नहीं मिला। गंगा में सर्च अभियान चलाने वाली टीमों का फोकस वह क्षेत्र रहा, जहां पक्षी मंडराते दिखाई दिए। उस क्षेत्र को खंगालने में जुटी रही। एनडीआरफ, पीएसी की टीम व नाव में सवार स्थानीय गोताखोर एक साथ तालमेल बनाकर लगे रहे। गंगा में पानी अधिक होकर के कारण रविवार को टीमों को दिक्कत भी आई।
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तटबंध पर नहीं रही भीड़
रविवार को रावली के तटबंध पर रक्षाबंधन की वजह से भीड़ कम नजर आई। तटबंध पर कुछ युवक ही बाइक से घूमते दिखाई दिए। युवक लोगों से ये पता लगाते रहे कि गंगा में डूबने वाला कोई मिला है या नहीं। गंगा में डूबे लोगों के परिजन रक्षाबंधन पर भी गंगा में नाव लेकर सक्रिय नजर आए। गांव वालों की माने तो 28 लोग गंगा में डूबे थे। जो अब तक नौ नहीं मिले। न मिलने वालों में अधिकांश महिलाएं हैं। इनमें तीन युवती भी शामिल है। एक व्यक्ति कौन है ,उसका गांव वाले भी नाम और पता नहीं बता पा रहे। प्रशासन 27 लोगों के गंगा में डूबने का दावा कर रहा है। प्रशासन ने गंगा में डूबने वाले 27 लोगों की ही सूची जारी की है।
गंगा के अंदर रेत में दबने का अनुमान
गंगा में डूबे लोगों के गंगा के अंदर रेत में दबे रहने का सर्च अभियान में जुटी टीम अनुमान लगा रही है। उन्हें उम्मीद है कि एक दो दिन मेें रेत से निकलकर ये लोग पानी के ऊपर आ जाएंगे। हादसे के 48 घंटे के बाद अक्सर ऐसा होता आया है। 48 घंटे बाद भी किसी के नहीं मिलने से ये टीम चिंतित हैं।
डेबलगढ़ में मातम नहीं मना रक्षाबंधन
मंडावर। गांव डेबलगढ़ की दो महिलाओं की नाव पलटने से मौत होने और नौ के अब भी न मिलने से गांव डेबलगढ़ में मातम जैसा माहौल है। गांव में रक्षाबंधन का त्योहार भी नहीं मनाया गया। रविवार को गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप लगाकर परिजनों के स्वास्थ्य जांच की और दवाई दी।
गंगा में डूबी महिला नगिनी का शव शुक्रवार को ही और मीना देवी का शव शनिवार को मिल गया था। बाकी लोगों की गंगा में अब भी तलाश की जा रही है। गांव वाले पथराई आंखों से गंगा की ओर देखते रहते हैं। रविवार को गांव में रक्षाबंधन नहीं मनाया गया। गांव मे भाई ऐसे ही सूनी कलाई लेकर घूमते रहे। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। लापता लोगों के घरों में भी मातम जैसा माहौल है। परिजनों के सही सलामत मिलने की उम्मीद धुंधली पड़ती जा रही है। इनके परिवार वालों की आंखों से बहते आंसू खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। ये लोग प्रशासन ने गंगा में डूबे गांव वालों के न मिलने पर भी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं। कई लापता लोगों के परिवार की महिलाओं की हालत रोते-रोते खराब रहने लगी है। गांव वालों ने शनिवार को डीएम से इनका उपचार गांव में ही कराने की व्यवस्था की मांग की थी। रविवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची और इनकी स्वास्थ्य जांच कर दवाई वितरित की। गांव में एहतियात के तौर पर एंबुलेंस भी खड़ी कर दी गई है।
पहाड़ों पर बारिश से गंगा में आया उफान
मंडावर में पहाड़ों पर हो रही बारिश से गंगा और मालन फिर से उफनने लगी हैं। गंगा में रविवार को इस साल का सबसे अधिक पानी रहा। गंगा में एक लाख 82 हजार क्यूसेक पानी बह रहा है। पानी का बहाव भी बहुत तेज है। गंगा व मालन का पानी गांव ब्रह्मपुरी में भर गया है। बिजनौर-हरिद्वार मार्ग पर बने रपटे पर भी मालन का पानी दो फीट तक बह रहा है। इस सड़क से जाने वाले ट्रैफिक को नजीबाबाद रोड से भेजा जा रहा है। गांव डेबलगढ़ के जंगल के रास्ते में भी पानी भर गया है।
