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कवि सम्मेलन और मुशायरा
Updated Sun, 28 Jan 2018 12:57 AM IST
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बिजनौर। उर्दू टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने एकता व देश प्रेम को बढ़ावा देने के लिए गणतंत्र दिवस पर कवि सम्मेलन और मुशायरे का आयोजन किया। कार्यक्रम का आगाज चेयरपर्सन पति शमशाद अंसारी ने शमा रोशन कर किया। इस अवसर पर शायर अमीर नहटौरी के गजल संग्रह ‘यह जहां वो नहीं का’ विमोचन किया गया।
विकास भवन के हाल में आयोजित इस कार्यक्रम में अमीर नहटौरी ने फरमाया कि ‘ए वतन मेरे वतन यह है मेरा वचन-तुझपे कुर्बान कर दूंगा मैं जान ओ तन।’। शफक जफर ने कलाम ‘मर जाऊं वतन पर ये मेरे दिल के गगन है, नजरों में मेरी कबसे तिरंगे का कफन है’ को काफी पसंद किया गया। हसनैन नकवी ने फरमाया कि ‘जब मोहब्बत जवान होती है, यह जमीन आसमान होती है।’ मरगूब रहमानी ने फरमाया कि ‘हो गया हरा हर एक जख्म आज के दिन, गीत गूंजा न कोई फूल खिला आज के दिन।’ मोहम्मद तैय्यब जमाल के शेर जमाने में ‘जिसे सब लोग हिंदुस्तान कहते हैं,कोई पूछे अगर हमसे हम अपनी जान कहते हैं।’ को खूब दाद मिली। शफक बिजनौरी ने फरमाया कि ‘ए काश मिलकर हम सब मोहब्बतों से ऐसा काम करते, किसी की आंखों में जाकर बसते किसी के दिल में कयाम करते।’ रुकनपाल सिंह राजपूत ने कहा कि ‘चाहे तू किसान बन या भारत का जवान बन-जय जवान जय किसान बनकर शास्त्री का एलान बन।’ मैराज बिजनौरी ने फरमाया कि ‘चलो एक साथ मिलकर गाते हैं हम यही नारा, तुम्हे भी मुल्क प्यारा है मुझे भी मुल्क प्यारा।’ अध्यक्षता खुर्शीद मोहसिन जैदी व संचालन अमीर नहटौरी ने किया। इकबाल अहमद सिद्दीकी, नईम अहमद अंसारी, डा.समद आजाद, डा.मोहम्मद दानिश आजमी, जहीन गुल, शाईस्ता नगी, सलाउद्दीन, अकरम, नदीम, सूरज सिंह, नीरज शर्मा, वसीम अहमद आदि मौजूद रहे।
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विकास भवन के हाल में आयोजित इस कार्यक्रम में अमीर नहटौरी ने फरमाया कि ‘ए वतन मेरे वतन यह है मेरा वचन-तुझपे कुर्बान कर दूंगा मैं जान ओ तन।’। शफक जफर ने कलाम ‘मर जाऊं वतन पर ये मेरे दिल के गगन है, नजरों में मेरी कबसे तिरंगे का कफन है’ को काफी पसंद किया गया। हसनैन नकवी ने फरमाया कि ‘जब मोहब्बत जवान होती है, यह जमीन आसमान होती है।’ मरगूब रहमानी ने फरमाया कि ‘हो गया हरा हर एक जख्म आज के दिन, गीत गूंजा न कोई फूल खिला आज के दिन।’ मोहम्मद तैय्यब जमाल के शेर जमाने में ‘जिसे सब लोग हिंदुस्तान कहते हैं,कोई पूछे अगर हमसे हम अपनी जान कहते हैं।’ को खूब दाद मिली। शफक बिजनौरी ने फरमाया कि ‘ए काश मिलकर हम सब मोहब्बतों से ऐसा काम करते, किसी की आंखों में जाकर बसते किसी के दिल में कयाम करते।’ रुकनपाल सिंह राजपूत ने कहा कि ‘चाहे तू किसान बन या भारत का जवान बन-जय जवान जय किसान बनकर शास्त्री का एलान बन।’ मैराज बिजनौरी ने फरमाया कि ‘चलो एक साथ मिलकर गाते हैं हम यही नारा, तुम्हे भी मुल्क प्यारा है मुझे भी मुल्क प्यारा।’ अध्यक्षता खुर्शीद मोहसिन जैदी व संचालन अमीर नहटौरी ने किया। इकबाल अहमद सिद्दीकी, नईम अहमद अंसारी, डा.समद आजाद, डा.मोहम्मद दानिश आजमी, जहीन गुल, शाईस्ता नगी, सलाउद्दीन, अकरम, नदीम, सूरज सिंह, नीरज शर्मा, वसीम अहमद आदि मौजूद रहे।
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