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करूणा से समझी जाती है दूसरों की पीड़ा
Updated Tue, 27 Nov 2018 12:44 AM IST
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करुणा से समझी जाती है दूसरों की पीड़ा
बिजनौर। बाबा फुलसंदे वालों ने कहा कि मनुष्य करुणा से ही दूसरे की पीड़ा को समझ सकता है।
महादेवपुरम कॉलोनी में हुए सत्संग में उन्होंने कहा कि कोई कितनी ही पुण्य की बातें कह ले या कर ले, जब तक वह खुद उन्हें व्यवहार में नहीं लाता उसका कोई अर्थ नहीं है। सभी को प्रतिदिन सतकर्म करने चाहिए। कहा कि जब किसी का मन अशांत हो और मन घबराने लगे, तो कुछ देर के लिए आंख बंद करके ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। वासना हो या भयंकर क्रोध उस समय स्वयं को शांत कर लेना चाहिए। अकेले में परमेश्वर से बात करनी चाहिए और किसी के साथ होने पर परमेश्वर की चर्चा करनी चाहिए। मां-बाप को अकेला छोड़ने के बजाय उनकी सेवा करनी चाहिए। भाई-बहनों व रिश्तेदारों से बैर नहीं रखना चाहिए। अपने पालनहार ईश्वर की आराधना करनी चाहिए और वेद की रचनाओं को अर्थ सहित पढ़ना चाहिए।
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बिजनौर। बाबा फुलसंदे वालों ने कहा कि मनुष्य करुणा से ही दूसरे की पीड़ा को समझ सकता है।
महादेवपुरम कॉलोनी में हुए सत्संग में उन्होंने कहा कि कोई कितनी ही पुण्य की बातें कह ले या कर ले, जब तक वह खुद उन्हें व्यवहार में नहीं लाता उसका कोई अर्थ नहीं है। सभी को प्रतिदिन सतकर्म करने चाहिए। कहा कि जब किसी का मन अशांत हो और मन घबराने लगे, तो कुछ देर के लिए आंख बंद करके ईश्वर का स्मरण करना चाहिए। वासना हो या भयंकर क्रोध उस समय स्वयं को शांत कर लेना चाहिए। अकेले में परमेश्वर से बात करनी चाहिए और किसी के साथ होने पर परमेश्वर की चर्चा करनी चाहिए। मां-बाप को अकेला छोड़ने के बजाय उनकी सेवा करनी चाहिए। भाई-बहनों व रिश्तेदारों से बैर नहीं रखना चाहिए। अपने पालनहार ईश्वर की आराधना करनी चाहिए और वेद की रचनाओं को अर्थ सहित पढ़ना चाहिए।