पहाड़ों पर हुई बारिश का पानी नदियों के जरिए मैदान में गंगा और मालन में मिलता है। कुछ दिनों से पहाड़ों पर लगातार बारिश हो रही है। बारिश से गंगा उफन गई हैं। जलस्तर काफी बढ़ गया है। धारा भी बहुत तेज हो गई है। इस रौद्र रूप को देखकर तटीय गांव वाले भी रविवार को पशुओं का चारा लाने के लिए गंगा पार नहीं गए। मालन नदी का जलस्तर शनिवार रात से ही बढ़ना शुरू हो गया। बिजनौर-हरिद्वार मार्ग पर बने रपटे पर रात नौ बजे दो फुट तक पानी बहने लगा। पुलिस ने रात में ही रपटे पर वाहनों का आवागमन रुकवा दिया। गंगा का पानी गांव डेबलगढ़ के जंगल वाले रास्ते पर भी भर गया है। हजारों बीघा फसलें गंगा में डूबी हैं। गांव ब्रह्मपुरी में शनिवार रात फिर से डेढ़ से दो फीट तक गंगा व मालन का पानी भर गया। गांव रावली को जाने वाले मालन नदी के रपटे पर भी तीन फीट तक पानी बह रहा है। कई गांवों का संपर्क सड़क मार्ग से टूट गया है। उनके लिए अब नाव ही आवागमन का एकमात्र जरिया बची है।
मध्य गंगा बैराज के जेई आयुष कुमार के अनुसार शनिवार को गंगा में एक लाख 60 हजार क्यूसेक पानी था। रविवार को पानी बढ़कर एक लाख 82 हजार क्यूसेक पानी हो गया है। इस साल गंगा में इतना पानी नहीं रहा है। अभी गंगा खतरे के निशान से नीचे है।
बिजनौर से छोड़ा सबसे ज्यादा पानी, आबादी पर बाढ़ का खतरा
गजरौला (अमरोहा)। गंगा का उफान खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। तिगरी में खतरे का निशान 1.80 मीटर दूर है। ब्रजघाट में यह दूरी एक मीटर भी नहीं रह गई है। गंगा के उफान से खादर में बाढ़ के हालात बने हुए है। अब तक आबादी बची हुई थी। हालांकि छह गांवों में बाहरी इलाकों में पानी आ गया था। लेकिन बिजनौर से अचानक रविवार दोपहर पौने दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया। इससे आबादी पर भी बाढ़ का संकट गहरा गया है। डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोडे़ जाने पर प्रशासन की ओर से बाढ़ की मुनादी शुरू करा दी जाती है। रविवार को बिजनौर बैराज से अब तक का सर्वाधिक 174460 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। यह पानी बाढ़ लाने के लिए काफी है। दोपहर में छोड़ा गया पानी रात में किसी समय तिगरी पहुंचेगा। खबर लिखे जाने तक खादर में हालात पहले जैसी थी। लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा था कि रात में खादर में बाढ़ के हालात बन सकते हैं। प्रशासन के मुताबिक डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर बाढ़ के हालात बन जाते हैं।
किसानों को अभी गंगा पार न जाने की हिदायत
मंडावर में चाहड़वाला के पास गंगा में नाव पलटने के हादसे से प्रशासन सतर्क हो गया है। गंगा के तटीय गांव वालों को गंगा में नाव से न जाने के लिए चौकस किया जा रहा है। जब तक गंगा में उफान कम नहीं होता, किसानों से गंगा पार न जाने के लिए कहा जा रहा है।
बीते साल बागपत में भी ऐसे ही हादसे में गांव वालों से भरी नाव गंगा में समा गई थी। हादसे में करीब दो दर्जन लोगों की मौत हुई थी। उस समय जिले में भी तटीय गांव वालों के लिए शासनादेश जारी किया गया था। नाव वालों के नंबर शासन वालों से रखने को कहा गया था। इसके अलावा नाव में बैठने वालों की संख्या निर्धारित की गई थी। बैठने वालों का रजिस्टर भी नाव वाले से बनाने को कहा गया था। लेकिन वक्त के साथ ये निर्देश हवा हवाई हो गए। अब जिले में हुए हादसे के बाद जिला प्रशासन फिर से सतर्क हो गया है।
