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नर्सिंग होम में महिला की मौत पर हंगामा
Updated Wed, 18 Apr 2018 12:28 AM IST
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नहटौर। एएनएम के घर में अवैध रूप से संचालित नर्सिंग होम में नार्मल डिलीवरी के चक्कर में एक महिला की मौत हो गई। जच्चा-बच्चा की मौत होने पर ग्रामीणों ने नर्सिंग होम के सामने जमकर हंगामा किया। हंगामे को देखकर नर्सिंग होम संचालिका ने दरवाजे बंद कर लिए। महिला के पति ने थाने में तहरीर दी है।
गांव रूखड़ियों निवासी अर्जुन कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया है कि सोमवार सुबह उसने पत्नी माया को प्रसव पीड़ा होने पर बैरमनगर स्थित एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। पीएचसी में तैनात एएनएम ऊषा अपने घर में निजी नर्सिंग होम चलाती हैं। नार्मल डिलीवरी करने का भरोसा दिलाते हुए उसने 12 हजार रुपये भी जमा करा लिए। शाम के समय तबीयत खराब होने पर पास में ही स्थित एक निजी नर्सिंग होम में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भेज दिया। अल्ट्रासाउंड में बच्चे की मौत होने का पता चलने पर एएनएम ने एंबुलेंस बुलाकर उन्हें बिजनौर के लिए रेफर कर दिया। वहां चिकित्सकों ने महिला को भी मृत घोषित कर दिया।
जच्चा-बच्चा की मौत होने पर ग्रामीणों ने लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए नर्सिंग होम पर जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों का हंगामा देखकर एएनएम ने दरवाजे बंद कर लिए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत किया। आरोप है कि एएनएम की दो बेटी और एक बहू नहटौर पीएचसी और सीएचसी में तैनात हैं। कोतवाल चंद्रकिरण यादव ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है।
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उधर, चिकित्साधिकारी नहटौर गुरुचरण सिंह का कहना है कि नगर में संचालित इस तरह के अस्पतालों की जानकारी उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। सीएमओ राकेश मित्तल का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ जांच कराई जाएगी।
नाम के आगे एमडी लिखकर फंसाते हैं मरीज
नहटौर। अवैध रूप से संचालित ऐसे कई अस्पतालों के संचालकों के नाम के आगे एमडी लिखा जाता है। इस एमडी शब्द के फेर में कई बार शिक्षित लोग भी फंस जाते हैं। नगर में अवैध रूप से करीब एक दर्जन निजी नर्सिंग होम संचालित हैं। जिनमें डिलीवरी का काम किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी भी है। सरकारी अस्पतालों में तैनात नर्सों की सेटिंग से ही यह अस्पताल फल फूल रहे हैं। बताया जाता है कि एक डिलीवरी का तीन से चार हजार तक कमीशन मरीज को भेजने वाले को दिया जाता है। यहां आपरेशन करने के लिए ठेके पर बाहर से चिकित्सक भी बुलाए जाते हैं। कई बार चिकित्सकों के आने में देरी होने पर भी मरीजों की जान चली जाती है। बाहर से आने वाले अधिकांश चिकित्सक बड़े अस्पतालों में कंपाउंडर का काम करने वाले होते हैं। उन्हें चिकित्सक बताया जाता है।
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गांव रूखड़ियों निवासी अर्जुन कुमार ने पुलिस को दी तहरीर में बताया है कि सोमवार सुबह उसने पत्नी माया को प्रसव पीड़ा होने पर बैरमनगर स्थित एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया था। पीएचसी में तैनात एएनएम ऊषा अपने घर में निजी नर्सिंग होम चलाती हैं। नार्मल डिलीवरी करने का भरोसा दिलाते हुए उसने 12 हजार रुपये भी जमा करा लिए। शाम के समय तबीयत खराब होने पर पास में ही स्थित एक निजी नर्सिंग होम में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए भेज दिया। अल्ट्रासाउंड में बच्चे की मौत होने का पता चलने पर एएनएम ने एंबुलेंस बुलाकर उन्हें बिजनौर के लिए रेफर कर दिया। वहां चिकित्सकों ने महिला को भी मृत घोषित कर दिया।
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जच्चा-बच्चा की मौत होने पर ग्रामीणों ने लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए नर्सिंग होम पर जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों का हंगामा देखकर एएनएम ने दरवाजे बंद कर लिए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत किया। आरोप है कि एएनएम की दो बेटी और एक बहू नहटौर पीएचसी और सीएचसी में तैनात हैं। कोतवाल चंद्रकिरण यादव ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है।
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उधर, चिकित्साधिकारी नहटौर गुरुचरण सिंह का कहना है कि नगर में संचालित इस तरह के अस्पतालों की जानकारी उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। सीएमओ राकेश मित्तल का कहना है कि ऐसे लोगों के खिलाफ जांच कराई जाएगी।
नाम के आगे एमडी लिखकर फंसाते हैं मरीज
नहटौर। अवैध रूप से संचालित ऐसे कई अस्पतालों के संचालकों के नाम के आगे एमडी लिखा जाता है। इस एमडी शब्द के फेर में कई बार शिक्षित लोग भी फंस जाते हैं। नगर में अवैध रूप से करीब एक दर्जन निजी नर्सिंग होम संचालित हैं। जिनमें डिलीवरी का काम किया जाता है। स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी भी है। सरकारी अस्पतालों में तैनात नर्सों की सेटिंग से ही यह अस्पताल फल फूल रहे हैं। बताया जाता है कि एक डिलीवरी का तीन से चार हजार तक कमीशन मरीज को भेजने वाले को दिया जाता है। यहां आपरेशन करने के लिए ठेके पर बाहर से चिकित्सक भी बुलाए जाते हैं। कई बार चिकित्सकों के आने में देरी होने पर भी मरीजों की जान चली जाती है। बाहर से आने वाले अधिकांश चिकित्सक बड़े अस्पतालों में कंपाउंडर का काम करने वाले होते हैं। उन्हें चिकित्सक बताया जाता है।