खादर क्षेत्र में एक दर्जन से ज्यादा गांव गंगा किनारे बसे हैं। इन गांव वालों के खेत गंगा पार भी हैं। गांव वाले नाव से पशुओं के लिए चारा लाते हैं। इसके अलावा तट के पास गंगा कई धाराओं में बंट जाती है। धारा के बीच में मिट्टी इकट्ठा होने से बने खेत में भी किसान खेती करते हैं। छोटी धारा को ये गांव वाले यहां तक महिलाएं बिना नाव के पैदल चलकर ही पार करते हैं। इन महिलाओं को तैरना भी नहीं आता है। दो साल पहले ऐसे ही नदी पैदल पार करते समय दो सगी बहनों की डूबकर मौत हो गई थी। जिला प्रशासन ने गांव वालों को गंगा पार न जाने के निर्देश दिए हैं। रक्षाबंधन पर छुट्टी होने के बाद भी राजस्व विभाग की टीम गांवों में कैंप किए रही। गंगा पार जाने वाले किसानों की जानकारी ली गई। इन किसानों से गंगा का उफान खत्म न होने तक गंगा पार न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। तहसीलदार धर्मेंद्र सिंह के अनुसार गंगा में इस समय बहुत पानी चल रहा है। किसानों को फिलहाल गंगा पार न जाने के लिए कहा गया है।
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शुक्रवार को मंडावर थाने के गांव डेबलगढ (राजारामपुर) के लोग नाव में सवार होकर गंगा पार करके पशुओं के लिए चारा लेने गए थे। चारा लेकर लौटते समय उनकी नाव चौहड़वाला के सामने गंगा के बीचोंबीच उफनती लहर में फंस गई थी। गांव वालों के मुताबिक नाव में 28 लोग सवार थे। 17 को उसी दिन लोगों ने गंगा से सकुशल निकल लिया था। नगीनी नाम की महिला का रावली से आगे गंगा में शव मिला था। शनिवार को मीना देवी महिला का भी रावली से आगे झाड़ियों में फंसा शव मिला था। हेलीकाप्टर के अलावा एनडीएआफ, पीएसी की टीम के साथ स्थानीय गोताखोर व गंगा में डूब लोगों के परिजन गंगा को खंगालने में जुटे रहे,पर कोई सफलता नहीं मिली। शनिवार की शाम छह बजे तक गंगा में सर्च अभियान चलाया गया। एक और महिला मिली, लेकिन उसकी भी मौत हो गई। रविवार सुबह करीब छह बजे ये टीम फिर से सक्रिय हो गई। यह टीम दिनभर गंगा को खंगालती रही पर उन्हें कोई नहीं मिला। इन टीमों को फोकस गंगा में खड़ी झाड़ी पर रहा। इन टीमों को उम्मीद रही कि झाड़ियों में गंगा में डूबा कोई न कोई हो सकता है ,पर कोई नहीं मिला। टीम ने राजारामपुर से लेकर गंगा बैराज तक अभियान चलाया। स्थानीय गोताखोर, टायरों व नाव के सहारे गंगा मेें सक्रिय रहे। एनडीआरएफ व पीएसी की टीम भी स्थानीय गोताखोरों की मदद लेती रही। एडीएम बृजेश सिंह व सीओ महेश कुमार भी गंगा के क्षेत्र में सक्रिय रहे। टीमों से हर पल की जानकारी लेते रहे।
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जवानों ने बोट से उतरकर झाड़ियों को खंगाला
पीएसी की टीम ने अपनी बोट से कई जगह गंगा में झाड़ियों को खंगाला। पीएसी के जवान बोट से उतर कर गंगा मेें लंबा डंडा हाथ में लेकर झाड़ियों को देर तक खंगालने में जुटे रहे पर झाड़ियों में उन्हें कुछ नहीं मिला। गंगा में सर्च अभियान चलाने वाली टीमों का फोकस वह क्षेत्र रहा, जहां पक्षी मंडराते दिखाई दिए। उस क्षेत्र को खंगालने में जुटी रही। एनडीआरफ, पीएसी की टीम व नाव में सवार स्थानीय गोताखोर एक साथ तालमेल बनाकर लगे रहे। गंगा में पानी अधिक होकर के कारण रविवार को टीमों को दिक्कत भी आई।
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तटबंध पर नहीं रही भीड़
रविवार को रावली के तटबंध पर रक्षाबंधन की वजह से भीड़ कम नजर आई। तटबंध पर कुछ युवक ही बाइक से घूमते दिखाई दिए। युवक लोगों से ये पता लगाते रहे कि गंगा में डूबने वाला कोई मिला है या नहीं। गंगा में डूबे लोगों के परिजन रक्षाबंधन पर भी गंगा में नाव लेकर सक्रिय नजर आए। गांव वालों की माने तो 28 लोग गंगा में डूबे थे। जो अब तक नौ नहीं मिले। न मिलने वालों में अधिकांश महिलाएं हैं। इनमें तीन युवती भी शामिल है। एक व्यक्ति कौन है ,उसका गांव वाले भी नाम और पता नहीं बता पा रहे। प्रशासन 27 लोगों के गंगा में डूबने का दावा कर रहा है। प्रशासन ने गंगा में डूबने वाले 27 लोगों की ही सूची जारी की है।
गंगा के अंदर रेत में दबने का अनुमान
गंगा में डूबे लोगों के गंगा के अंदर रेत में दबे रहने का सर्च अभियान में जुटी टीम अनुमान लगा रही है। उन्हें उम्मीद है कि एक दो दिन मेें रेत से निकलकर ये लोग पानी के ऊपर आ जाएंगे। हादसे के 48 घंटे के बाद अक्सर ऐसा होता आया है। 48 घंटे बाद भी किसी के नहीं मिलने से ये टीम चिंतित हैं।
डेबलगढ़ में मातम नहीं मना रक्षाबंधन
मंडावर। गांव डेबलगढ़ की दो महिलाओं की नाव पलटने से मौत होने और नौ के अब भी न मिलने से गांव डेबलगढ़ में मातम जैसा माहौल है। गांव में रक्षाबंधन का त्योहार भी नहीं मनाया गया। रविवार को गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कैंप लगाकर परिजनों के स्वास्थ्य जांच की और दवाई दी।
गंगा में डूबी महिला नगिनी का शव शुक्रवार को ही और मीना देवी का शव शनिवार को मिल गया था। बाकी लोगों की गंगा में अब भी तलाश की जा रही है। गांव वाले पथराई आंखों से गंगा की ओर देखते रहते हैं। रविवार को गांव में रक्षाबंधन नहीं मनाया गया। गांव मे भाई ऐसे ही सूनी कलाई लेकर घूमते रहे। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। लापता लोगों के घरों में भी मातम जैसा माहौल है। परिजनों के सही सलामत मिलने की उम्मीद धुंधली पड़ती जा रही है। इनके परिवार वालों की आंखों से बहते आंसू खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। ये लोग प्रशासन ने गंगा में डूबे गांव वालों के न मिलने पर भी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की मांग कर रहे हैं। कई लापता लोगों के परिवार की महिलाओं की हालत रोते-रोते खराब रहने लगी है। गांव वालों ने शनिवार को डीएम से इनका उपचार गांव में ही कराने की व्यवस्था की मांग की थी। रविवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंची और इनकी स्वास्थ्य जांच कर दवाई वितरित की। गांव में एहतियात के तौर पर एंबुलेंस भी खड़ी कर दी गई है।
पहाड़ों पर बारिश से गंगा में आया उफान
मंडावर में पहाड़ों पर हो रही बारिश से गंगा और मालन फिर से उफनने लगी हैं। गंगा में रविवार को इस साल का सबसे अधिक पानी रहा। गंगा में एक लाख 82 हजार क्यूसेक पानी बह रहा है। पानी का बहाव भी बहुत तेज है। गंगा व मालन का पानी गांव ब्रह्मपुरी में भर गया है। बिजनौर-हरिद्वार मार्ग पर बने रपटे पर भी मालन का पानी दो फीट तक बह रहा है। इस सड़क से जाने वाले ट्रैफिक को नजीबाबाद रोड से भेजा जा रहा है। गांव डेबलगढ़ के जंगल के रास्ते में भी पानी भर गया है।
पहाड़ों पर हुई बारिश का पानी नदियों के जरिए मैदान में गंगा और मालन में मिलता है। कुछ दिनों से पहाड़ों पर लगातार बारिश हो रही है। बारिश से गंगा उफन गई हैं। जलस्तर काफी बढ़ गया है। धारा भी बहुत तेज हो गई है। इस रौद्र रूप को देखकर तटीय गांव वाले भी रविवार को पशुओं का चारा लाने के लिए गंगा पार नहीं गए। मालन नदी का जलस्तर शनिवार रात से ही बढ़ना शुरू हो गया। बिजनौर-हरिद्वार मार्ग पर बने रपटे पर रात नौ बजे दो फुट तक पानी बहने लगा। पुलिस ने रात में ही रपटे पर वाहनों का आवागमन रुकवा दिया। गंगा का पानी गांव डेबलगढ़ के जंगल वाले रास्ते पर भी भर गया है। हजारों बीघा फसलें गंगा में डूबी हैं। गांव ब्रह्मपुरी में शनिवार रात फिर से डेढ़ से दो फीट तक गंगा व मालन का पानी भर गया। गांव रावली को जाने वाले मालन नदी के रपटे पर भी तीन फीट तक पानी बह रहा है। कई गांवों का संपर्क सड़क मार्ग से टूट गया है। उनके लिए अब नाव ही आवागमन का एकमात्र जरिया बची है।
मध्य गंगा बैराज के जेई आयुष कुमार के अनुसार शनिवार को गंगा में एक लाख 60 हजार क्यूसेक पानी था। रविवार को पानी बढ़कर एक लाख 82 हजार क्यूसेक पानी हो गया है। इस साल गंगा में इतना पानी नहीं रहा है। अभी गंगा खतरे के निशान से नीचे है।
बिजनौर से छोड़ा सबसे ज्यादा पानी, आबादी पर बाढ़ का खतरा
गजरौला (अमरोहा)। गंगा का उफान खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। तिगरी में खतरे का निशान 1.80 मीटर दूर है। ब्रजघाट में यह दूरी एक मीटर भी नहीं रह गई है। गंगा के उफान से खादर में बाढ़ के हालात बने हुए है। अब तक आबादी बची हुई थी। हालांकि छह गांवों में बाहरी इलाकों में पानी आ गया था। लेकिन बिजनौर से अचानक रविवार दोपहर पौने दो लाख क्यूसेक पानी छोड़ दिया गया। इससे आबादी पर भी बाढ़ का संकट गहरा गया है। डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोडे़ जाने पर प्रशासन की ओर से बाढ़ की मुनादी शुरू करा दी जाती है। रविवार को बिजनौर बैराज से अब तक का सर्वाधिक 174460 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज किया गया। यह पानी बाढ़ लाने के लिए काफी है। दोपहर में छोड़ा गया पानी रात में किसी समय तिगरी पहुंचेगा। खबर लिखे जाने तक खादर में हालात पहले जैसी थी। लेकिन अंदाजा लगाया जा रहा था कि रात में खादर में बाढ़ के हालात बन सकते हैं। प्रशासन के मुताबिक डेढ़ लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर बाढ़ के हालात बन जाते हैं।
किसानों को अभी गंगा पार न जाने की हिदायत
मंडावर में चाहड़वाला के पास गंगा में नाव पलटने के हादसे से प्रशासन सतर्क हो गया है। गंगा के तटीय गांव वालों को गंगा में नाव से न जाने के लिए चौकस किया जा रहा है। जब तक गंगा में उफान कम नहीं होता, किसानों से गंगा पार न जाने के लिए कहा जा रहा है।
बीते साल बागपत में भी ऐसे ही हादसे में गांव वालों से भरी नाव गंगा में समा गई थी। हादसे में करीब दो दर्जन लोगों की मौत हुई थी। उस समय जिले में भी तटीय गांव वालों के लिए शासनादेश जारी किया गया था। नाव वालों के नंबर शासन वालों से रखने को कहा गया था। इसके अलावा नाव में बैठने वालों की संख्या निर्धारित की गई थी। बैठने वालों का रजिस्टर भी नाव वाले से बनाने को कहा गया था। लेकिन वक्त के साथ ये निर्देश हवा हवाई हो गए। अब जिले में हुए हादसे के बाद जिला प्रशासन फिर से सतर्क हो गया है।
खादर क्षेत्र में एक दर्जन से ज्यादा गांव गंगा किनारे बसे हैं। इन गांव वालों के खेत गंगा पार भी हैं। गांव वाले नाव से पशुओं के लिए चारा लाते हैं। इसके अलावा तट के पास गंगा कई धाराओं में बंट जाती है। धारा के बीच में मिट्टी इकट्ठा होने से बने खेत में भी किसान खेती करते हैं। छोटी धारा को ये गांव वाले यहां तक महिलाएं बिना नाव के पैदल चलकर ही पार करते हैं। इन महिलाओं को तैरना भी नहीं आता है। दो साल पहले ऐसे ही नदी पैदल पार करते समय दो सगी बहनों की डूबकर मौत हो गई थी। जिला प्रशासन ने गांव वालों को गंगा पार न जाने के निर्देश दिए हैं। रक्षाबंधन पर छुट्टी होने के बाद भी राजस्व विभाग की टीम गांवों में कैंप किए रही। गंगा पार जाने वाले किसानों की जानकारी ली गई। इन किसानों से गंगा का उफान खत्म न होने तक गंगा पार न जाने की सख्त हिदायत दी गई है। तहसीलदार धर्मेंद्र सिंह के अनुसार गंगा में इस समय बहुत पानी चल रहा है। किसानों को फिलहाल गंगा पार न जाने के लिए कहा गया है।